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==संस्कृति== ===भाषा आ साहित्य=== {{Main article|उत्तर प्रदेश के भाषा}} [[File:Kurukshetra.jpg|thumb|230px|alt=एगो हाथ से लिखल पोथी|कुरुक्षेत्र के जुद्ध, महाभारत]] बहुत सारा वैदिक मंत्र सभ के रचना प्राचीन काल में एह इलाका में भइल जे आज उत्तर प्रदेश के अंदर पड़े ला। महर्षि व्यास, जे परंपरागत रूप से वेद सभ के बिभाजन करे वाला मानल जालें आ पुराणन आ महाभारत के रचइता मानल जालें आ जिनके समर्पित तिहुआर गुरु पूर्णिमा आज भी एह क्षेत्र में मनावल जाला, उत्तर परदेस के कालपी के नजदीक जमुना नदी के एगो दीप पर जनमल बतावल जालें।<ref>[https://books.google.com/books?id=KnCxH85Vra4C&pg=PA205&lpg=PA205&dq=vyasa+born+yamuna&source=bl&ots=aX4O103DiT&sig=1pMtLNI3Ajf8Bz56WirIu2leukM&hl=en&sa=X&ei=E-jyU7eVBpaPuAS46YGIBw&ved=0CDcQ6AEwBA#v=onepage&q=vyasa%20born%20yamuna&f=false Essays on the Mahābhārata], Arvind Sharma, Motilal Banarsidass Publisher, p. 205</ref><ref name=ci>{{cite book|title=Awakening Indians to India|url=https://books.google.com/books?id=AIU4LzftaPAC&pg=PA167&dq=%22Guru+Purnima%22+-inpublisher:icon&cd=8#v=onepage&q=%22Guru%20Purnima%22%20-inpublisher%3Aicon&f=false|year=2008 |publisher=Chinmaya Mission|isbn=81-7597-434-6|page=167|accessdate=5 अगस्त 2012}}</ref> बाद के समय में, हिंदी साहित्य आ लोक साहित्य में एह प्रदेश के बहुत योगदान रहल बा आ [[तुलसीदास]], सूरदास आ [[कबीरदास]] नियर लोग एही राज्य से रहल बा। बनारस पुराना समय से शिक्षा आ साहित्य के केंद्र रहल चल आइल बा। आधुनिक समय (19वीं आ 20वीं-सदी) के [[हिंदी भाषा]] के साहित्य में भी बहुत सारा लोग के नाँव गिनावल जा सके ला जइसे कि भारतेंदु हरिश्चंद्र, जयशंकर प्रसाद, मैथिलीशरण गुप्त, [[मुंशी प्रेमचंद]], [[महादेवी वर्मा]], सुभद्राकुमारी चौहान, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, बाबू गुलाबराय, अज्ञेय, हरिवंश राय बच्चन, [[हजारी प्रसाद द्विवेदी]],<ref name=authors>{{cite web|title=The Indus Valley Civilization|url=http://www.hindunet.org/hindu_history/ancient/indus/indus_civ.html|publisher=The Hindu universe|accessdate=8 July 2012}}</ref> शिवप्रसाद सिंह आ काशीनाथ सिंह इत्यादि। राज्य के कबो-कबो ''हिंदी हार्टलैंड'' (मने कि, हिंदी हृदय प्रदेश) भी कहल जाला।<ref>{{cite web|url=http://www.newkerala.com/topstory-fullnews-67268.html |title=Three indian children to attend J8 summit in Rome.:. newkerala.com Online News |publisher=New kerala |accessdate=21 September 2009 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20110614094016/http://www.newkerala.com/topstory-fullnews-67268.html |archivedate=14 जून 2011 }}</ref> [[हिंदी भाषा]] राज्य के प्रशासन के ऑफिशियल भाषा 1951 के उत्तर प्रदेश ऑफिशियल भाषा अधिनियम से बनल आ 1989 में एह अधिनियम में सुधार कइल गइल आ [[उर्दू]] के अतिरिक्त भाषा के दर्जा दिहल गइल।<ref>{{cite web|url=http://uplegassembly.nic.in/UPLL.HTML |title=Uttar Pradesh Legislature |publisher=U.P assembly |accessdate=21 September 2009 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20090619093010/http://www.uplegassembly.nic.in/UPLL.HTML |archivedate=19 जून 2009 }}</ref> भाषा बिज्ञान के हिसाब से राज्य के बिस्तार [[हिंदी पट्टी]] के पच्छिमी, मध्य आ पूरबी हिंदी तीनो के कुछ इलाका कभर करे ला। मुख्य भाषा आ बोली सभ में अवधी, [[भोजपुरी]], ब्रजभाषा, बुन्देली, कनौजी, बघेली आ कड़ी बोली गिनावल जाली सऽ।<ref>{{cite web|url=http://www.ethnologue.com/show_language.asp?code=bfy |title=Ethnologue report for language code: bfy |publisher=Ethnologue|accessdate=21 September 2009}}</ref> ===संगीत आ नाच=== उत्तर प्रदेश से आवे वाला संगीत के क्षेत्र के हस्ती लोग में अनूप जलोटा, गिरिजा देवी, किशन महराज, विकास महराज,<ref>{{cite web|url=http://www.varanasi.nic.in |title=Official Website Of Varanasi District |publisher=Varanasi.nic.in |date= |accessdate=2015-07-29}}</ref> नौशाद अली, रविशंकर, शुबहा मुद्गल, सिद्धेश्वरी देवी, तलत महमूद आ उस्ताद [[बिस्मिल्ला ख़ाँ|बिस्मिल्ला खान]] के नाँव प्रमुख बा। परसिद्ध गजल गायिका बेगम अख्तर उत्तरे परदेश के रहली। लोक संगीत के भी इहाँ बहुत धनी परंपरा बा आ ब्रज क्षेत्र के रसिया आ होरी कृष्ण भक्ति के संगीत हवे। अन्य लोग संगीत के रूप में फगुआ, कजरी, चैती, सोहर, ठुमरी, बिरहा, आ सोरठी बाटे। लखनऊ में भातखंडे संगीत संस्थान आ इलाहाबाद में प्रयाग संगीत समीति इहाँ के प्रमुख संगीत शिक्षा के संस्थान बाड़ें।<ref name=Institute>{{cite web|title=Bhatkhande music institute|url=http://www.upeducation.net/universities/Bhatkhande_Music_Institute/|publisher=Uttar Pradesh Education Department|accessdate=25 July 2012}}</ref> शाश्त्रीय नाच के बिधा [[कथक]] के पैदाइश उत्तरे प्रदेश में भइल।<ref name="dance"/> तबला आ पखावज के साथ एह नाच के प्रस्तुति उत्तर भारतीय संगीत पर आधारित होले।<ref>{{cite web|title=North Indian: Kathak |url=http://www.worldartswest.org/plm/guide/printablepages/kathak.pdf|publisher=Dance style loacator|accessdate=23 जून 2012}}</ref> शास्त्रीय नाच के चार गो घराना प्रमुख बाने: लखनऊ घराना, अज्राड़ा घराना, फर्रूखाबाद घराना आ बनारस घराना।<ref name=gharana>{{cite web|title=Lucknow gharana, developed with Kathak. |url=http://www.hindustaniclassical.com/lucknow.asp |publisher=Hindustani classical music |accessdate=23 July 2012 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20100605174519/http://www.hindustaniclassical.com/lucknow.asp |archivedate=5 जून 2010 }}</ref><ref name="benaras gharna">{{cite web|title=Benaras Gharana, traditional style and way of teaching and performing Indian classical music. |url=http://www.benaresmusicacademy.com/page-1|publisher=Benares music academy|accessdate=23 जून 2012}}</ref> [[पूर्वांचल]] के लोक नाच में धोबिअऊ आ कहरऊ नाच के ख़ास अस्थान बा। ===मेला आ परब-तिहुआर=== [[File:India - Varanasi sun greet - 0270.jpg|thumb|230px|alt=संझा आरती|[[बनारस]] में घाट पर गंगा आरती करत हिंदू पुजारी]] [[दिपावली]], [[होली]] आ [[रामनवमी]] उत्तर प्रदेश के बहुत प्रमुख तिहुआर हवें। इलाहाबाद के [[कुंभ मेला]] सभसे बड़हन मेला हवे।<ref name=Mela>{{cite web|title=Kumbh Mela - India|url=https://www.youtube.com/watch?v=WqvzEjgYTFA|publisher=[[YouTube]]|accessdate=18 July 2012}}</ref> बरसाना आ मथुरा में होली के पहिले लट्ठमार होली एक ठो परसिद्ध तिहुआर हवे। [[बुद्ध पूर्णिमा]], जहिया [[गौतम बुद्ध]] के जनम, ज्ञान, आ निर्वाण तीनो भइल, बौद्ध लोग आ हिंदू लोग के पावन परब हवे। अन्य तिहुआर सभ में ईद-उल-फ़ित्र, बकरीद, बिजयदसिमी, खिचड़ी, बसंत पंचिमी, सतुआन, जन्माष्टमी, देव दीपावली, गंगा दसहरा, छठ पूजा, महावीर जयंती, मोहर्रम, आ हनुमान जयंती प्रमुख बाने।<ref name=traditions>{{cite web|title=The glorious traditions and mythological legacy |url=http://www.up-tourism.com/destination/varanasi/fair_festival.htm |publisher=Department of tourism U.P |accessdate=18 July 2012 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20120629052417/http://www.up-tourism.com/destination/varanasi/fair_festival.htm |archivedate=29 जून 2012 }}</ref> आगरा के [[ताज महोत्सव]], आधुनिक समय के चीज हवे आ संस्कृति के बिबिध रंगीन रूप देखे के मिले ला।<ref name="Braj Holi">{{cite news|title=The Braj Holi: Legend in real life |url=http://www.hindustantimes.com/News-Feed/lifestyle/The-Braj-Holi-Legend-in-real-life/Article1-675341.aspx |accessdate=13 जुलाई 2012 |work=[[हिन्दुस्तान टाइम्स]] |date=19 मार्च 2011 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20110322041343/http://www.hindustantimes.com/News-Feed/lifestyle/The-Braj-Holi-Legend-in-real-life/Article1-675341.aspx |archivedate=22 मार्च 2011 }}</ref> इलाहाबाद में, त्रिवेणी महोत्सव भी मनावल जाला। ===खानपान=== {{Main article|उत्तर प्रदेश के खाना}} [[File:Vegetarian Curry.jpeg|alt=photograph|thumb|230px|उत्तर प्रदेशी थाली, नान, दाल, रायता, आ शाही पनीर के संघे।]] [[File:Paan, (betel leaves) being served with silver foil, India.jpg|thumb|230px|चानी के वरक लागल पान।]] रोज-रोज खाइल जाए वाला खाना में, उत्तर भारत के बाकी इलाका नियर, उत्तर प्रदेश में भी थाली में [[रोटी]], दाल, सब्जी आ चावल (भात) प्रमुख भोजन हवे। एकरे संघे, चटनी, रायता, [[अँचार]] आ पापड़ नियर चीज चटकार करे खातिर भोजन के सहजोगी आइटम हवें सऽ। खास मोका महाले, रोटी के जगह पूड़ी खाइल जाला। अइसन मोका सभ पर कड़ाही में छान के बनावल पकवान सभ के प्रमुखता हो जाला, इनहन के पक्का खाना कहल जाला। पूड़ी, कचउड़ी, सब्जी, पोलाव, पापड़, रायता आ मीठा आइटम में खीर (तस्मई) भा सेवई खाइल जाला। पेय (पियल जाए वाला) चीज सभ में छाछ (भा माँठा) अभिन भी बहुत सारा लोग पसंद करे ला। भोजन के बाद पान खाए-खियावे के चलन भी हवे। बहुत सारा समुदाय-बिरादरी सभ के आपन ख़ास पकवान भी होला। जैन, कायस्थ आ मुसलमान लोग के अपना तरीका के भोजन होला। एही तरीका से एह बड़हन राज्य में क्षेत्र के अनुसार भी बिबिधता देखे के मिले ला। अवधी खाना, लखनऊ के परभाव में कबाब, बिरियानी, कीमा आ निहारी नियर पकवान सभ खातिर बहुत परसिद्ध हवे। मिठाई के आइटम में, खुरचन, बरफी, पेड़ा, गुलाबजामुन, पेठा, राबड़ी नियर चीज बहुत चलन में बाड़ी आ हिंदू लोग के भोजन में इनहन के बहुत प्रमुख अस्थान बाटे। लखनऊ के चाट आ बनारस के पान अपना सवाद आ सामग्री खाती पुरा दुनिया में मशहूर हवे।<ref name=paan>{{cite news|title=Banarasi paan or tobacco|url=http://timesofindia.indiatimes.com/topic/Banarasi-paan-or-tobacco|accessdate=14 July 2012|work=[[दि टाइम्स ऑफ इंडिया]]|date=28 अप्रैल 2012}}</ref> अवधी खानपान पर मुख्य रूप से लखनऊ क परभाव देखल जाला। नबाब लोग के शासन काल में, मुगलई पकवान के इहाँ चलन बहुत बढ़ल आ एही कारण इहाँ के भोजन भी काश्मीर, मध्य एशिया, पंजाब आ हैदराबादी पकवान सभ से परभावित भइल; आज शहर के अपना नबाबी खाना खातिर जानल जाला।<ref name="books.google.nl">{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=v-2TyjzZhZEC&pg=PA10&lpg=PA10&dq=central+asian+influence+on+mughal+cuisine|title=Royal Mughal Ladies and Their Contributions|accessdate=1 जून 2014|isbn=9788121207607|author1=Mukherjee|first1=Soma|year=2001}}</ref> लखनऊ के बावर्ची आ रकाबदार लोग इहाँ खास 'दम पुख्त' स्टाइल शुरू कइल (जेह में कई तरह के "दम" शामिल बाने, इनहन के मद्धिम आँच पर देरी ले पकावल जाला) आ अब ई लखनऊ के खास चीन्हा बन चुकल बा। एही स्टाइल के बिस्तार के रूप में, कबाब, कोरमा, बिरियानी, कलिया, कुलचा, जरदा, शीरमाल, रूमाली रोटी, आ वरकी पराठा भी लखनऊ के खास चीज मानल जाला। अवध के खाना खाली भर बिबिधते के मामिला में धनी नइखे, पकवान बनावे में इस्तेमाल होखे वाला सामान में भी बहुत चीज शामिल कइल जाला जेह में इलायची, केसर आ जाफरान नियर खुशबूदार मसाला इत्यादि गिनावल जा सके लें। पूरबी उत्तर प्रदेश के खाना, जहाँ भोजपुरी संस्कृति बा, कुछ अलगे किसिम के होला। आम उत्तर परदेशी थाली इहाँ ओइसने होले जइसन बाकी उत्तर भारत में, बाकी पूरुब बढ़े पर भात के महत्त्व आ मछरी के महत्व बढ़त जाला। खास परब तिहुआरन पर पूड़ी कचौड़ी के साथ कढ़ी-बरी इत्यादि के महत्व भी बढ़ जाला। भउरी-चोखा ([[लिट्टी]]-चोखा), सतुआ आ दही-चिउड़ा एह इलाका में काफी चलन में रहल बा। तराई के इलाका में मछरी के परभाव बढ़त देखल जाला। ===पहिनावा=== उत्तर प्रदेश के लोग के पहिनावा में परंपरागत पहिनावा आ पच्छिमी स्टाइल के पहिनावा, दुनों सामिल बा।<ref name=Costumes>{{cite web|title=Costumes of Uttar Pradesh|url=http://www.indfy.com/uttar-pradesh/dresses.html|publisher=Indify|accessdate=1 अक्टूबर 2012}}</ref> परंपरागत रूप से एह इलाका में धोती-कुरता भा पैजामा-कुरता मरदाना लोग के पोशाक हवे आ औरतन के पोशाक [[साड़ी]] आ सलवार-कमीज हवे।<ref name=Costumes/> नया जमाना के लोग अब पैंट-बुशट, जींस-टीशर्ट भी पहिरत बा। टोपी आ पगड़ी पुरुष लोग के पोशाक के हिस्सा हवे।<ref name=Costumes/> शेरवानी आ चूड़ीदार पैजामा, मर्दाना लोग बिसेस मोका-महाले पहिरे ला जइसे कि शादी बियाह भा तिहुआर के समय पर।{{r|Costumes}}
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