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===प्राचीन इतिहास=== पुराणन में लिखल कथा की मोताबिक वाराणसी नगर के अस्थापना भगवान शिव जी कइलें रहलन। महाभारत की कथा में काशी क जिकिर आइल बा जहाँ पितामह भीष्म काशी नरेश की तीनों पुत्री (अम्बा, अम्बिका, अम्बालिका) लोगन के अपहरण कइले रहलन। महाभारत की युद्ध में काशी नरेश पाण्डव सेना में रही के कौरवन से लड़ाई कइलन। पुरातात्विक खोदाई में मिलल चीजन की अध्ययन से ई पता चलल बा कि वाराणसी में सबसे पुरान बस्ती 1000 ई. पू. की आसपास रहे ए तरह से वाराणसी विश्व की सबसे पुरान बसल नगरन में गिनल जा सकेला। ई पुरातात्विक खोज बतावेले कि ओ समय वाराणसी में वैदिक आर्य लोग निवास करें। हालाँकि ओही समय की आसपास के अथर्ववेद में इहाँ अनार्य लोगन के बस्ती के बात लिखल बा।<ref>Pletcher, 2010 pp=159–160 |http://books.google.co.in/books?id=Mjr0X-8jrLAC&pg=PA159&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false</ref> एकरी आलावा वाराणसी जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ के भी निवास अस्थान मानल जाला। [[भगवान बुद्ध]] (जन्म 567 ई.पू.) की समय में वाराणसी काशी राज्य के राजधानी की रूप में रेशम, मलमल, इत्र, हाथीदांत के सामन अउरी कलात्मक समान की केन्द्र की रूप में विख्यात रहे।<ref>Pletcher, 2010, pp=159–160 |http://books.google.co.in/books?id=Mjr0X-8jrLAC&pg=PA159&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false</ref>[[भगवान बुद्ध]] बनारस से थोड़ी दूर पर स्थित [[सारनाथ]] में आपन पहिला उपदेश दिहलीं आ इहें से धर्मचक्रप्रवर्तन कइलिन। ए बात के प्रमाण [[ह्वेन सांग]] नाँव के चीनी यात्री, जेवन 635 इस्वी में इहाँ आइल रहलें, दिहलें कि ओ समय में वाराणसी धर्म आ ब्यापार के एगो महत्वपूर्ण केन्द्र रहे। ए नगर के धार्मिक महत्व अपनी उत्कर्ष पर पहुँच गइल जब आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य इहवाँ शैव पीठ के अस्थापना कइलें। प्राचीन काल में तक्षशिला से पाटलिपुत्र जाये वाला मार्ग इहवाँ वाराणसी से हो के गुजरे।
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