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संस्कृत व्याकरण में '''इत्''' एगो संज्ञा हवे। संज्ञा के मतलब नाँव। उदाहरण खातिर [[माहेश्वर सूत्र]] सभ में अंतिम अक्षर सभ के नाँव '''इत्''' हवे।{{efn|'''एषामन्त्या इतः''' - लघुसिद्धान्तकौमुदी।{{sfn|स्वामी धरानन्द शास्त्री||p=4}}}}{{sfn|भीमसेन शास्त्री||p=5}} इनहना के जरूरत [[प्रत्याहार]] बनावे में पड़े ला। सूत्र में दिहल कौनों अक्षर के साथे इत् जोड़ के बोलल जाय तब ओह अक्षर आ ओह इत् के बीच के सगरी अक्षर सभ के बोध होला। पाणिनि के व्याकरण में नियम सभ के सूत्र के रूप में लिखे खातिर एह छोट नाँव सभ के महत्व हवे। एह तरीका से सगरी अक्षर बेर-बेर गिनावे के बजाय प्रत्याहार रुपी छोट नाँव से ओह अक्षर सभ के बूझल जा सके ला। पाणिनि के ''अष्टाध्यायी'' में सुरुआत में दिहल माहेश्वर सूत्र नीचे दिहल जात बाने, एह में इत् सभ के मोट अच्छर में देखावल गइल बा: <poem> 1. अ इ उ '''ण्''' 2. ऋ ऌ '''क्''' 3. ए ओ '''ङ्''' 4. ऐ औ '''च्''' 5. ह य व र '''ट्''' 6. लँ '''ण्''' 7. ञ म ङ ण न '''म्''' 8. झ भ '''ञ्''' 9. घ ढ ध '''ष्''' 10. ज ब ग ड द '''श्''' 11. ख फ छ ठ थ च ट त '''व्''' 12. क प '''य्''' 13. श ष स '''र्''' 14. ह '''ल्''' </poem> एह तरीका से 14 गो इत् सभ - '''ण् क् ङ् च् ट् ण् म् ञ् ष् श् व् य् र् ल्''' हवें। एह 14 गो के अलावा छठवाँ सूत्र में लँ में आवे वाला अ के भी इत् मानल गइल हवे। एकर बिधान अष्टाध्यायी के '''उपदेशेऽजनुनासिक इत्''' (1। 3। 2) सूत्र से होला जबकि बाकी 14 गो के बिधान '''हलन्त्यम्''' (1। 3। 3) सूत्र से होला।{{sfn|भीमसेन शास्त्री||p=5}} ==इत् संबंधी सूत्र== अष्टाध्यायी में इत् संबंधी सूत्र पहिला पाद के तिसरा भाग के सुरुआत में दिहल गइल बाड़ें:{{sfn|भीमसेन शास्त्री||p=5}} * '''उपदेशेऽजनुनासिक इत्''' (1। 3। 2) * '''हलन्त्यम्''' (1। 3। 3) * '''न विभक्तौ तुस्माः''' (1। 3। 4) * '''आदिर्ञिटुडवः''' (1। 3। 5) * '''षः प्रत्ययस्य''' (1। 3। 6) * '''चुटू''' (1। 3। 7) * '''लशक्वतद्धिते''' (1। 3। 8) * '''तस्य लोपः''' (1। 3। 9) ==इहो देखल जाय== * [[प्रत्याहार]] * [[माहेश्वर सूत्र]] == फुटनोट आ संदर्भ == ===नोट=== <references group="नोट"/> ===संदर्भ=== {{Reflist|33em}} ==स्रोत ग्रंथ== {{refbegin}} <!-- {{sfn|स्वामी धरानन्द शास्त्री||p=}}-->* {{cite book|author=स्वामी धरानन्द शास्त्री|title=लघुसिद्धान्तकौमुदी-वरदराज विरचित|url=https://books.google.com/books?id=HdmfQ5D_yy8C&pg=PT17|publisher=मोतीलाल बनारसीदास प्रकाशन|isbn=978-81-208-2214-6|pages=17–|language=hi|accessdate=11 अगस्त 2019}} <!-- {{sfn|भीमसेन शास्त्री||p=}}-->* {{cite book|author=भीमसेन शास्त्री|title=लघुसिद्धान्तकौमुदी - भैमी व्याख्या|date=2000|publisher=भैमी प्रकाशन|location=दिल्ली|edition=4था|language=hi}} {{refend}} [[श्रेणी:संस्कृत व्याकरण]]
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