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==नाँव== ''कृष्ण'' शब्द संस्कृत के हवे आ एकर मतलब "करिया", "काला", या "गहिरा नीला" होला।<ref name="dictionaries"> * [http://www.sanskrit-lexicon.uni-koeln.de/cgi-bin/monier/serveimg.pl?file=/scans/MWScan/MWScanjpg/mw0306-kRzanAvat.jpg Monier Williams Sanskrit-English Dictionary (2008 revision)] * [http://dsalsrv02.uchicago.edu/cgi-bin/philologic/getobject.pl?c.2:1:1423.apte Apte Sanskrit-English Dictionary] </ref> कथा के अनुसार बतावल जाला कि जमुना के कालिय दह में कालिया नाग के बध करत समय ओकरे बिस से इनके रंग करिया भा नीला हो गइल रहे।<ref>https://www.jagran.com/spiritual/religion-so-kanha-is-therefore-the-body-color-blue-13313407.html</ref> कुछ अन्य कथा सभ में दूसर बिबरन भी मिले ला आ कबो-कबो एह शब्द के अरथ "सभके अपना ओर खींचे वाला"<ref>{{Harvnb|Bryant|2007|p=382}}</ref> (कृष धातु के अर्थ खींचल, जवना से आकर्षण बने ला) भी बतावल जाला। कृष्ण के [[बिष्णु]] के अवतार मानल जाला आ बिष्णु के एक हजार नाँव (बिष्णुसहस्रनाम) में कृष्ण शब्द बिष्णु के 57वाँ नाँव के रूप में गिनावल गइल हवे। अन्य नाँव सभ में "मोहन" यानी सभके मोह लेवे वाला<ref>Monier Monier Williams, [http://www.ibiblio.org/sripedia/ebooks/mw/0300/mw__0399.html Go-vinda], Sanskrit English Dictionary and Ettymology, Oxford University Press, p. 336, 3rd column</ref>, "मुरलीधर" मने कि मुरली ([[बँसुरी]]) धारण करे वाला, "गोविंद" भा "गोपाल" मने कि मुख्य गौ पालक<ref>{{Harvnb|Bryant|2007|p=17}}</ref><ref name="Hilt">{{cite book|author = Hiltebeitel, Alf|title = Rethinking the Mahābhārata: a reader's guide to the education of the dharma king|publisher = University of Chicago Press|location = Chicago|year = 2001|pages = 251–53, 256, 259|isbn = 0-226-34054-6}}</ref> इत्यादि नाँव प्रमुख हवें। उड़ीसा में आ कुछ अन्य पूरबी भारत के जगह सभ में इनके "जगन्नाथ" के रूप में पूजल जाला<ref>{{cite book|author = B. M. Misra|title = Orissa: Shri Krishna Jagannatha: the Mushali parva from Sarala's Mahabharata|publisher = Oxford University Press, USA|isbn = 0-19-514891-6}}</ref>{{sfn|Bryant|2007|p=139}}<ref>For the historic Jagannath temple in Ranchi, Jharkhand see: {{cite book|author=Francis Bradley Bradley-Birt|title=Chota Nagpur, a Little-known Province of the Empire|url=https://books.google.com/books?id=W0x74TZB3eoC&pg=PA61|year=1989|publisher=Asian Educational Services (Orig: 1903) |isbn= 978-81-206-1287-7|pages=61–64}}</ref> आ बिस्व के स्वामी के अरथ में एह नाँव के इस्तेमाल होला। कई अन्य नाँव अइसन दइत आ राक्षस सभ के नाँव पर भी पड़ल हवें जिनहन के इनके द्वारा बध भइल बतावल जाला, जइसे: मुरारि, मधुसूदन इत्यादि। वसुदेव आ जशोदा आ देवकी के बेटा के रूप में इनके वासुदेव, जशोदानंदन आ देवकीनंदन भी कहल जाला। [[सुदर्शन चक्र]] धारण करे वाला रूप में इनके चक्रधारी भी कहल जाला।
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