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[[इलाहाबाद]], जवना के एकरे पुरान नाँव प्रयाग से भी बोलावल जाला, [[भारत]] के [[उत्तरी भारत|उत्तरी हिस्सा]] के राज्य [[उत्तर प्रदेश]] में एगो बड़ा आ प्रमुख शहर बाटे। मानल जाला की प्रयाग के नाँव ''इलाहाबाद'' बादशाह अकबर द्वारा 1575 ईसवी में राखल गइल जे अंगरेजी राज में, अंगरेजी में ''Allahabad'' हो गइल आ अंगरेजी में एकर इहे इस्पेलिंग लिखल जाए के कारन कुछ लोग ए के ''अलाहाबाद'' भी कहे ला। शहर एगो तिकोना आकार के जमीनी हिस्सा पर बसल बाटे जे तीन ओर से [[गंगा]] आ [[यमुना]] नदिन से घेराइल बाटे आ खाली पच्छिम ओर के जमीनी हिस्सा दुआब से जुड़ल बाटे।<ref>{{cite web|url=http://dsal.uchicago.edu/reference/gazetteer/pager.html?objectid=DS405.1.I34_V01_054.gif |title=Imperial Gazetteer2 of India, Volume 1, page 24 - Imperial Gazetteer of India - Digital South Asia Library |publisher=Dsal.uchicago.edu |date=2013-02-18 |accessdate=2016-07-09}}</ref> शहर के मुख्य महत्व [[हिंदू धर्म]] में पवित्र स्थान, [[तीर्थ]], के रूप में बाटे। हिंदू मत के अनुसार गंगा आ यमुना, दुनों नदी के पबित्र मानल गइल बा आ इनहन के मिले के अस्थान, संगम, [[त्रिवेणी संगम]] के नाँव से बोलावल जाला। मान्यता के अनुसार, [[वैदिक काल]] के [[सरस्वती नदी]] (जे अब सूख चुकल बा) प्राचीन काल में अहिजे गंगा आ यमुना के साथ मिले आ तीन गो नदिन के मिले के ई जगह त्रिवेणी संगम कहाय। ई जगह, भारत के चारि गो अइसन जगह में बा जहाँ [[कुंभ मेला]] लागे ला आ हिंदू लोग के तीर्थ हवे। साहित्य में आ [[हिंदू ग्रंथ]]न में कुछ जगहन पर एकरा के ''तीरथराज'' के उपाधि भी दिहल गइल बा। एकर प्राचीन नाँव प्रयाग ([[संस्कृत]] शब्द जेकर अर्थ बा "यज्ञ के भूमि"), ई मानल जाला कि [[ब्रह्मा]] के द्वारा एही जे यग्य करे करे के कारन पड़ल। ==इतिहास== ===प्राचीन काल=== [[File:Sculpture of Aditya, the Sun god, of Gupta period, from Garhwa, Allahabad, 1870s.jpg|thumb|right|200px|गढ़वा में एगो गुप्तकाल के मुरती]] प्रयाग क अस्तित्व [[वैदिक काल]] से बा आ वैदिक साहित्य में एकर वर्णन [[ब्रह्मा]] जी की यग्य की भूमि की रूप में भइल बा आ एही क समर्थन [[मत्स्यपुराण]] आ लिंगपुराण में भी मिलेला। इहवाँ पुरातात्विक खोदाई में पालिशदार उत्तरी काला मृदभाण्ड मिलल बा जेवन 600 ई॰पू॰ से 700 ई॰पू॰ के बतावल जाला। पुराणन में वर्णन मिलेला कि राजा [[ययाति]] जेवन प्रयाग से जा के सप्तसैन्धव प्रदेश पर विजय प्राप्त कइलें उनहीं के पाँच पुत्रन (यदु, द्रुह्य, पुरु, अनु, आ तुवर्शु) की नाँव पर [[ऋग्वेद]] की मुख्य जन क नाँव पड़ल।<ref>{{cite web|url=http://books.google.co.in/books?id=fK3VTUrWsD0C&pg=PA298&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false |title=Ancient Indian Social History: Some Interpretations - Romila Thapar - Google Books |publisher=Books.google.co.in |date= |accessdate=2016-07-09}}</ref> जब आर्य लोग मध्यदेश में आपना प्रभुत्व अस्थापित कइलें तब कौशाम्बी-प्रयाग क क्षेत्र उनहन लोगन की अधिकार में महत्वपूर्ण क्षेत्र रहल। कुरु लोग [[हस्तिनापुर]] की बाढ़ में बह गइला की बाद [[कौशाम्बी]] नगरी क अस्थापना कइलें जेवन ऋषि कोसंब की नाँव पर बसल<ref>{{cite web|url=http://allahabad.nic.in/history.htm |title=Welcome to the official website of Allahabad |publisher=Allahabad.nic.in |date= |accessdate=2016-07-09}}</ref>। महर्षि [[वाल्मीकि]] रचित [[रामायण]] में श्री [[राम]] के इहवाँ आगमन के वर्णन बा जब ऊ बनवास कि समय दक्षिण की ओर जात घरी इहँवा [[भारद्वाज ऋषि]] की आश्रम में रुकल रहलें। इहाँ से श्री राम भरद्वाज ऋषि की सुझाव के मानि के [[चित्रकूट]] की ओर गइलें आ उहाँ कुटी बना के रहे लगलें। [[File:Ashoka Pillar, Allahabad, 1870.jpg|thumb|right|200px|इलाहाबाद किला में अशोक के खंभा, 1870 के लिहल फोटो]] महाजनपद काल में प्रयाग के ई इलाका वत्स राज्य की अन्दर आवे जेकर राजधानी कौशाम्बी रहे। एकरी बाद [[भगवान बुद्ध]] के इहवाँ आगमन के वर्णन मिलल बा जब 450 ई॰पू॰ [[मगध]] में [[अजातशत्रु]] के शासन रहे <ref name="श्रीवास्तव">श्रीवास्तव</ref>। 319 ई॰पू॰में [[चंद्रगुप्त मौर्य]] कौशाम्बी पर अधिकार क लिह्लें आ प्रयाग भी उनकी अधिकार में आ गइल। 273 ई॰ में सम्राट अशोक की शासन काल में इहँवा एगो कीर्ति स्तंभ लगवावल गइल जेवन आज भी [[अशोक स्तंभ]] की नाँव से इलाहाबाद में अकबर की किला में सुरक्षित बा। ए पर उत्कीर्ण लेख के [[प्रयाग प्रशस्ति]] की नाँव से जानल जाला। प्रयाग प्रशस्ति में [[समुद्रगुप्त]] द्वारा 326 ई. में अश्वमेध यग्य कइला क वर्णन लिखल बा आ ए शिला लेख के रचयिता [[हरिषेण]] के मानल जाला। समुद्रगुप्त के खोदवावल कुआँ इलाहाबाद की बगल में झूँसी की लगे बा जेवना के [[समुद्रकूप]] कहल जाला। एकरी बाद 525 ई॰ में प्रयाग आ एकरी आसपास की इलाका पर [[कन्नौज]] की राजा यशोवर्मन क अधिकार हो गइल। सम्राट [[हर्षवर्द्धन]] की बारे में कहल जाला कि उहाँके हर कुंभ मेला में आपन सबकुछ दान क दीं। चीनी यात्री [[ह्वेन सांग]] के आगमन हर्षवर्धन की समय में भइल रहे आ ऊ प्रयाग के यात्रा कइलें आ अपनी बर्णन में लिखलें कि गंगा आ यमुना नदी जहाँ मिलेलीं उहाँ एगो बड़ा मंदिर आ विशाल पेड़ बा। उ इहो लिखलें कि ए पेड़ ([[अक्षयवट]]) से बहुत लोग कूदि के जान दे देला काहें की ई मान्यता बा कि ए परम पबित्र जगह पर मरला से स्वर्ग मिल जाई।<ref name="गजेटियर">गजेटियर</ref> हर्षवर्द्धन की बाद क लगभग 200 बारिस क इतिहास नामालूम बा। लगभग 810 ई. की बाद कन्नौज क शासन प्रतिहार राजपूत लोगन की द्वारा भइल आ 1090 ई॰ की आसपास [[कड़ा]] के इलाका चंद्रदेव गहड़वाल की कब्ज़ा में आ गइल। ए समय प्रयाग के शासन कड़ा से चले आ लगभग सारा जानकारी कड़ा की पुरालेख से प्राप्त होला। ===मध्यकाल=== [[File:Fort of Akbar, Allahabad, 1850s.jpg|thumb|अकबर की किला क एगो इतिहासी रेखाचित्र, 1850 ई॰]] [[मुहम्मद गोरी]] 1194 ई॰ में एक कि बाद एक [[दिल्ली]] आ कन्नौज पर अधिकार करत बनारस ले हमला कइलस आ प्रयाग की इलाका पर भी ओकर प्रभुत्व हो गइल। ओह समय से लेके अकबर की समय तक प्रयाग क प्रशासनिक महाव बहुत काम हो गइल रहे आ ई कड़ा से शासित इलाका में आवे। 1567 ई॰ में कड़ा के गवर्नर अली कुली खान की बागी हो गइला पर अकबर इहवाँ आ के ओ के हरा दिहलें आ पहिली बार प्रयाग के यात्रा कइलें अउरी ए अस्थान की सैनिक महत्व के महसूस कइलें। 1574 ई॰ अपनी दूसरी यात्रा की दौरान अकबर इहँवा ''इलाहाबाद'' शहर के अस्थापना कइलें आ किला के नीव रखलें। औरंगजेब की शासन काल में फ्रांसीसी यात्री टेवर्नियर बनारस जात समय एक दिन खातिर (6 दिसंबर, 1665 ई॰) इलाहाबाद में रुकल रहलें आ ए शहर क वर्णन एगो बड़ा आ ख़ूबसूरत शहर की रूप में कइलें।<ref name="श्रीवास्तव"/> सन 1739 ई॰ में मराठा सरदार राघोजी भोंसले इलाहाबाद पर आक्रमण करि के शहर में लूटपाट कइलस<ref name="गजेटियर"/>। सन 1759 ई॰ में इलाहाबाद शुजाउद्दौला की कब्ज़ा में आ गइल आ अंततः सन 1764 ई॰ की [[बक्सर क युद्ध|बक्सर की लड़ाई]] कि बाद इलाहाबाद के दीवानी अधिकार अंग्रेजन के मिल गइल आ सन 1801 ई॰ की बाद ई अंग्रेजन की राज्य में शामिल हो गइल। ===अंग्रेज शासन में === अंग्रेज इलाहाबाद पर अपनी अधिकार की बाद इहाँ एगो गैरीसन के अस्थापना कइले आ इलाहाबाद के प्रमुख सैनिक केन्द्र की रूप में महत्व दिहलें। अकबर की समय में इलाहाबाद [[सूबा]] में 12 गो [[सरकार]] आ 177 [[परगना]] क इलाका आवे जेवन ब्रिटिश काल में कम हो के 5 आ 23 बचल। सन 1825 में फतेहपुर ज़िला इलाहाबद से अलग कइल गइल आ सन 1842 ई॰ से 1862 ई॰ की बीच में कई बार मिर्जापुर आ इलाहाबाद की बीछ में जिला क सीमा में बदलाव भइल। सन 1829 ई॰ में इलाहाबाद में [[कमिश्नरी]] के अस्थापना भइल आ मिस्टर [[राबर्ट बार्लो]] इलाहाबाद के पहिला कमिश्नर नियुक्त भइलें, इलाहाबाद के पहिला [[कलेक्टर]] मिस्टर [[ए. अहमुट्टी]] रहलें जिनकी नाँव पर मोहल्ला [[मुट्ठीगंज]] बसल। 1834 ई॰ में इहँवा गवर्नर के आसन आइल आ 1858 ई में ई संयुक्त प्रान्त क राजधानी बन गईल। इहंवे [[लार्ड कैनिंग]] [[महारानी क घोषणापत्र]] पढ़ी के सुनावलें आ भारत के शासन [[ईस्ट इण्डिया कंपनी]] कि हाथ से महारानी की हाथ में चलि गइल। थोड़ा समय खातिर इलाहाबाद एह समय पूरा ब्रिटिश भारत क राजधानी रहल। एक तरह से देखल जाय त शहर क वर्तमान स्वरूप अंग्रेजन की समय में बनल। मुट्ठीगंज कीडगंज कोतवाली लूकरगंज, जार्जटाउन, एलनगंज, म्योराबाद जइसन मोहल्ला एही समय बसल। वर्तमान चौक मोहल्ला अंग्रेजन की समय से पाहिले तक एगो गड़ही की रूप में रहे जेवना की आसपास कुछ सागसब्जी आ अनाज के दूकान लगे। लार्ड कैनिंग की नाँव पर सिविल स्टेशन क विकास भइल आ ओ समय ए के कैनिंग टाउन कहल जाय जेवना के वर्तमान नाँव सिविल लाइन्स बा। वर्तमान महात्मा गाँधी मार्ग के ओ समय नाँव कैनिंग रोड रहे। सन 1866 ई. में इलाहाबाद में [[इलाहाबाद हाइकोर्ट|हाइकोर्ट]] के अस्थापना भइल आ ठीक बाद में एक साल खातिर आगरा भेज दिहल गइल लेकिन फिर 1868 ई. में वापस इलाहाबाद आ गइल आ तब से इहंवे बा। सन 1887 ई. में म्योर सेन्ट्रल कालेज के [[इलाहाबाद विश्विद्यालय]] की रूप में मान्यता दिहल गइल आ ई भारत क चौथा सभसे पुरान विश्विद्यालय बनल। [[File:Gandhi Patel 1940.jpg|thumb|left| [[महात्मा गाँधी]], जनवरी 1940 में [[आनंद भवन]] में कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में; बाएँ [[विजयलक्ष्मी पंडित]] आ दाहिने [[सरदार पटेल]]]] प्रथम स्वतंत्रता संघर्ष में इलाहाबाद के महत्वपूर्ण योगदान रहे। इहँवा ग़दर के नेतृत्व [[मौलवी लियाक़त अली]] कइलें। इहाँ 6 जून 1957 के बगावत शुरू भइल आ जल्दिये बागी सिपाही आ जनता रेलवे आ टेलीग्राफ पर कब्ज़ा क लिहलें। [[दारागंज]] में नाव की पुल पर बागी लोगन क कब्ज़ा हो गइल। मौलवी साहब, जेवन स्कूल के अध्यापक रहलें खुसरू बाग़ से आपन कमान सम्भाले शुरू कइलें। लगभग एक हफ्ता बाद 12 जून के कर्नल नील के पलटन बनारस से इहँवा पहुँचल आ दारागंज क पुल पर आपन कब्जा वापस लिहलस। एकरी बाद शहर में लड़ाई भइल आ तब मौलवी साहब अपनी लोगन की साथ शहर छोड़ के बाहर से लड़ाई करे लगलन। अंग्रेज सेना शहर पर वापस कब्ज़ा कइला की बाद लोगन पर बहुत अत्याचार कइलस। समदाबाद आ रसूलपुर नाँव क दू गो गाँव त पूरा क पूरा जरा दिहल गइलन। एही गाँवन की ज़मीन पर [[कंपनी बाग|अल्फ्रेड पार्क]] के निर्माण भइल जेवना के आजकाल [[कंपनी बाग|आज़ाद पार्क]] कहल जाला। भारत की [[भारत की आजादी के लड़ाई|स्वतंत्रता संग्राम]] में इलाहाबाद क योगदान हमेशा महत्वपूर्ण मानल जाला। इहाँ [[भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस|काँग्रेस]] क चौथा अधिवेशन लार्ड वेडरबर्न की अध्यक्षता में सन 1888 ई॰ में भइल। एकरी आलावा आठवाँ आ पचीसवाँ अधिवेशन क्रम से 1892 ई॰ आ 1910 ई॰ में भइल। सन 1920 ई॰ में आल-इण्डिया-खिलाफत कांफ्रेंस इलाहाबाद में आयोजित भइल। आज़ादी की लड़ाई में इलाहाबाद के नेता लोगन क लिस्ट भी बहुत लंबा बा। ए में से प्रमुख लोग रहे पं॰ अयोध्या नाथ, सुरेन्द्र नाथ सेन, पं॰ [[मदन मोहल मालवीय]], [[मोतीलाल नेहरू]], [[पुरुषोत्तम दास टंडन]], सी॰ वाई॰ चिंतामणि, हृदय नाथ कुंजरू, तेजबहादुर सप्रू, [[जवाहरलाल नेहरू]] इत्यादि। सुन्दरलाल आ मनाज़िर अली सोख्ता क्रांतिकारी दल क सदस्य रहे लोग। महान क्रन्तिकारी [[चंद्रशेखर आजाद]] इहँवे अल्फ्रेड पार्क में शहीद भइलें आ उनकी नाँव पर अब ए पार्क के [[कंपनी बाग|चंद्रशेखर आजाद पार्क]] कहल जाला। ==संदर्भ== {{Reflist}} [[श्रेणी:इलाहाबाद]] [[श्रेणी:इलाहाबाद के इतिहास| ]]
सारांश:
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