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==मुद्दा== [[चित्र:Sparkles phuljhari fireworks on DIWALI, festival of lights.jpg|220px|thumb|दिपावली पर छुरछुरिया छोड़त एगो बिटिया]] पर्यावरण आ मानव स्वास्थ्य पर दीपावली के परभाव के ले के चिंता जाहिर कइल गइल बा। ===हवा प्रदूषण=== भारतीय राज्य [[उत्तर प्रदेश]] के [[लखनऊ]] में बर्मन के अगुआई में भइल एगो अध्ययन में ई परमान मिलल कि महीन (PM<sub>2.5</sub>) प्रदूषक कण सभ के हवा में मौजूदगी आतिशबाजी के बाद बढ़ जाले भले एकरे दौरान कम होखे। पड़ाका छोड़े से हवा में आइल ई महीन ''पार्टीकुलेट'' अगिला चउबिस घंटा ले हवा में मौजूद रहे लें।<ref name=barman625>{{cite journal |authors=Barman SC, Singh R, Negi MP, Bhargava SK |title=Fine particles (PM2.5) in ambient air of Lucknow city due to fireworks on Diwali festival |journal=Journal of Environmental Biology |volume=30 |issue=5 |pages=625–32 |date=सितंबर 2009 |pmid=20136038}}</ref> एगो अउरी अध्ययन में इहो सबूत मिलल कि जमीन-नजदीक वायुमंडल में ओजोन प्रदूषण के खतरा भी आतिशबाजी के बाद बढ़ जाला आ एहू के समय सीमा लगभग एक दिन के होले।<ref>{{cite journal |vauthors=Attri AK, Kumar U, Jain VK |title=Formation of ozone by fireworks |journal=Nature |volume=411 |issue=6841 |pages=1015 |date=जून 2001 |pmid=11429593 |doi=10.1038/35082634}}</ref> 9 अक्टूबर 2017 के भारत के सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में पड़ाका के बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिहलस, लेकिन ई रोक पड़ाका छोड़े पर ना बा।<ref name="veconomist" >{{cite news|author=|title=India’s courts take the fun out of a Hindu holiday|url=https://www.economist.com/news/asia/21730189-sales-firecrackers-have-been-banned-delhi-name-public-health-indias-courts-take|work=The Economist|date=12 अक्टूबर 2017}}</ref> कोर्ट ई फैसला ई मान के लिहलस कि तिहुआर में आतिशबाजी के सामान के इस्तेमाल पर रोक से दिल्ली के हवा के गुणवत्ता में काफी सुधार होखी। (2016 के दिवाली के बाद PM2.5 के लेवल सुरक्षित स्तर से 30 गुना ढेर हो गइल रहे) एकर आलोचक लोग के बिचार में ई जूडिशियल ओभररीच यानी कोर्ट के अपना दायरा से बाहर जा के काम कइल बा, लोग दिल्ली से बहरें से पड़ाका खरीद ली, हिंदू धरम के खिलाफ बा; जबकि एह फैसला के समर्थक लोग हवा के गुणवत्ता खाती फैसला के ठीक मानत बा।<ref name="veconomist" /> ===आगजनी=== दिवाली के समय आगजनी आ आगि से जरे के घटना में बढ़ती देखल जाले। एह आतिशबाजी के आइटम सभ में ''खुज्झा'' (अनार) अकेले 65% दुर्घटना सभ के कारण बने ला जेकरा से लोग के जरे के घटना होखे ले। अइसन घटना सभ के टिपिकल शिकार लड़िका ना बलुक उमिरदार लोग होला। अखबारन में आ मीडिया में आतिशबाजी से जरे पर जरे वाला अंग के तुरंत पानी में बोरे आ प्राथमिक उपचार करे के सलाह दिहल जाले। ज्यादातर अइसन घटना सब में जरे के घाव ग्रुप I (कम घातक) प्रकार के होला। <ref>{{cite journal |vauthors=Mohan D, Varghese M |title=Fireworks cast a shadow on India's festival of lights |journal=World Health Forum |volume=11 |issue=3 |pages=323–6 |year=1990 |pmid=2291800}}</ref><ref>{{cite journal |vauthors=Ahuja RB, Bhattacharya S |title=Burns in the developing world and burn disasters |journal=BMJ |volume=329 |issue=7463 |pages=447–9 |date=अगस्त 2004 |pmid=15321905 |pmc=514214 |doi=10.1136/bmj.329.7463.447}}</ref>
सारांश:
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देखीं)।
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कैंसिल
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