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== बिसय == {{Quote box |class = <!-- Advanced users only. See the "Custom classes" section below. --> |title = |quote = कइसे खेले जाइबि सावन में कजरिया<br /> बदरिया घेरि आइल ननदी ।। <br /> तू त चललू अकेली, केहू सँगे ना सहेली;<br /> गुंडा घेरि लीहें तोहरी डगरिया ।। <br />बदरिया घेरि आइल ननदी ।। <br /> केतने जना खइहें गोली, केतने जइहें फँसिया डोरी;<br /> केतने जना पीसिहें जेहल में चकरिया ।।<br /> बदरिया घेरि आइल ननदी ।। |author = --परंपरागत |source = |align = right |width = 30 |border = |fontsize = 110 |bgcolor = }} सावन की मौसम आ गावे वालिन के उमिर के हिसाब से कजरी की गीतिन में बिबिध बिसय मिले ला। गीतन में अधिकतर चंचलता आ प्रेम भरल विषय मिलेला। पति-पत्नी के प्रेम संबाद आ बिरह बरणन,{{sfn|कृष्णदेव उपाध्याय|1984|p=295}} ननद-भउजाई क छेड़छाड़, सासु-पतोहि क नोकझोंक, राधा-कृष्ण क प्रेम, श्रीरामचंद्र के जीवन क घटना, अउरी नई बहुरिया क अपने पति की साथै प्रेम भरल बातचीत कजरी क सबसे चलनसार विषय हवें। कजरी गावे वालिन में बहुत लइकी अइसनो होखेलीं जवन बियाह-गौना की बाद पहिला सावन में अपनी नइहर आइल रहेलिन जेकरा वजह से वियोग-रस से भरल कजरी क गीति भी मिलेलीं। एकरी अलावा जीवन के हर बात से जुडल कजरी क गीति छिटपुट पावल जालीं । भारत की आजादी के लड़ाई के समय देशभक्ती वाली कजरी बहुत गावल जाँय जिनहन के "सुराजी कजरी" कहले जाला। इहाँ कजरी क एगो उदहारण दिहल जात (साइड में कोटेशन देखीं) बा जवना में ननद-भउजाई क संवाद बा: पहिले भउजाई ननद से कहत बाड़ी कि "ए ननद! इ तऽ बादर घेरि आइल बा, हम एइसना में सावन में कजरी खेले कइसे जाइबि?" ननद कहत बाड़ी – "ए भउजी तू त अकेलही कजरी खेले जात बाडू आ तोहरी संघे केहू सहेलियो नइखे। डहरी में तोहके गुंडा रोकि लिहें तब!" ए पर भउजाई जवाब देत बाड़ी – "कि अगर एइसन होई त केतने लोग गोली खाई, केतने फाँसी पर चढ़ी आ केतने लोगन के जेल में चक्की पीसे के पड़ी।" एकरे अलावा खेती-किसानी से ले के बिबिध अन्य बिसय के बरनन कजरी के गीतन में मिले ला। दयानिधि मिसिर के कहनाम बा: {{quote | text=(कजरी में)... बारिश के इतने रंग-रूप, चित्र-प्रयोजन, मूड-भाव सँजोये हैं भोजपुरी साहित्य ने कि इस वैविध्य के सामने कोई भी साहित्य रश्क करे। | author=दयानिधि मिश्र |title=''लोक और शास्त्र: अन्वय और समन्वय''|source={{sfn|दयानिधि मिश्र|2015|p=121}} }}
सारांश:
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रउआँ इहो वादा करत बानी की आप ई खुद लिखले बानी या फिर पब्लिक पहुँच में मौजूद या अइसने कौनों फ्री स्रोत से नकल कइले बानी (ढेर जानकारी खातिर
भोजपुरीपिडिया:कापीराइट सब
देखीं)।
बिना परमीशन के कॉपीराइट वाली चीज इहाँ कब्बो मत डालीं!
कैंसिल
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