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==ब्रत-तिहुआर== सावन के महीना धार्मिक आ सांस्कृतिक रूप से काफी महत्व वाला हवे। एह महीना में कई गो तिहुआर पड़े लें<ref name="Kaushik2002">{{cite book|author=Jai Narain Kaushik|title=Hamare Teej-Tyohar Aur Mele|url=https://books.google.com/books?id=9dBQw005ldgC&pg=PA39|year=2002|publisher=Star Publications|isbn=978-81-85244-67-9|pages=39–}}</ref> जेह में से कुछ मुख्य तिहुआर नीचे दिहल जात बा: ===हरियाली तीज=== {{मुख्य|तीज}} नेपाल, बिहार आ उत्तर प्रदेश में मुख्य [[तीज]] के तिहुआर भादों के महीना में मनावल जाला, हालाँकि सावन के अँजोर के तीसरी तिथी, यानी कि तीज के हरियाली तीज के रूप में मनावे के चलन हवे। हरियाली तीज के महत्व पच्छिमी भारत के इलाका में ढेर हवे जबकि पूरबी भारत में भादों के तीज प्रमुख रूप से मनावल जाले जेकरा के हरतालिका तीज कहल जाला। ===नागपंचिमी=== {{main|नागपंचिमी}} [[File:Naag pooja.jpg|thumb|230px|alt=नाग के मूर्ती के पूजा|नागपंचिमी के नाग देवता के पूजा करत एगो औरत, नेपाल]] सावन के अँजोर पाख के पंचिमी तिथि के नाग देवता लोग के पूजा कइल जाला। उत्तर प्रदेश में एह दिन धान के लावा आ दूध चढ़ावल जाला। जगह-जगह [[अखाड़ा]] में कुश्ती के आयोजन भी होला आ कबड्डी आ चिकई नियर खेल के भी। ===रक्षाबंधन=== {{main|रक्षाबंधन}} सावन के पुर्नवासी के दिन हिंदू लोग के बहुत प्रचलित आ पबित्र मानल जाए वाला तिहुआर रक्षबंधन के रूप में मनावल जाला। ब्राह्मण लोग एह दिन जजिमान के रक्षा के सूत बान्हे ला। पच्छिमी भारत में ई तिहुआर भाई-बहिन के तिहुआर के रूप ले लिहलस आ अब ई लगभग पूरा भारत में एही रूप में ढेर प्रचलित हो चुकल बा। एह दिन बहिन लोग अपना भाई के राखी के रंगीन सूत बान्हे ला आ अपना रक्षा के बचन लेला। ===श्रावणी मेला=== [[झारखंड]] के [[देवघर]] में, [[बाबा धाम|बैजनाथ धाम]] में, सावन के पुर्नवासी के बिसाल मेला के आयोजन होला जेह में काँवरिया लोग भारी संख्या में एकट्ठा होला। सावन भर चले वाला काँवर जात्रा के ई आखिरी दिन होला।
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