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'''हिंद स्वराज''' 1909 मे [[महात्मा गाँधी]] के गहल एगो किताब बाटे, एह मे ऊ स्वराज आ आधुनिक सभ्यता प आपन बिचार देले बाड़न।<ref>{{Cite web |url=http://www.mkgandhi.org/swarajya/coverpage.htm |title=''Hind Swaraj or Indian Home Rule'' (Complete Book Online)<!-- Bot generated title --> |access-date=2008-05-15 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080522001539/http://www.mkgandhi.org/swarajya/coverpage.htm |archive-date=2008-05-22 |url-status=dead }}</ref> 1910 मे हेकरा सरकार बिरोधी बता के हेकरा प परतीबन्ह लगा दिहल गइल रहे। ==पिठभुईं== गांधी जी एह किताब के [[गुजराती भाषा]] मे लिखले रहन, जब ऊ [[लंदन]] से [[दक्खिन अफिरका]] जात रहन। जब एहपे परतीबन्ह लाग गइल त गांधी जी एकर अनुवाद [[अंगरेजी]] मे कइलन। अंगरेजी प परतीबन्ह ना लागल आ आगे चलिके हेकर अनुवाद [[फ्रांसीसी भाषा]] मे भईल। ==महतपूर्न बात== एह किताब के पाठक आ लेखक के बीच के बात के रूप मे लिखल गइल बा। एहमे पाठक एगो भारतीय नागरिक हऽ आ लेखक गांधी जी हवन। एहमे मुख रूप से चारि गो बातन प जोर दिहल बाटे। * गांधी जी कहले बाड़न जे स्वराज आपन राज हऽ। ऊ कहले बाड़न जे खाली अंगरेज सभ के भारत छोड़ देला से स्वराज ना आई, बलुक अगरेजी सभ्यता तेआगे के पड़ी। आ जदि अंगरेजन के बिना एहिजा अंगरेजी राज करी तऽ ई हिंदुस्तान ना इंग्लिशतान कहाई। * गांधी जी कहले बाड़न जे आजादी हिंसा से ना अहिंसा से आवे के चाहीं। * गांधी जी स्वदेशी अपनावे के बात कइले बाड़न। * गांधी कहले बाड़न जे भारत जबले पक्खिमी सभ्यता के ना छोड़ि तबले गुलाम रही। == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:महात्मा गाँधी]] {{Book-stub}}
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