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===प्राचीन काल=== [[File:Sculpture of Aditya, the Sun god, of Gupta period, from Garhwa, Allahabad, 1870s.jpg|thumb|right|200px|गढ़वा में एगो गुप्तकाल के मुरती]] प्रयाग क अस्तित्व [[वैदिक काल]] से बा आ वैदिक साहित्य में एकर वर्णन [[ब्रह्मा]] जी की यग्य की भूमि की रूप में भइल बा आ एही क समर्थन [[मत्स्यपुराण]] आ लिंगपुराण में भी मिलेला। इहवाँ पुरातात्विक खोदाई में पालिशदार उत्तरी काला मृदभाण्ड मिलल बा जेवन 600 ई॰पू॰ से 700 ई॰पू॰ के बतावल जाला। पुराणन में वर्णन मिलेला कि राजा [[ययाति]] जेवन प्रयाग से जा के सप्तसैन्धव प्रदेश पर विजय प्राप्त कइलें उनहीं के पाँच पुत्रन (यदु, द्रुह्य, पुरु, अनु, आ तुवर्शु) की नाँव पर [[ऋग्वेद]] की मुख्य जन क नाँव पड़ल।<ref>रोमिला थापर, Ancient Indian Social History: Some Interpretations, पन्ना. 298; http://books.google.co.in/books?id=fK3VTUrWsD0C&pg=PA298&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false</ref> जब आर्य लोग मध्यदेश में आपना प्रभुत्व अस्थापित कइलें तब कौशाम्बी-प्रयाग क क्षेत्र उनहन लोगन की अधिकार में महत्वपूर्ण क्षेत्र रहल। कुरु लोग [[हस्तिनापुर]] की बाढ़ में बह गइला की बाद [[कौशाम्बी]] नगरी क अस्थापना कइलें जेवन ऋषि कोसंब की नाँव पर बसल<ref>name= “dist_web_hist”> http://allahabad.nic.in/history.htm</ref>। महर्षि [[वाल्मीकि]] रचित [[रामायण]] में श्री [[राम]] के इहवाँ आगमन के वर्णन बा जब ऊ बनवास कि समय दक्षिण की ओर जात घरी इहँवा [[भारद्वाज ऋषि]] की आश्रम में रुकल रहलें। इहाँ से श्री राम भरद्वाज ऋषि की सुझाव के मानि के [[चित्रकूट]] की ओर गइलें आ उहाँ कुटी बना के रहे लगलें। [[File:Ashoka Pillar, Allahabad, 1870.jpg|thumb|right|200px|इलाहाबाद किला में अशोक के खंभा, 1870 के लिहल फोटो]] महाजनपद काल में प्रयाग के ई इलाका वत्स राज्य की अन्दर आवे जेकर राजधानी कौशाम्बी रहे। एकरी बाद [[भगवान बुद्ध]] के इहवाँ आगमन के वर्णन मिलल बा जब 450 ई॰पू॰ [[मगध]] में [[अजातशत्रु]] के शासन रहे <ref name="श्रीवास्तव">श्रीवास्तव</ref>। 319 ई॰पू॰में [[चंद्रगुप्त मौर्य]] कौशाम्बी पर अधिकार क लिह्लें आ प्रयाग भी उनकी अधिकार में आ गइल। 273 ई॰ में सम्राट अशोक की शासन काल में इहँवा एगो कीर्ति स्तंभ लगवावल गइल जेवन आज भी [[अशोक स्तंभ]] की नाँव से इलाहाबाद में अकबर की किला में सुरक्षित बा। ए पर उत्कीर्ण लेख के [[प्रयाग प्रशस्ति]] की नाँव से जानल जाला। प्रयाग प्रशस्ति में [[समुद्रगुप्त]] द्वारा 326 ई. में अश्वमेध यग्य कइला क वर्णन लिखल बा आ ए शिला लेख के रचयिता हरिषेण के मानल जाला। समुद्रगुप्त के खोदवावल कुआँ इलाहाबाद की बगल में झूँसी की लगे बा जेवना के समुद्रकूप कहल जाला। एकरी बाद 525 ई॰ में प्रयाग आ एकरी आसपास की इलाका पर [[कन्नौज]] की राजा यशोवर्मन क अधिकार हो गइल। सम्राट [[हर्षवर्द्धन]] की बारे में कहल जाला कि उहाँके हर कुंभ मेला में आपन सबकुछ दान क दीं। चीनी यात्री [[ह्वेन सांग]] के आगमन हर्षवर्धन की समय में भइल रहे आ ऊ प्रयाग के यात्रा कइलें आ अपनी बर्णन में लिखलें कि गंगा आ यमुना नदी जहाँ मिलेलीं उहाँ एगो बड़ा मंदिर आ विशाल पेड़ बा। उ इहो लिखलें कि ए पेड़ (अक्षयवट) से बहुत लोग कूदि के जान दे देला काहें की ई मान्यता बा कि ए परम पबित्र जगह पर मरला से स्वर्ग मिल जाई।<ref name="गजेटियर">गजेटियर</ref> हर्षवर्द्धन की बाद क लगभग 200 बारिस क इतिहास नामालूम बा। लगभग 810 ई. की बाद कन्नौज क शासन प्रतिहार राजपूत लोगन की द्वारा भइल आ 1090 ई॰ की आसपास [[कड़ा]] के इलाका चंद्रदेव गहड़वाल की कब्ज़ा में आ गइल। ए समय प्रयाग के शासन कड़ा से चले आ लगभग सारा जानकारी कड़ा की पुरालेख से प्राप्त होला।
सारांश:
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