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===राजा जीमूतवाहन के कथा=== [[सतयुग]] में [[जम्बूद्वीप]] नाव के जगह प एगो बहुत प्रतापी राजा रहन उनकर नाम रहे जीमूतवाहन।<ref>{{cite web|title=जितिया व्रत की संपूर्ण कथा पढ़ें यहां, संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है यह व्रत|url=https://www.jansatta.com/religion/jitiya-vrat-2019-jimutavahana-vrat-katha-jitiya-vrat-katha-in-hindi-jitiya-katha-hindi-mai-read-here/1160604/|website=जनसत्ता.कॉम|accessdate=18 अक्टूबर 2019}}</ref> एक हाली उ अपना मेहरारू सुभगा के संगे ससुरारी जा के रहे लगले। अचानक राति के उनका कवनो मेहरारू के रोये के आवाज सुनाई देलस। वोह आवाज के पीछा करत उ मेहरारू लगे जा के रोये के कारन पुछला प मेहरारू एगो दुष्ट गरुण के बारे में बतवलस जवन गांव के लईकन के खा जात रहे उहे गरूण आज एह मेहरारूके बेटा के उठा ले गईल रहे। राजा मेहरारू से ओकरा लईका के बचावे के बचन देके वोह जगह पहुँचले जहाँ गरूण रोज मॉस खाए आवत रहे। राजा के देख के गरूण उनका प झपटलस आ उनकर बयां बाहीं नोच लेलस तब राजा आपन दाहिना अंग ओकरा आगे क देले ई देख के गरूण उनका से पुछलस की तू त आदमी नईख बुझात, का तू कवनो देवता हव तब राजा कहले की हम सूर्यवंस में उत्पन्न शालिबाहन के पुत्र हईं। राजा के उदारता देख के गरूण राजा से बरदान मांगे के कहला प राजा आजतक के खाइल सब लईकन के जीवित होखे के आ आज बाद कवनो लईका के अकाल मृत्यु से बचावे के बरदान मंगले। तब गरुण [[नागलोक]] से अमृत ले- आके सब मरल लईकन के जिआ देले आ जिउतिया के ब्रत के बारे में बतवले आ ई ब्रत करे वाला के पुत्र के अकाल मृत्यु से बचावे के बरदान दिहले।
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