Jump to content
Main menu
Main menu
move to sidebar
लुकवाईं
नेविगेशन
मुख्य पन्ना
हाल के बदलाव
अट्रेंडम पन्ना
मीडियाविकि के बारे में मदद
भोजपुरीपिडिया
खोज
खोजीं
Appearance
खाता बनाईं
खाता में प्रवेश
निजी औजार
खाता बनाईं
खाता में प्रवेश
Pages for logged out editors
learn more
योगदान
बातचीत
भोजपुरी साहित्य
(खंड) के संपादन कइल जात बा
पन्ना
बातचीत
भोजपुरी
पढ़ीं
संपादन करीं
स्रोत संपादित करीं
इतिहास देखीं
औजार
औजार
move to sidebar
लुकवाईं
Actions
पढ़ीं
संपादन करीं
स्रोत संपादित करीं
इतिहास देखीं
जनरल
इहाँ का जुड़ल बा
संबंधित बदलाव
खास पन्ना
पन्ना से जुड़ल जानकारी
Appearance
move to sidebar
लुकवाईं
चेतावनी:
रउआँ आपन खाता में प्रवेश नइखीं कइले। अगर रउआँ कौनों बदलाव करब त राउर आईपी पता सभके लउकी। अगर रउआ
खाता में प्रवेश करब
या
नया खाता बनाइब
तब, अउरी सुबिधा सब की संघे राउर संपादन के श्रेय भी राउर प्रयोगकर्तानाँव के मिली!
स्पैम-बिरोधी रोक (Anti-spam check) एके
मत
भरीं!
===बिचला काल=== बिचला बेर के रचना में भक्ति के उदय आ संत लोगन के बानी के समेटल जाला। [[हिंदी साहित्य]] में एकरा के भक्ति काल कहल जाला। एह काल के कवि लोगन में [[बिद्यापति]], [[सूरदास]], [[कबीरदास]], [[जायसी]] आदि के नाँव गिनावल जाला। इनहन लोगन में केहू भी खास भोजपुरिये के कवि होखे अइसन ना बा बाकी इन्हन लोगन के रचना में भोजपुरी के परभाव वाली रचना भी भेटले । ग्रियर्सन के हवाले से बिद्यापती के कई ठो रचना भोजपुरी में भइल बतावल जाला; आ रामनरेश त्रिपाठी के हवाले से एगो उदाहरण {{sfn|तिवारी|2014|pp=96|ps=<br>"कुआर मास बन बोलेला मोर,<br>आउ-आऊ गोरिया बलमुआ तोर।<br>अइलें बलमुआ, पुजली आस।<br>पुरल बिदापति बारह मास।।" -- रामनरेश त्रिपाठी के 'कविता कौमुदी' भाग-1 के हवाले से।}} बिद्यापति के बारहमासा से दिहल गइल बा जे साफ भोजपुरी में बाटे। सूरदास मुख्य रूप से ब्रजभाषा के कवि रहलें बाकी उनहूँ के एगो रचना{{sfn|तिवारी|2014|pp=97|ps=<br>"चंदन रगरी के भोरवलिन हो जसुदा जी के लाल,<br> मोतियन बुन्दवा बरसि गाइले हो मुसरन के धार।<br> अब सून लागेला भवनवाँ हो नाहीं अइलें गोपाल,<br> सूरदास बलिहारी हो चरनन के आस।।"}} देखे जोग बाटे। कबीर के परसिद्ध निर्गुन "कवन ठगवा नगरिया लूटल हो" खाँटी भोजपुरी के रचना बाटे। कबीर के चेला धरमदास के रचना{{sfn|तिवारी|2014|pp=101|ps=<br>"कहवाँ से जीव आइल, कहँवा समाइल हो।<br> कहवाँ कइल, मोकाम, कहवाँ लपटाइल हो।<br> निरगुन से जीव आइल, सरगुन समाइल हो,<br> कायागढ़ कइल मोकाम, माया लपटाइल हो।।"}} एकरी आलावा बाबा [[कीनाराम]] आ भीखमराम के रचना में भोजपुरी के झलक देखल जा सके ला। घाघ आ भड्डरी के कहाउत सब भी एही काल के रचना हईं सऽ।
सारांश:
ई नोट कर लीं कि भोजपुरीपिडिया पर सगरी योगदान के दुसरा योगदानकर्ता लोगन द्वारा संपादित कइल जा सकेला, बदलल या हटावल जा सकेला। अगर आप ई नइखीं चाहत की राउर लिखल चीज के केहू भी बे-मोहछोह के संपादित क दे, तब ए के इहाँ मत डालीं।
रउआँ इहो वादा करत बानी की आप ई खुद लिखले बानी या फिर पब्लिक पहुँच में मौजूद या अइसने कौनों फ्री स्रोत से नकल कइले बानी (ढेर जानकारी खातिर
भोजपुरीपिडिया:कापीराइट सब
देखीं)।
बिना परमीशन के कॉपीराइट वाली चीज इहाँ कब्बो मत डालीं!
कैंसिल
संपादन में मदद
(नया विंडो में खोलीं)