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===नांव=== बौद्ध ग्रंथ [[दीपवंस]] आ [[महावंस]] मे ''बिंदुसार'' के ''बिंदुसारो'' लिखल बा। जैन ग्रंथ जइसे की परिशिष्ठपर्वन आ [[हिन्दू]] ग्रंथ जइसे विष्णु पुराण मे इनकर नांव ''विंदुसार'' लिखल बा।<ref name="VAS_Asoka">{{cite book |url=https://archive.org/stream/asokabuddhistemp00smitiala#page/18/mode/2up |title=असोका, द बुद्धिस्ट एंपरर ऑफ इंडिया |author= विंसेंट ऑथर स्मिथ |year=1920 |publisher= क्लेरेंदो प्रेस |location= ऑक्सफोर्ड |isbn=9788120613034 |pages=18–19 }}</ref><ref>{{cite journal |url=https://books.google.com/books?id=rlQOAAAAIAAJ&pg=PA10 |title= ऑन द अर्ली लाइफ ऑफ असोका |author= रजेंद्रलाल मित्र |journal= प्रिसीडिंग्स ऑफ एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल |year=1878 |publisher= एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल |page=10 }}</ref> आउरो सभ [[पुराण]] मे चन्द्रगुप्त के पूत के नांव दिहल बा जेकरा के लेखन संबंधी भूल मानल जा सकेला; [[श्रीमद्भागवत]] मे ''वरिसार'' चाहे ''वरिकार'' लिखल बा आ [[वायू पुरान]] मे ''भद्रसार'' चाहे ''नंदसार'' लिखल बाटे।{{sfn|गुरुगे|1993|p=465}} [[महाभाष्य]] मे चन्द्रगुप्त के पूत के नांव ''अमित्रघात'' देल बाटे।{{sfn|सिंह|2008|p=331}} यूनानी लेखक लोग इनकरा ''अलित्रोघेट्स'' चाहे ''अमित्रोघेट्स'' कहले बा। बिंदुसार के ''देवानंपिय'' ओ कहल बाटे जे बाद मे असोको के कहल गईल। जैन ग्रंथ राजावली कथा मे इनकरा सिंहसेना कहल गईल बा।{{sfn|Daniélou|2003|p=108}} बौद्ध आ जैन ग्रंथन के खीसा सभ मे ई लिखल बा जे बिन्दुसार के हुनकर नांव कइसे मिलल। दुनो मे लिखल बा जे [[चाणक्य]] चन्द्रगुप्त प माहूर के असर के काटे ला हुनकर जेवनार मे प्रतिदिन तनी सा माहुर फेंटत रहन। चन्द्रगुप्त ई ना जानत रहन आ एकदिन आपन गाभिन मेहरारू के आपना मे खियवलन। बौद्ध ग्रंथन मे लिखल बा जे रानी सात दिन मे लईका जने के रही, चाणक्य जब जनलन जे रानी अब ना बचिहें, ऊ तलवार से हुनकर मुड़ी अउर पेट काट देलन आ लईका के निकारि देलन, फेर सात दिन ले ओह लईका के मरल बकरियन के पेट मे धइलन। सात दिन प बिंदुसार जनमलन आ हुनकर नांव बिंदुसार एहसे धराइल काहेकी हुनकर देहि प बकरी के खून के ठोप (बिंदू) चुवत रहे।<ref>{{cite book |first= थॉमस आर |last= ट्राउत्मन्न |authorlink=Thomas Trautmann |title=Kauṭilya and the Arthaśāstra: a statistical investigation of the authorship and evolution of the text |url=https://books.google.com/books?id=v3iDAAAAMAAJ |year=1971 |publisher=Brill |page=15 }}</ref> जैन ग्रंथ परिशिष्ठपर्वन मे लिखल बा जे रानी जसहिं मुअली चाणक्य हुनकर पेट काट के लईका निकार लेलन, तले माहुर के एगो ठोप लईका के माथा ले आ गईल रहे एही से हुनकर नांव बिंदुसार धाराइल।<ref name="Rosalind_1993">{{cite book |url=https://books.google.com/books?id=Po9tUNX0SYAC&pg=PA204 |title=The Clever Adulteress and Other Stories: A Treasury of Jaina Literature |chapter=The Minister Cāṇakya, from the Pariśiṣtaparvan of Hemacandra |translator=Rosalind Lefeber |editor=[[Phyllis Granoff]] |author=Motilal Banarsidass |year=1993 |pages=204–206 }}</ref>
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