Jump to content
Main menu
Main menu
move to sidebar
लुकवाईं
नेविगेशन
मुख्य पन्ना
हाल के बदलाव
अट्रेंडम पन्ना
मीडियाविकि के बारे में मदद
भोजपुरीपिडिया
खोज
खोजीं
Appearance
खाता बनाईं
खाता में प्रवेश
निजी औजार
खाता बनाईं
खाता में प्रवेश
Pages for logged out editors
learn more
योगदान
बातचीत
जिउतिया
(खंड) के संपादन कइल जात बा
पन्ना
बातचीत
भोजपुरी
पढ़ीं
संपादन करीं
स्रोत संपादित करीं
इतिहास देखीं
औजार
औजार
move to sidebar
लुकवाईं
Actions
पढ़ीं
संपादन करीं
स्रोत संपादित करीं
इतिहास देखीं
जनरल
इहाँ का जुड़ल बा
संबंधित बदलाव
खास पन्ना
पन्ना से जुड़ल जानकारी
Appearance
move to sidebar
लुकवाईं
चेतावनी:
रउआँ आपन खाता में प्रवेश नइखीं कइले। अगर रउआँ कौनों बदलाव करब त राउर आईपी पता सभके लउकी। अगर रउआ
खाता में प्रवेश करब
या
नया खाता बनाइब
तब, अउरी सुबिधा सब की संघे राउर संपादन के श्रेय भी राउर प्रयोगकर्तानाँव के मिली!
स्पैम-बिरोधी रोक (Anti-spam check) एके
मत
भरीं!
== पौराणिक प्रसंग == महाभारत में द्रोणाचार्य के बेटा अश्वस्थामा जब पाण्डवं के लईकन के मारी देले त पांडव बहुत दुखी भइल रहन। तब शोक से ब्याकुल [[द्रोपती]] [[ऋषि धौम्य]] के लगे जा के लईकन के लम्बा उमिर के उपाय पुछला प ऋषि धौम्य [[सतयुग]] के राजा जीमूतवाहन के कथा सुनवाले आ एह ब्रत के उपाय बतवले रहन। तब से ई ब्रत भोजपुरी आ अवधी संस्कृति में जुट गयील। ===राजा जीमूतवाहन के कथा=== [[सतयुग]] में [[जम्बूद्वीप]] नाव के जगह प एगो बहुत प्रतापी राजा रहन उनकर नाम रहे जीमूतवाहन।<ref>{{cite web|title=जितिया व्रत की संपूर्ण कथा पढ़ें यहां, संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है यह व्रत|url=https://www.jansatta.com/religion/jitiya-vrat-2019-jimutavahana-vrat-katha-jitiya-vrat-katha-in-hindi-jitiya-katha-hindi-mai-read-here/1160604/|website=जनसत्ता.कॉम|accessdate=18 अक्टूबर 2019}}</ref> एक हाली उ अपना मेहरारू सुभगा के संगे ससुरारी जा के रहे लगले। अचानक राति के उनका कवनो मेहरारू के रोये के आवाज सुनाई देलस। वोह आवाज के पीछा करत उ मेहरारू लगे जा के रोये के कारन पुछला प मेहरारू एगो दुष्ट गरुण के बारे में बतवलस जवन गांव के लईकन के खा जात रहे उहे गरूण आज एह मेहरारूके बेटा के उठा ले गईल रहे। राजा मेहरारू से ओकरा लईका के बचावे के बचन देके वोह जगह पहुँचले जहाँ गरूण रोज मॉस खाए आवत रहे। राजा के देख के गरूण उनका प झपटलस आ उनकर बयां बाहीं नोच लेलस तब राजा आपन दाहिना अंग ओकरा आगे क देले ई देख के गरूण उनका से पुछलस की तू त आदमी नईख बुझात, का तू कवनो देवता हव तब राजा कहले की हम सूर्यवंस में उत्पन्न शालिबाहन के पुत्र हईं। राजा के उदारता देख के गरूण राजा से बरदान मांगे के कहला प राजा आजतक के खाइल सब लईकन के जीवित होखे के आ आज बाद कवनो लईका के अकाल मृत्यु से बचावे के बरदान मंगले। तब गरुण [[नागलोक]] से अमृत ले- आके सब मरल लईकन के जिआ देले आ जिउतिया के ब्रत के बारे में बतवले आ ई ब्रत करे वाला के पुत्र के अकाल मृत्यु से बचावे के बरदान दिहले। ===ब्रत के बिधि=== कुआर अंधारिया के सत्तमी तिथि के सांझी खा [[सतपुतिआ]] के तरकारी [[बूंट]] डाल के बनावल आ खाइल जाला एह दिन नदी किनारे भा पोखरी प जा के खरी और तेल नेनुआ के पत्ता पर रख के चिल्हो-सियारो के दिहल जाला।<ref>{{cite news|title=जिउतिया पर व्रतियों ने सुनी चिल्हो-सियारो की कथा|url=https://www.bhaskar.com/news/JHA-669800-3898101.html|accessdate=18 अक्टूबर 2019|publisher=भास्कर}}</ref> आम के दतुवन से मुँह धोवल जाला सांझीखा ओठँघन पकावे आ खाए के चलन बा। । अष्टमी तिथि के भोर में सरगही खाए के चलन बा लेकिन सुरुज उगला के बाद से कुछ भी मुँह में ना डालल जाला। आदतन दांत आदि खोदे खाती खरिका आदि भी मुँह में डाले के पावंदी मानल जाला। पूरा निराजल ब्रत रहिके के सांझी खा जिउतिया के [[नेनुआ]] के पत्ता प धके पूजा करेके आ जीमूतवाहन के कथा सुने के चलन बा। कथा के बाद लईकन के जिउतिया ठेका के मेहरारू लोग पहिन लेला आ सालभर पहिरले रहेला लोग। मेहरारू के ज गो लईका लईकी रही त गो जिउतिया सोना के भा चानी के बानवे के चलन बा।जिउतिया ब्रत के पारण नवमी तिथि में कइल जाला।
सारांश:
ई नोट कर लीं कि भोजपुरीपिडिया पर सगरी योगदान के दुसरा योगदानकर्ता लोगन द्वारा संपादित कइल जा सकेला, बदलल या हटावल जा सकेला। अगर आप ई नइखीं चाहत की राउर लिखल चीज के केहू भी बे-मोहछोह के संपादित क दे, तब ए के इहाँ मत डालीं।
रउआँ इहो वादा करत बानी की आप ई खुद लिखले बानी या फिर पब्लिक पहुँच में मौजूद या अइसने कौनों फ्री स्रोत से नकल कइले बानी (ढेर जानकारी खातिर
भोजपुरीपिडिया:कापीराइट सब
देखीं)।
बिना परमीशन के कॉपीराइट वाली चीज इहाँ कब्बो मत डालीं!
कैंसिल
संपादन में मदद
(नया विंडो में खोलीं)