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==इतिहासी महत्व== [[File:Sonpur-Mela-2017.jpg|thumb|230px|सोनपुर मेला में घूमत बिदेसी सैलानी लोग]] सोनपुर मेला खाली मवेशी बेचे-खरीदे के जगह ना हवे। अतना लोग के भारी भीड़ एकट्ठा होला कि ई एगो सामाजिक-सांस्कृतिक सम्मेलन बन जाला। एह मेला के दौरान होखे वाला पब्लिक के भीड़ के चलते इहाँ कुछ इतिहासी सम्मलेन भी भइल बाने। एह में से दू गो प्रमुख बाने। सन 1908 में एही सोनपुर के मेला में बिहार प्रांतीय कांग्रेस के गठन भइल रहल।<ref name="Pandey">{{cite book|author=Narendra Kumar Pandey|title=Dr Shrikrishan Singh Itihas Ke Aaine Me|url=https://books.google.com/books?id=6yucDAAAQBAJ&pg=PA15|isbn=978-81-7721-299-0|pages=15–}}</ref> एह पहिली बैठक के अध्यक्षता सरफ़राज हुसैन खान कइलेन।<ref name="Sajjad2014">{{cite book|author=Mohammad Sajjad|title=Muslim Politics in Bihar: Changing Contours|url=https://books.google.com/books?id=0iVHBAAAQBAJ&pg=PA10|date=13 August 2014|publisher=Routledge|isbn=978-1-317-55982-5|pages=10–}}</ref> कांग्रेस पार्टी के लोग बाद में भी एहिजा आ अइसने मेला सभ में जा के नया सपोर्टर जुटावे के कोसिस करे।<ref name="Yang1999">{{cite book|author=Anand A. Yang|title=Bazaar India: Markets, Society, and the Colonial State in Bihar|url=https://books.google.com/books?id=D5lQutvzAp4C&pg=PA160|date=1 February 1999|publisher=University of California Press|isbn=978-0-520-91996-9|pages=160–}}</ref> एगो अन्य दुसरी प्रमुख चीज कि हेइजे स्वामी [[सहजानंद सरस्वती]] 1920 में "किसान सभा" के भी गठन कइले रहलें आ एह सभा के अध्यक्ष बनलें।<ref name="Sharma">{{cite book|author=Dinesh Datt Sharma|title=Swami Sahajananda Saraswati : Amrit Kalash|url=https://books.google.com/books?id=FWNtCwAAQBAJ&pg=PA133|isbn=978-93-5048-880-5|pages=133–}}</ref> कुछ अन्य बिबरन में, एहिजे 1888 में अखिल भारतीय गौरक्षा समीति के स्थापना होखे के बात भी बतावल जाला।<ref name="Yang1999"/><ref name="festivalsofindia1">{{cite web|url=http://www.festivalsofindia.in/sonepur/history.aspx |title=Sonepur Mela History, History Behind Sonepur Fair |publisher=Festivalsofindia.in |date= |accessdate=2017-12-01}}</ref> [[राहुल सांकृत्यायन]] के हवाला से एह मेला के उत्पत्ती शुंग बंस के शासन काल से भइल बतावल जाले। जबकि बिहार सरकार के पर्यटन बिभाग के हवाला से एह मेला के प्राचीन होखे के बारे में बतावल गइल बा कि [[चंद्रगुप्त मौर्य]] भी इहाँ से हाथी खरीदें।<ref name="bbc2017">{{cite web|author=अतहर इमाम ख़ान सोनपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए |url=http://www.bbc.com/hindi/india-42123343 |title=सोनपुर मेलाः चंद्रगुप्त मौर्य भी यहां से हाथी घोड़ा ख़रीदा करते - BBC हिंदी |publisher=Bbc.com |date= |accessdate=2017-12-01}}</ref> कुछ जगह बिबरन मिले ला कि पहिले ई मेला [[पटना]] के उत्तर में मौजूद [[हाजीपुर]] में लागे आ [[औरंगजेब]] के जमाना में एह जगह लागे शुरू भइल। पहिले खाली भर पूजा हेइजा होखे।<ref name="festivalsofindia1"/> बाबा हरिहरनाथ के मंदिर के इतिहास के बारे में कथा बतावल जाला कि ई [[राम]] द्वारा जनक के इहाँ जात समय बनवावल गइल रहे। बाद में एकर मरम्मत के काम राजा मान सिंह द्वारा करावल गइल आ अपना अंतिम रूप में, वर्तमान मंदिर के निर्माण राजा राम नारायण द्वारा [[मुग़ल साम्राज्य|मुग़ल काल]] के अंतिम समय में करावल गइल।<ref name="festivalsofindia1"/>
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