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==प्रशासन== [[File:MauryaStatuettes.jpg|thumb|मौर्य साम्राज्य के जमाना के मुरती]] मौर्य साम्राज्य के प्रशासन में सभके केंद्र में सम्राट रहल। इलाकाई बिस्तार के हिसाब से देखल जाय त पूरा साम्राज्य के चार गो प्रांत नियर इकाई में बाँटल गइल रहल। इनहन के राजधानी तोसली (पूरुब में), उज्जैन (पच्छिम में), सुवर्णगिरि (दक्खिन में) आ तक्षशिला (उत्तर-पच्छिम में) रहल। एह प्रांतीय इकाई सभ के प्रशासन के जिम्मेदारी राजा के प्रतिनिधि के रूप में "कुमार" लोग करे। बिसय बिभाजन के हिसाब से देखल जाय त मौर्य साम्राज्य एगो उच्चस्तर के केंद्रीय राजतंत्र रहल।{{sfn|किट्टू रेड्डी|2008|p=98}} प्रशासन के कामकाज के बिसय अनुसार अठारह हिस्सा में बाँटल गइल रहे।{{sfn|पांडे||p=7.18}} एह बिभाग सभ में कुछ प्रमुख के मुखिया रहलें समाहर्ता (टैक्स वसूली), सन्निधाता (खजाना), सेनापति, युवराज, मंत्री, प्रदेष्टा, दौवारिक इत्यादि। एकरे अलावा अधिकारी लोग के भी अलग अलग बिभाजन रहल आ हर बिभाग के मुखिया अधिकारी के "अध्यक्ष" कहल जाय। अइसन कुल बाईस गो अध्यक्ष लोग{{efn|प्रशासन के अधिकारी लोग जेकरा के अध्यक्ष कहल जाय 22{{sfn|रामविलास शर्मा|2008|p=21}} से 27{{sfn|शर्मा|2009|p=181}} ले संख्या बतावल गइल बा।}} या फिर सताइस होखे जेह में कुछ प्रमुख रहलें: सीताध्यक्ष (खेती), पण्याध्यक्ष (बानिज), संस्थाध्यक्ष (ब्यापार के मार्ग), वित्ताध्यक्ष (चरागाह) आ लक्षणाध्यक्ष (छपाई) इत्यादि।{{sfn|रामविलास शर्मा|2008|p=21}} पण्याध्यक्ष (पौतव) के काम नापजोख के बटखरा सभ के जाँच कइल भी रहे{{sfn|शिव स्वरुप सहाय|1998|p=}} जवना से प्रशासन के जटिलता आ सूक्ष्मता के अंजाद लगावल जा सके ला। सेना बहुत बिसाल रहल<ref>{{citation |last=Gabriel A |first=Richard |title=The Ancient World :Volume 1 of Soldiers' lives through history |url=https://books.google.com/books?id=HscIwvtkq2UC&pg=PA301 |date=30 November 2006 |publisher=Greenwood Publishing Group |p=28 }}</ref> आ मेगास्थनीज के हवाला से 6,00,000 पैदल (इन्फैंट्री), 30,000 घोड़ासवार, 8,000 रथ आ 9,000 हाथी रहलें जेकरे पाछे चले वाला आ भृत्य लोग भी रहे।{{sfn|मजुमदार|2003|p=107}} बड़ा पैमाना पर गुप्तचर ब्यवस्था भी मौर्य साम्राज्य के बिसेसता हवे।{{sfn|शर्मा|2009|p=181}} कुल मिला के मौर्य काल के प्रशासन बढ़निहार प्रक्रिया रहल{{sfn|नीलकंठ शास्त्री|2007|p=200}} आ समय के अनुसार जइसन परिस्थिति होखे एह में सुधार भी होखे। आमतौर पर चाणक्य के लिखल ग्रंथ ''[[अर्थशास्त्रम्]]'' में बर्णित प्रशासन के चंद्रगुप्त मौर्य के शासन काल के अंतिम समय में लागू प्रशासनिक ब्यवस्था के बिबरन के रूप में देखल जाला, एकरे निर्माण में खुद चाणक्य के भी कम जोगदान ना रहे। हालाँकि ई किताब में आदर्श ब्यवस्था बतावल गइल बा आ जरूरी नइखे कि ओह समय के चलन के एकदम सटीक बिबरन होखे। रोमिला थापर नियर इतिहासकार लोग के मानल बा कि मौर्य साम्राज्य के प्रशासन में एगो मूलभूत कमी रहल कि ऊ बेहवारिक रूप से सुसंगठित होखले के बावजूद जरूरत से ज्यादा नौकरशाही केंद्रित रहल।{{sfn|रोमिला थापर|2008|p=79}} गुप्त लोग से इनहन लोग के कर ब्यवस्था बढ़ियाँ रहल{{sfn|ओम प्रकाश प्रसाद|2006|p=}} जबकि तनखाह के मामिला में ऊँच वर्ग आ निचला अधिकारी लोग के बीच बहुत असमानता रहल, सभसे अधिक तनखाह 48 हजार पण आ सभसे कम 60 पण रहे।{{sfn|शर्मा|2009|p=181-182}}
सारांश:
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भोजपुरीपिडिया:कापीराइट सब
देखीं)।
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