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===खानपान=== {{Main article|उत्तर प्रदेश के खाना}} [[File:Vegetarian Curry.jpeg|alt=photograph|thumb|230px|उत्तर प्रदेशी थाली, नान, दाल, रायता, आ शाही पनीर के संघे।]] [[File:Paan, (betel leaves) being served with silver foil, India.jpg|thumb|230px|चानी के वरक लागल पान।]] रोज-रोज खाइल जाए वाला खाना में, उत्तर भारत के बाकी इलाका नियर, उत्तर प्रदेश में भी थाली में [[रोटी]], दाल, सब्जी आ चावल (भात) प्रमुख भोजन हवे। एकरे संघे, चटनी, रायता, [[अँचार]] आ पापड़ नियर चीज चटकार करे खातिर भोजन के सहजोगी आइटम हवें सऽ। खास मोका महाले, रोटी के जगह पूड़ी खाइल जाला। अइसन मोका सभ पर कड़ाही में छान के बनावल पकवान सभ के प्रमुखता हो जाला, इनहन के पक्का खाना कहल जाला। पूड़ी, कचउड़ी, सब्जी, पोलाव, पापड़, रायता आ मीठा आइटम में खीर (तस्मई) भा सेवई खाइल जाला। पेय (पियल जाए वाला) चीज सभ में छाछ (भा माँठा) अभिन भी बहुत सारा लोग पसंद करे ला। भोजन के बाद पान खाए-खियावे के चलन भी हवे। बहुत सारा समुदाय-बिरादरी सभ के आपन ख़ास पकवान भी होला। जैन, कायस्थ आ मुसलमान लोग के अपना तरीका के भोजन होला। एही तरीका से एह बड़हन राज्य में क्षेत्र के अनुसार भी बिबिधता देखे के मिले ला। अवधी खाना, लखनऊ के परभाव में कबाब, बिरियानी, कीमा आ निहारी नियर पकवान सभ खातिर बहुत परसिद्ध हवे। मिठाई के आइटम में, खुरचन, बरफी, पेड़ा, गुलाबजामुन, पेठा, राबड़ी नियर चीज बहुत चलन में बाड़ी आ हिंदू लोग के भोजन में इनहन के बहुत प्रमुख अस्थान बाटे। लखनऊ के चाट आ बनारस के पान अपना सवाद आ सामग्री खाती पुरा दुनिया में मशहूर हवे।<ref name=paan>{{cite news|title=Banarasi paan or tobacco|url=http://timesofindia.indiatimes.com/topic/Banarasi-paan-or-tobacco|accessdate=14 July 2012|work=[[दि टाइम्स ऑफ इंडिया]]|date=28 अप्रैल 2012}}</ref> अवधी खानपान पर मुख्य रूप से लखनऊ क परभाव देखल जाला। नबाब लोग के शासन काल में, मुगलई पकवान के इहाँ चलन बहुत बढ़ल आ एही कारण इहाँ के भोजन भी काश्मीर, मध्य एशिया, पंजाब आ हैदराबादी पकवान सभ से परभावित भइल; आज शहर के अपना नबाबी खाना खातिर जानल जाला।<ref name="books.google.nl">{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=v-2TyjzZhZEC&pg=PA10&lpg=PA10&dq=central+asian+influence+on+mughal+cuisine|title=Royal Mughal Ladies and Their Contributions|accessdate=1 जून 2014|isbn=9788121207607|author1=Mukherjee|first1=Soma|year=2001}}</ref> लखनऊ के बावर्ची आ रकाबदार लोग इहाँ खास 'दम पुख्त' स्टाइल शुरू कइल (जेह में कई तरह के "दम" शामिल बाने, इनहन के मद्धिम आँच पर देरी ले पकावल जाला) आ अब ई लखनऊ के खास चीन्हा बन चुकल बा। एही स्टाइल के बिस्तार के रूप में, कबाब, कोरमा, बिरियानी, कलिया, कुलचा, जरदा, शीरमाल, रूमाली रोटी, आ वरकी पराठा भी लखनऊ के खास चीज मानल जाला। अवध के खाना खाली भर बिबिधते के मामिला में धनी नइखे, पकवान बनावे में इस्तेमाल होखे वाला सामान में भी बहुत चीज शामिल कइल जाला जेह में इलायची, केसर आ जाफरान नियर खुशबूदार मसाला इत्यादि गिनावल जा सके लें। पूरबी उत्तर प्रदेश के खाना, जहाँ भोजपुरी संस्कृति बा, कुछ अलगे किसिम के होला। आम उत्तर परदेशी थाली इहाँ ओइसने होले जइसन बाकी उत्तर भारत में, बाकी पूरुब बढ़े पर भात के महत्त्व आ मछरी के महत्व बढ़त जाला। खास परब तिहुआरन पर पूड़ी कचौड़ी के साथ कढ़ी-बरी इत्यादि के महत्व भी बढ़ जाला। भउरी-चोखा ([[लिट्टी]]-चोखा), सतुआ आ दही-चिउड़ा एह इलाका में काफी चलन में रहल बा। तराई के इलाका में मछरी के परभाव बढ़त देखल जाला।
सारांश:
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