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==संज्ञा== संज्ञा शब्द के अरथ होला नाँव। संस्कृत व्याकरण में बिबिध प्रकार के चीजन के नाँव दिहल गइल बा जिनहन के संज्ञा कहल जाला। ई नाँव ए खातिर दिहल गइल हवें कि पूरा बिबरन देवे के बजाय चीजन के छोट नाँव भर से उल्लेख कइल जा सके। एकरे अलावा ई बिसेस परिस्थिति में कौनों शब्द, पद भा शब्दखंड के का कहल जाय एहू खातिर दिहल नाँव हवें जवना से कि इनहन के ओही नाँव भा संज्ञा से आगे के प्रकरण में उल्लेख कइल जा सके। संस्कृत व्याकरण के "संज्ञा" के अंगरेजी नाउन (Noun) भा हिंदी व्याकरण वाला संज्ञा से अलग बूझे के चाहीं। हिंदी में ई अंगरेजी व्याकरण के नकल से आइल हवे जहाँ संज्ञा के नाउन के अरथ में इस्तेमाल होला आ एकर कई किसिम के भेद बतावल जालें जे अंगरेजी व्याकरण में बतावल प्रकार सभ के अनुवाद हवे। संस्कृत व्याकरण में संज्ञा के अर्थ बा नाँव। बिबिध प्रकार के व्याकरण के चीज सभ के नाँव दिहल गइल बा उनहने के संज्ञा कहल जाला। उदाहरण खातिर पाणिनि के व्याकरण ग्रंथ अष्टाध्यायी के पहिला सूत्र संज्ञा सूत्र हवे "'''वृद्धिरादैच्'''" (अष्टा. 1 ।1 ।1) जे ई बतावे ला कि [[प्रत्याहार|एच् प्रत्याहार]] के अक्षर सभ (आ अउरी ऐ, औ) के वृद्धि संज्ञा होला। मने की एह अक्षर समूह के नाँव "वृद्धि" हवे। जहाँ कहीं "वृद्धि" कहल जाय तब एकरा से एह अक्षर सभ के बोध होखे। एही तरे दुसरा सूत्र "गुण" संज्ञा बतावे ला - "'''अदेङ् गुणः'''" (अष्टा. 1 ।1 ।2) मने के अ अउरी ए, ओ के गुण नाँव से बोलावल जाय। ===कुछ प्रमुख संज्ञा=== * '''[[इत् संज्ञा]]''' * '''वृद्धि''' * '''गुण''' * '''टि''' संज्ञा * '''आम्रेडित''' * '''संहिता''' * '''संयोग''' * '''पद''' * '''ह्रस्व''', '''गुरु''', आ '''प्लुत''' * '''प्रगृह्य''' * '''निपात''' * '''लोप'''
सारांश:
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भोजपुरीपिडिया:कापीराइट सब
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