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विश्वनाथ (बाबा बिसेसरनाथ) के नगरी हवे जेवना की बारे में [[पुराण|पुराणन]] में कहल बा कि ई साक्षात् [[शिव|भगवान शंकर]] की त्रिशूल पर स्थित बा आ पूरा विश्व में प्रलय भइला पर भी ई नगरी अपनी अस्थान पर अडिग रहेले। [[शिव]] के अविमुक्तेश्वर रूप में अस्थान लिहला की कारण ए नगरी के अविमुक्तेश्वर क्षेत्र कहल जाला। [[बौद्ध धर्म]] आ [[जैन धर्म]] के माने वालन खातिर भी ए शहर के महत्व बा। इहाँ से करीब दस किलोमीटर दूर [[सारनाथ]] नाँव के अस्थान परेला जहाँ [[भगवान बुद्ध]] आपन पहिला उपदेश दिहले रहलन। == नामकरण == '''बनारस''' शब्द हिंदी आ संस्कृत में प्रचलित वाराणसी<ref>विश्वनाथाष्टकम्,श्लोक-1</ref> से निकलल हवे। वर्तमान समय में ए शहर के अफिशियल नाँव वाराणसी बा। वाराणसी शब्द की उत्पत्ति की बारे में कहल जाला कि वरुणा अउरी असी नाँव की दू गो नदियन की बीचा में बसल शहर के वाराणसी कहल गईल।<ref>कनिंघम, 1924, पेज 131-140</ref> एकर प्राचीन नाँव ''[[काशी]]'' हवे जेवन प्र'''काशि'''त से उत्पन्न मानल जाला। प्राचीन काल से विद्या की क्षेत्र में ए नगरी के परसिद्धी की वजह से ई नाँव धरईल होई। एकर अउरी कई गो नाँव अलग-अलग पुस्तकन में मिलेला जइसे अविमुक्तक्षेत्र, आनंदवन आ रुद्रावास इत्यादि। == इतिहास == ===प्राचीन इतिहास=== पुराणन में लिखल कथा की मोताबिक वाराणसी नगर के अस्थापना भगवान शिव जी कइलें रहलन। महाभारत की कथा में काशी क जिकिर आइल बा जहाँ पितामह भीष्म काशी नरेश की तीनों पुत्री (अम्बा, अम्बिका, अम्बालिका) लोगन के अपहरण कइले रहलन। महाभारत की युद्ध में काशी नरेश पाण्डव सेना में रही के कौरवन से लड़ाई कइलन। पुरातात्विक खोदाई में मिलल चीजन की अध्ययन से ई पता चलल बा कि वाराणसी में सबसे पुरान बस्ती 1000 ई. पू. की आसपास रहे ए तरह से वाराणसी विश्व की सबसे पुरान बसल नगरन में गिनल जा सकेला। ई पुरातात्विक खोज बतावेले कि ओ समय वाराणसी में वैदिक आर्य लोग निवास करें। हालाँकि ओही समय की आसपास के अथर्ववेद में इहाँ अनार्य लोगन के बस्ती के बात लिखल बा।<ref>Pletcher, 2010 pp=159–160 |http://books.google.co.in/books?id=Mjr0X-8jrLAC&pg=PA159&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false</ref> एकरी आलावा वाराणसी जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ के भी निवास अस्थान मानल जाला। [[भगवान बुद्ध]] (जन्म 567 ई.पू.) की समय में वाराणसी काशी राज्य के राजधानी की रूप में रेशम, मलमल, इत्र, हाथीदांत के सामन अउरी कलात्मक समान की केन्द्र की रूप में विख्यात रहे।<ref>Pletcher, 2010, pp=159–160 |http://books.google.co.in/books?id=Mjr0X-8jrLAC&pg=PA159&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false</ref>[[भगवान बुद्ध]] बनारस से थोड़ी दूर पर स्थित [[सारनाथ]] में आपन पहिला उपदेश दिहलीं आ इहें से धर्मचक्रप्रवर्तन कइलिन। ए बात के प्रमाण [[ह्वेन सांग]] नाँव के चीनी यात्री, जेवन 635 इस्वी में इहाँ आइल रहलें, दिहलें कि ओ समय में वाराणसी धर्म आ ब्यापार के एगो महत्वपूर्ण केन्द्र रहे। ए नगर के धार्मिक महत्व अपनी उत्कर्ष पर पहुँच गइल जब आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य इहवाँ शैव पीठ के अस्थापना कइलें। प्राचीन काल में तक्षशिला से पाटलिपुत्र जाये वाला मार्ग इहवाँ वाराणसी से हो के गुजरे। ===मध्य काल=== [[File:Kabir004.jpg|thumb|left|upright|[[कबीरदास]].]] सन 1194 ई. में तुर्क मुस्लिम आक्रमणकारी कुतुबुद्दीन ऐबक इहाँ की बहुत सारा मंदिरन के ढहवा दिहलस। एकरी बाद मुस्लिम शासन की समय में ए नगर के पतन आरम्भ हो गइल। हालाँकि नया मंदिरन के निर्माण आ ढहावल चलत रहे। विद्या की राजधानी की रूप में बनारस मध्य काल में भी ओतने प्रतिष्ठित रहल। फिरोज़ शाह 1376 ई. में अउरी सिकंदर लोदी 1496 ई. में बाकी बचल-खुचल प्राचीन मंदिरन के भी ढहवा दिहलन। एही समय सूफ़ी आंदोलन के सबसे बड़ संतन में गिने जाये वाला [[कबीरदास]] जी आ संत रविदास जी के जनम भी एही नगरी में भइल। ई संत लोग हिन्दू-मुस्लिम एकता खातिर आ धर्म की सत्ता की खिलाफ़ आवाज बुलन्द कइल। जात-पात, धार्मिक उन्माद आ आपसी बैर की खिलाफ़ जोरदार प्रचार ए संतन की द्वारा कइल गइल। गुरु नानकदेव 1507 ई. में शिवराति की अवसर पर बनारस के यात्रा कइलीं आ ए आंदोलन में आपन योगदान दिहलीं। [[File:Benares A Brahmin placing a garland on the holiest spot in the sacred city by James Prinsep 1832.jpg|thumb|पवित्र शहर में सबनी से पवित्र जगह पर एगो माला रखे वाला ब्राह्मण । 1832 मे जेम्स प्रिंसेप द्वारा एगो लिथोग्राफ।]] [[File:On The River Benares ca 1883.jpg|right|thumb|बनारस, सन् 1833 ई.]] सोलहवीं सदी में बनारस में सांस्कृतिक पुनरुद्धार के आरम्भ भइल जब [[अकबर]] इहाँ दू गो मंदिरन क निर्माण करववलन। पूना के राजा इहाँ अन्नपूर्णा मंदिर बनववलन आ एही समय अकबरी पुल के निर्माण भइल। सन् 1665 ई. में फ्रांसीसी यात्री टेवर्नियर इहाँ के यात्रा कइलें आ गंगा तीरे बनल बिंदुमाधव मंदिर की बनावट के बखान कइलें। शेर शाह एही दौरान शाही सड़क के निर्माण करववलें जेवना के बाद में ग्रांड ट्रंक रोड (जीटी रोड) कहल गइल। [[औरंगजेब]] की शासन की समय एक बेर फिन से मंदिरन के ढाहल गइल लेकिन ओकरी बाद से जेतना शासक भइलें ऊ हिन्दू धर्म के ओतना विरोधी ना रहलें। [[File:Chait Singh of Benares.jpg|thumb|180px|बनारास के राजा छेत सिंह]] ===आधुनिक काल === आजकाल की बनारस के रूप एही समय में बनल जब अठारहवीं सदी में राजपूत आ मराठा शासक कई महल आ मंदिरन के बनववलन। मुग़ल शासक मुहम्मद शाह इहाँ मानमंदिर घाट की बगल में एगो नक्षत्र-वेधशाला बनवावे के आदेश दिहलन। एही समय पर्यटन ए नगर में काफ़ी बढल। गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स की शासन काल में सन 1791 ई. में इहाँ जोनाथन डंकन संस्कृत कालेज के अस्थापना कइलें। 1867 ई. में बनारस नगर निगम के अस्थापना भइल। सन् 1897 ई. में मार्क ट्वेन बनारस की बारे में आपन भावना कुछ ए तरे व्यक्त कइलें - ''Benares is older than history, older than tradition, older even than legend, and looks twice as old as all of them put together.(बनारस इतिहासो ले पुरान ह, परम्परो से पुरान ह, कथा-कहनियो ले पुरान ह, आ अगर ए सबके एकट्ठा कइ दिहल जाय त ओहू सबसे दुगुन्ना पुरान मालूम होला)''। सन् 1910 ई. में अंग्रेज शासक बनारस के [[बनारस राज|नया राज]] की रूप में बनवलें आ रामनगर के इहाँ के राजधानी बनावल गइल लेकिन ए राज के कौनो शासन क्षेत्र ना दिहल गइल। आजु ले काशी नरेश के निवास रामनगर किला में बा। उहाँ के बनारस की संस्कृति में बहुत महत्व के अस्थान प्राप्त बा आ उहाँ के आजुओ बनारस के सांस्कृतिक मुखिया माना जालीं। [[बनारस राज]] के भारत में विलय 15 अक्टूबर 1948 ई. में भइल। == भूगोल अउरी जलवायु == भूगोल की दृष्टि से बनारस [[मध्य गंगा मैदान]] के हिस्सा हवे। गंगा नदी इहँवा उत्तर दिशा की ओर बहेली जे से इहाँ गंगा जी के उत्तरमुखी गंगा कहल जाला। एही उत्तरमुखी गंगा की कमानी नियर मोड़ की सहारे पच्छिमी किनारा पर बनारस शहर बसल बा। शहर के ऊंचाई नदी से करीब 15 मीटर (50 फीट) से 21 मीटर (70 फीट) बाटे। शहर की उत्तरी सीमा की ओर वरुणा नदी गंगा में मिल जाली। कई गो प्राचीन झील अब लगभग समाप्त होखे की कगार पर बाड़ी जेवन पाहिले काफ़ी विस्तार वाली रहलीं। प्राचीन मत्स्योदरी हृद नाँव के झील जे के आजकाल मछोदरी कहल जाला अइसने एगो उदहारण बा। नगरीय इलाका लगभग 112.26 वर्ग किलोमीटर में फैलल बा। एकर बिस्तार 82° 56’पू. – 83° 03’पू. आ 25° 14’उ. – 25° 23’ 30’’ उ. कि बिचा में बा। बनारस क जलवायु आर्द्र उपोष्ण प्रकार क हवे (कोपेन की वर्गीकरण में: Cwg)। सबसे गरम महीना मई-जून (औसत तापमान 37 डिग्री सेल्सियस) आ सबसे ठंढा महीना जनवरी होला (औसत तापमान 19 डिग्री सेल्सियस) । बारिश मानसून की द्वारा जून की तीसरा हप्ता से शुरू हो के अक्टूबर की पहिला हप्ता ले होले जेवना के बरखा ऋतु कहल जाला। सबसे बेसी बरखा जुलाई-अगस्त (लगभग सावन-भादो) में होखेले। औसत सालाना बरखा लगभग 100 सेंटीमीटर (40.37 इंच) होला। बरखा की ऋतु से ठीक पाहिले अप्रैल मई में ख़ूब [[लूहि]] बहेले आ आन्ही अंधड़ आवेला। जाड़ा की ऋतु में तापमान बहुत कम भी हो जाला। [[शीतलहरी]] की समय कौनो-कौनो दिन क न्यूनतम (एक दिन-रात में सबसे कम) तापमान 3-4 डिग्री सेल्सियस ले नीचे चलि जाला। जाड़ा में बरखा [[भूमध्य सागर]] की ओर से आवे वाला पच्छिमी विक्षोभ से होला जेवन एक तरह के चक्रवाती बरखा होला आ रबी की फसल खातिर फायदेमंद होला। जाड़ा में कुहासो पड़ेला। == जनसांख्यिकी == साल 2011 की जनगणना की अनुसार वाराणसी नगरीय इलाका के कुल जनसंख्या 14,35,113 रहे जे में 7,61,060 मर्द आ 6,74,053 औरत रहलीं। 2001 में वाराणसी नगरीय इलाका के कुल जनसंख्या 13,71,749 रहे आ मर्दाना-जनाना अनुपात ([[लिंगानुपात]]) 1000 मर्द पर 879 औरत के रहे। [[साक्षरता दर]] पूरा नगरीय इलाका में 77% आ नगर निगम की सीमा में 78% रहे वाराणसी नगरीय इलाका के कुल जनसंख्या 14,35,113 रहे जे में 7,61,060 मर्द आ 6,74,053 औरत रहलीं। नगर निगम की सीमा की भीतर तकरीबन 1,38,000 लोग मलिन बस्ती में निवास करत बा। धर्म की आधार पर देखल जाय त जनसंख्या क 80% हिन्दू, 18% मुसलमान, आ 1.2% जैन लोग बा। ==संस्कृति== ===भाषा=== बनारस में [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]] भाषा के पछाहीं रूप बोलल जाला जेवना के काशिका नाँव दिहल गइल बा। बाकी मुख्य भाषा [[हिंदी]] हवे। विदेशी पर्यटक लोगन की आवागमन की कारण [[अंगरेजी भाषा|अंगरेजी]] क प्रचलन पर्यटन उद्द्योग से जुडल लोगन में मिलेला। ===संगीत=== बनारस क संगीत से जुड़ाव पौराणिक आख्यानन में वर्णित बा। पुराणन की अनुसार भगवान शिव ए नगरी के अस्थापना कइलीं आ उंहेंके संगीत के उत्पन्न करे वाला भी मानल जालीं, एहीसे साफ़ बुझात बा कि ए नगरी के संगीत से बहुते पुरान जुड़ाव बा। सोलहवीं सदी में राजा गोविन्द चन्द्र की राज्य की समय इहवाँ ध्रुपद गायन के राज्य से आसरय मिलल जेकरी बाद अउरी दूसर कुल शैली के भी उत्त्थान भइल। मध्यकाल में इहाँ की संगीत के कबीरदास जी आ अउरी कई गो सूफी संत लोगन की उपस्थिति से भी बहुत बढ़ावा मिलल। शास्त्रीय संगीत में बनारस घराना क एगो आपन अलगे पहिचान हवे। आजकाल बनारस के निर्गुन, ठुमरी आ [[कजरी|बनारसी कजरी]] खातिर विशेष रूप से जानल जाला। इहाँ के विश्वप्रसिद्द संगीतकार लोगन में सितार वादक पं. रविशंकर, शहनाई वादक उस्ताद [[बिस्मिल्लाह खाँ]] साहब, ठुमरी गायिका श्रीमती गिरिजा देवी, तबला वादक पं. किशन जी महाराज, निर्गुन गायक पं. कुमार गन्धर्व जइसन गुनी लोगन के नाँव आवेला। ===शिक्षा=== इतिहास में शिक्षा की मामिला में बनारस के बहुत प्राचीन समय से बहुत ऊँच मोकाम रहल बा। इहाँ ले कि बनारस के एही से ''विश्वविद्द्या क राजधानी'' की रूप में परसिद्धी हवे। वेद के अध्ययन, धर्मशास्त्र, व्याकरण, कर्मकांड, आयुर्वेद, ज्योतिष जइसन सभ तरीका की ज्ञान में बनारस की बिद्वानन क लोहा पूरा विश्व मानेला। व्याकरण की क्षेत्र में इहवाँ के ऋषि पतंजलि के टीका काशिका एगो आधारस्तंभ मानल जाला। प्राचीन बैद्य सुश्रुत जे सर्जरी के पहिला अविष्कार करे वाला रहलीं, उहाँ के ग्रन्थ सुश्रुत संहिता आयुर्वेद के नामी ग्रन्थ हवे। आजकाल की समय में भी बनारस में चार गो विश्विद्यालय बा जेवना में सभसे ढेर महत्व [[बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय]] (बीएचयू) के बा। बीएचयू के बिज्ञान आ प्रौद्योगिकी से ले के साहित्य आ समाज बिज्ञान की क्षेत्र में योगदान बा। बीएचयू के आईआईटी भारत की सोलह सभसे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी संस्थानन में से एगो हवे। एकरी आलावा [[सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्विद्यालय]], [[महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ]] आ केन्द्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान (डीम्ड इन्वर्सिटी) इहवाँ के अउरी तीन गो विश्वविद्यालय बा। उदय प्रताप कालेज, हरिश्चंद्र कालेज, अग्रसेन कन्या कालेज, बसंत कन्या महाविद्यालय जइसन कई गो डिग्री कालेज इहवाँ बाड़ें। ==परिवहन== बनारस भारत की बाकी हिस्सन से सड़क, रेल अउरी हवाई मार्ग से बढियाँ से जुडल बा। बहुत प्राचीन काल से आजु ले ए नगरी के लगातार महत्वपूर्ण रहला में एकर परिवहन की साधन से सम्पन्न भइल आ पूरा देश से जुड़ाव के बिसेस योगदान बा। बनारस में लाल बहादुर शास्त्री अंताराष्ट्रिय हवाई अड्डा मुख्य शहर से करीबन 25 कि.मी. दूर बाबतपुर में बा। इहाँ से शारजाह, [[काठमांडू]], [[दिल्ली]], [[गया]], [[खजुराहो]], [[लखनऊ]], [[बंगलौर]], [[हैदराबाद]], [[मुंबई]], [[कोलकाता|कलकत्ता]], गउहाटी इत्यादि जगह खातिर हवाई जहाज जाला आवेला। जबसे इहवाँ नया टर्मिनल के उद्घाटन भइल बा (अक्टूबर 2010 ई. से) ए के अंताराष्ट्रिय हवाई अड्डा के दर्जा मिल गइल बा। बनरस जंक्शन, जेवना के वाराणसी कैंट रेलवे टीशन कहल जाला, बनारस के सबसे व्यस्त रेलवे इस्टेशन बा। ए कर लोड कम करे खातिर मुग़लसराय में टीशन बा आ उहो भारत की सबसे व्यस्त रहेवाला इस्टेशनन में गिनाला। कैंट टीशन से रोज़ करीबन साढ़ेतीन लाख से ज्यादा लोग आ 240 की लगभग रेलगाड़ी गुजरेला। बनारस से हो के राष्ट्रिय हाइवे 2 गुजरेला जेवन ए शहर के पूरुब ओर [[कोलकाता|कलकत्ता]] से आ पच्छिम ओर वाया [[इलाहाबाद]] [[दिल्ली]] से जोड़ेला। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना में एके बढ़िया बिकास भइल बा आ ए हाइवे के चार लेन के बना दिहल गइल बा। राष्ट्रिय हाइवे 29 बनारस के वाया [[ग़ाज़ीपुर|गाजीपुर]], [[मऊ]], [[गोरखपुर]] से जोड़त बा; राष्ट्रिय हाइवे 7 जेवन भारत के सबसे लंबा हाइवे ह ऊ इहाँ से [[नागपुर]], [[हैदराबाद]] होत कन्याकुमारी तक जाला; आ राष्ट्रिय हाइवे 56 जौनपुर, सुल्तानपुर होत [[लखनऊ]] ले जाला। गंगा में नाव पर जल परिवहन बनारस की खातिर एगो महत्व के चीज बहुत प्राचीन काल से हवे। आजकाल गंगा नदी में हल्दिया (कलकत्ता) से इलाहाबाद ले घोषित राष्ट्रिय जल मार्ग – 1 बनारस से हो के गुजरेला। बनारस शहर की अन्दर परिवहन खातिर सिटी बस, छोटका टेम्पू, आ रेक्सा साधन बा। [[घाट]] की किनारे किनारे नाव से भी आइल-जाइल जा सकेला। बनारस के ज्यादातर बस्ती अंग्रेजन के पहिले के बसल बा जेवन आजकाल की परिवहन की साधन आ मोटर-गाड़ी की की हिसाब से ना बसल रहे। बाद के बस्ती भी सरकारी लापरवाही आ बिना योजना के बस गइल। नतीजा ई बा कि आज बनारस के सड़क कुल जाम खातिर मशहूर हो गइल बाड़ी। ==प्रशासन== बनारस में वाराणसी जिला क मुख्यालय बा आ वाराणसी कमिश्नरी क कार्यालय बा। शहर के व्यवस्था स्थानीय स्वशासन की तहत नगर निगम देखेला। पानी क सप्लाई जल निगम करेला जेवन नगर निगम क अंग हवे। नया निर्माण आ नगर की नियोजन खातिर ''वाराणसी विकास प्राधिकरण'' बा। काशी विश्वनाथ मंदिर खातिर राजा बनारस की अध्यक्षता में एगो ट्रस्ट सन् 1983 ई. में बनल जेवन मंदिर के व्यवस्था देखेला। ==गैलरी== <gallery> File:Busy Varanasi Morning.jpg|बनारस के भोर File:India - Varanasi Ganges temple - 2293.jpg | गंगा मंदिर File:India - Varanasi buey in market - 1702.jpg|बाजार File:Incense aarti at Dashaswamedh ghat, Varanasi.jpg|दशाश्वमेध घाट पर आरती File:Varanasi Munshi Ghat3.jpg |मुंशी घाट File:Manikarnika Cremation Ghat, Varanasi.jpg |मणिकर्णिका File:Chet Singh Ghat in Varanasi.jpg |चेतसिंह घाट File:Ganges River bank, Varanasi.jpg |गंगा जी के किनारा आ घाट File:Alamgir Mosque by the Ganges ghats, Varanasi.jpg |आलमगीर मस्जिद File:Varanasi Aurangzeb Mosque.jpg |औरंगजेब मस्जिद File:'Sari' from Varanasi (north-central India), silk and gold-wrapped silk yarn with supplementary weft brocade.jpg|[[बनारसी साड़ी]] </gallery> == इहो देखल जाय == * [[बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय]] * [[काशी विश्वनाथ मंदिर]] * [[बनारसी साड़ी]] * [[सारनाथ]] * [[इलाहाबाद]] ==संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ी == {{बनारस}} [[श्रेणी:बनारस| ]] [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के शहर]] [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के पर्यटक आकर्षण]] [[श्रेणी:हिंदू तीरथ]] [[श्रेणी:गंगा नदी के तीरे आबाद जगह]]
सारांश:
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