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==बिबरण== [[File:Litti being prepared in a restaurant barbeque in Bengaluru, India.webm|thumb|बंगलौर में एक ठो रेस्तरां में लिट्टी तइयार कइल जा रहल बाटे]] लिट्टी देखे में गोल-गोल, देसी घीव में चमकत, सोन्ह सुगंध वाला ब्यंजन हऽ।<ref name="(India)Choudhury1966">{{cite book|author=प्रणब चन्द्र राय चौधुरी|title=बिहार जिला गजेटियर |url=https://books.google.com/books?id=0nw1AAAAIAAJ|accessdate=28 सितंबर 2012|year=1966|publisher=सुपरीटेंडेंट, गवर्नमेंट प्रेस, बिहार|page=807}}</ref> कही-कही एकरा के चापुटो बनावे के चलन बा आ एकरा के जब बिना सतुआ भरले बनावल जाला तब सादी भउरी कहल जाला। सादी भउरी के एक ठो रूप भीतर से खोंखर भी हवे। सादी भउरी के चिकन या मीट के साथ काफी पसंद कइल जाला। गाढ़ दाल, जेकरा के भोजपुरी क्षेत्र में नकदावा कहल जाल, के साथ भी सादी भउरी खाइल जाला। भरुई लिट्टी बनावे खातिर {{abbr|सतुआ|भूंजल चना के पिसान}} में नून, मरिचा, कुछ मसाला आ महीन कटल लहसुन डाल के मीसल जाला। कुछ जगह एकरा के चटकार बनावे खातिर मरिचा के अँचार भी डालल जाला। जब ई मसाला त इयार हो जाला तब एकरा के सानल आटा के कटोरी नियर बना के ओह में भरल जाला आ गोल लोई नियर रूप दे दिहल जाला। अब ई सेंके खातिर तइयार हो जाला। [[गोईंठा]] के भउर या कोइला के आँच पर एकरा के सेंक दिहल जाला। परोसे के समय ले गरम रहे एकरा खातिर ओही राखी में तोप के भी रखल जाला। परोसे से पहिले कपड़ा से राखी झार के भउरी पर गरम देसी घीव चोभ दिहल जाला या फिर सीधे घीव में बोर के निकाल लिहल जाला। एकर एक ठो दूसर तरीका भाप से पकावल भी हवे। कवनो भदेली आदि बर्तन में रख के पानी डाल के उबाल लिहल जाला फेन कड़ाही में तेल डाल के छान दिहल जाला एह बिधि के बनल लिट्टी चिकनाहट के कारन ओतना लोक प्रिय नइखे। एक ठो अन्य तरीका हवे गोल लोई के बना लिहले की बाद तेल में छान के पकावल। ई रूप में बनल भउरी अकसर जतरा के समय साथ ले जाए आ डहरी में खाए खातिर बनावल जाले। बजार में भी बहुत सारी दुकान पर एह रूप में बनल लिट्टी नाश्ता के तौर पर मिल जाले।
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भोजपुरीपिडिया:कापीराइट सब
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