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== जीवन == '''अशोक के शुरुआती जीवन''' चक्रवर्ती अशोक सम्राट [[बिंदुसार]] आउर रानी धम्मा के बेटा रहन।<ref>https://en.m.wikipedia.org/wiki/Ashoka#CITEREFStrong1989</ref> लंका के परम्परा में बिंदुसार के सोरह पटरानियन आउर १०१ बेटन के उल्लेख बा। बेटन में खाली तीन गो के नाँव लिखल बा, [[सूसिम]] जवन सभसे बड़ रहन, अशोक आऊर तिष्य। तिष्य अशोक के सहोदरदभाई आऊर सभसे छोट रहन ।एक दिन ध्म्मा के सपना आइल जे उनकर बेटा बहूत बड़ सम्राट बनी। ओकरा बादे से राजा बिन्दुसार ओकरा आपन रानी बना लिहलन बाकिर धर्मा क्षत्रिय कुल के ना रहे, तऽ ओकरा कवनो बिशेस स्थान ना मिलल रहे। अशोक के कय गो (सौतेला) भाई - बहिन रहऽसन आउर ओकनी मे कड़ा प्रतिस्पर्धा रहत रहे । अशोक के घड़ी के ऊकेरल गइल प्रतीतात्मक चिह्न जेकरा हमनी के '[[अशोक चिह्न]]' के नाँव से जानेनी जा आज उ भारत के राष्ट्रीय चिह्न हऽ। [[बौद्ध धर्म]] के इतिहास में [[गौतम बुद्ध]] के बाद अशोके के नाँव आवेला। दिव्यदान में अशोक के एगो मेहरारु के नाँव 'तिष्यरक्षिता' मिलेला। ओकर लेखा में खाली ओकर मेहरारु 'करूणावकि' बिया। दिव्यादान में अशोक के दु भाइयन सुसीम आ विगताशोक के नाम लिखल बड़ुवे। अशोक मौर्य सम्राट [[चंद्रगुप्त मौर्य]] के पोता रहन। रोमन इतिहासकार अपियन के मोताबिक, चन्द्रगुप्त [[सैल्युकस]] के बेटी से बियाह कइले रहे; एही चलते इहो ह़ो सकेला कि अशोक के आजी युनानी होइहेँ।<ref>https://books.google.fr/books?id=sMoLhNQ9KRoC&pg=PA393#v=onepage&q&f=false</ref><ref>[https://books.google.fr/books?id=Kwnv3I6qIosC&pg=PA86 द] ब्रीफ हिस्टरी ऑफ इंडिया </ref> भारतीय ग्रंथ [[भविष्य पुराण]] में भी एह बात के लिखल गइल बा कि चंद्रगुप्त के बियाह सैल्युकस के बेटी से भइल रहे।<ref>फौरन इन्फ्लुएंस ऑन इंडिया, कृष्णा चन्द्र सागर,[https://books.google.co.in/books?id=0UA4rkm9MgkC&pg=PA83&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false 1992]</ref> पुरान बुद्ध, जैन आ हिन्दु लेखन से अशोक के बारे में अलग-अलग बात पता चलेला। [[अवदान साहित्य]] मे लिखल बा कि अशोक रानी सुभद्रंगी के बेटा रहन। अशोकवदन में लिखल बा कि अशोक के माई चम्पा नगर के एगो ब्राह्मण के बेटी रही।<ref>http://www.tandfonline.com/doi/abs/10.1080/02666030.2012.725581</ref><ref>रेलिक्स ऑफ द बुद्ध, स्ट्रॉन्ग [https://books.google.co.in/books?id=xqAB6PKyP98C&pg=PA136&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false जॉन]</ref> अशोक के नाँव उनके धइल रहे। दिव्यदानो मे अइसने कहानी लिखल बा लेकिन माई के नाँव जनकपदकल्यानी लिखल बा। '''सत्ता के बिस्तार''' २७२इशा पूर्व में राजा बिन्दुसार के मरला के बाद राजगद्दी खातिर लड़ाई चालू हो गइल।दिव्यदान में लिखल बा कि, बिन्दुसार आपन बड़ बेटा [[सूसिम]] के आपन उत्तराधिकारी बनावल चाहत रहन, बाकिर अशोक के आपन पिता के मंत्री लोगन के सहजोग मिलल रहे। मंत्री लोग सूसिम के अहंकारी मानत रहन, आउर ई लोग के लागत रहे की सूसिम उ लोग के इज्जत ना करी।<ref>[a][https://books.google.co.in/books?id=jbjT9GG__nEC&pg=PA268&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false]</ref> पता लागेला कि एगो रधागुप्त नांव के मंत्री अशोक के राजगद्दी ले पहुचावे में महत्वपूर्ण भूमिका निभवले रहे। अशोकवदन मे एह बात के लीखल गइल बा कि राजा बनला के बाद अशोक रधागुप्त के प्रधानमंत्री बनवले रहन। [[दिपवंश]] आ [[महावंश]] मे लिखल बा कि अशोक आपन ९९ भाईयन के मार के राजा बनल रहन, बाकिर एह बात के सबूत ना मिले। राजा बनला के बाद अशोक आपन राज्य के बहुत तेजी से बिस्तार कीइलें। हुनकर राज उत्तर-पच्छिम में हिंदुकुश से ले के पूरुब में वर्तमान बांग्लादेश ले, आ दक्खिन के ओरे आजकाल के तमिलनाडु आ केरल के कुछ हिस्सा छोड़ के बाकी मय भारत प बिस्तार वाला रहल, उनकर राज बलुचिस्तान आ अफगानिस्तानो पे रहल। '''बियाह''' [[File:Emperor Ashoka and his Queen at the Deer Park.jpg|thumb|middle|अशोक आपन रानी लोग साथे]] <small>अलग-अलग स्त्रोतन से पता लागेला कि अशोक के पाँच गो बियाह भइल रहे। उ लोग के नाँव देवी, करुवाकी, तिष्यारक्षा पद्मावती आउर असन्धिमित्रा रहे। अइसहीँ ईहो पता लागेला कि अशोक चार बेटा आ दुगो बेटी के बाप रहन। बेटन के नाम महेन्द्र(देवी के बेटा), तिवारा (करुवाकी के बेटा), कुनाल ( पद्मावती के बेटा), आउर जकुला रहे। बेटी लोग के नाम संघमित्रा(देवी के बेटी) आ चारूमती रहे।</small><ref>Ashoka by मुखर्जी [https://books.google.co.in/books?id=uXyftdtE1ygC रधकुमुंद]</ref> '''कलिंगा पऽ बिजय आ बुद्ध धर्म में परिवर्तन''' भले अशोक के जीवन के जीवन खून खराबा से भरल रहे बाकिर कलिंगा पऽ बिजय हासिल कइला के बाद उ बुद्ध धर्म के अपना लिहलें।[[कलिंग]] राज्य ओह समय में एगो गणतांत्रिक राज्य रहे जवन की ओह घड़ी के भारत में एगो अपवाद नियन रहे, काहे की ओह घड़ी राजतंत्र रहे। अशोक के गद्दी पऽ बइठला के आठ साल बाद [[कलिंग युद्ध]] भईल। शिलालेखन से पता लागेला की युद्ध बड़ी भयानक रहे जेमे लगभग एक लाख सैनिक मारल गइलें। कहल जाला की कलिंग पऽ बिजय हासिल कइला के बाद , एक दिन अशोक नगर घूमे गइलें जेने उनका खाली तबाही लउकल। युद्ध से भईल ओह तबाही उनका के बदल दिहलस, आ ओकर बाद उ बुद्ध धर्म के अपना लिहलन। '''देहांत आउर बिरासत''' अशोक ३६ साल लें राज कइलन, हुनकर २३२ ई•पु में देहांत हो गइल। कहल जाला की हुनकर अंतिम संस्कार बजी उनकर लाश सात दिन आउर सात रातन ले जलत रहल।उनका मरला के बाद [[मौर्य साम्राज्य]] ५० साल में ही खतम हो गइल। १८५ ई•पु मे अंतिम मौर्य सम्राट बृहदरथ के हत्या हुनकर सेनापति द्वारा कर दिहल गइल। जेकरा बाद [[पुष्पमित्र सूंघ]] राजा बनलें आ सुंघ वंश के स्थापना कीइलें। अशोक के बारे जादे तर बात शीलालेखन से पता लागेला जवन की [[प्राकृत भाषा]] में लिखल बा।
सारांश:
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