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[[File:13th-century Niruktam Vedanga 13 Chapters, Yaska, cover plus page 4v and 4r, Sanskrit, Devanagari script, Kashmir.jpg|thumb|upright=1.25|The opening pages of Yaska's Nirukta Vedanga text (Sanskrit, Devanagari script)]] '''निरुक्त''' भा '''निरुक्तशास्त्र''' भारतीय बिद्या हवे जेह में भाषा के बिकास पर बिचार कइल जाला।<ref name="वाजपेयी01">{{cite book|last1=वाजपेयी|first1=किशोरीदास|title=हिंदी निरुक्त|date=2007|publisher=वाणी प्रकाशन|location=[[दिल्ली]]|isbn=81-8143-653-9|page=9|edition=4था|url=https://books.google.co.in/books?id=QoMJAQAAIAAJ&q=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80+%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4&dq=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80+%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwiYrvHK_IvkAhVUfisKHf0-AnsQ6AEIKTAA|language=hi|format=हार्डकॉपी|chapter=1}}</ref> ई वेद के समझे-बूझे खातिर रचित छह गो वेदांग सभ में से एक हवे आ [[व्याकरण (वेदांग)|व्याकरण]] के साथे एकर नगीचे के संबंध बा। देश, काल आ अइसहीं अन्य कारण से शब्द में जवन बदलाव होला, अरथ में जवन बिकास होला, ओही के बिचार के निरुक्त कहल जाला।<ref name="वाजपेयी01" /> आधुनिक शास्त्र सभ में ई [[शब्दइतिहास]] (Etymology) नियर बिद्या हवे। प्राचीन भारत में एकर बिकास हजारन साल पहिले भइल आ ई भारतीय शास्त्र सभ के प्रमुख अंग हवे। महर्षि [[यास्क]] के ग्रंथ निरुक्तशास्त्र एह बिद्या के आधार हवे, जबकि ऊ खुदे अपने ग्रंथ में अपना से पहिले भइल निरुक्तकार लोग के हवाला मजिगरे दिहले बाने। {{clear}} ==संदर्भ== {{Reflist|33em}} [[श्रेणी:भारतीय भाषाबिज्ञान]] [[श्रेणी:संस्कृत]]
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