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== संस्कृति में == [[चित्र:Dhak (Butea monosperma) flowers in Kolkata W IMG 4219.jpg|thumb|225px|alt=पलाश के फूल|पलाश के फूल। एही महीना में ई लाल फूल फुलालें आ [[होली]] खाती इनहने से परंपरागत रंग बनावल जाय।]] {{main|होली|सम्मत फूँकल}} फागुन के लोक संस्कृति में उछाह आ उल्लास के महीना मानल जाला। ई [[बसंत]] रितु के महीना हवे। माघ के जाड़ा बीते के बाद फागुन में मौसम गरम होखे सुरू होला। पतझर आ ओकरे बाद नाया पत्ता निकले सुरू होला।<ref name="Mishra2009">{{cite book|author=Vidyaniwas Mishra|title=Hindi Ki Shabd Sampada|url=https://books.google.com/books?id=1qhYL4ydm5UC&pg=PA43|date=1 January 2009|publisher=Rajkamal Prakashan Pvt Ltd|isbn=978-81-267-1593-0|pages=43–}}</ref> ई सीजन किसान लोग खाती भी महत्व के होला, गोहूँ-जौ के बालि लउके लागे लीं जे किसान लोग में उछाह के कारन बने ला।<ref>{{cite book|title=Hamare Tyohar|url=https://books.google.com/books?id=qq6EjlOvraoC&pg=PA123|publisher=Kitabghar Prakashan|isbn=978-81-88121-06-9|pages=123–}}</ref> फागुन में हवा के जोर बढ़े ला आ एह हवा के फगुनहट कहल जाला।<ref name="Mishra2009" /> फसल पाके के खुसी आ बसंत के आगमन एह महीना के आनंद आ फूहर गीत (कबीरा<ref name="(Prof.)2004">{{cite book|author=Vijaya Kumāra (Prof.)|title=Bhojapurī bhāshā, sāhitya, aura saṃskr̥ti|url=https://books.google.com/books?id=WNZPAQAAIAAJ|year=2004|publisher=Vijaya Prakāśana Mandira|page=109}}</ref> आ जोगीरा) के महीना बना देला। एह महीना में [[होली]] के तिहुआर खास बिसेसता हवे हालाँकि, पूरा महीना भर अइसन गीत गावल जालें। एह गीत सभ के [[फगुआ]] कहल जाला।<ref name="Śiśira1983">{{cite book|author=Karmendu Śiśira|title=Bhojapurī horī gīta|url=https://books.google.com/books?id=fqo6AAAAMAAJ|year=1983|publisher=Bhojapurī Akādamī}}</ref><ref name="Vāsantī1993">{{cite book|author=Kumārī Vāsantī|title=Nāgapurī gītoṃ kī chanda-racanā: eka sāṃskr̥tika adhyayana|url=https://books.google.com/books?id=A-W5AAAAIAAJ|year=1993|publisher=Kiśora Vidyā Niketana}}</ref> हिंदी के साहित्यकार [[रामविलास शर्मा]] एह महीना में मनावल जाए वाला एह आनंद के रोमन तिहुआर "सैटर्नेलिया" से तुलना करे लें।<ref name="Sharma2010">{{cite book|author=Dr. Ramvilas Sharma|title=Sangeet Ka Itihas Aur Bhartiya Navjagran Ki Samasyein|url=https://books.google.com/books?id=8zItc02XK8YC&pg=PA89|date=September 2010|publisher=Vani Prakashan|isbn=978-93-5000-229-2|pages=89–}}</ref>
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