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== साहित्य में == माघ महीना के नाँव पर संस्कृत के एगो कवि के नाँव हवे जिनकर रचना शिशुपालवधम् संस्कृत के प्रमुख महाकाव्य ग्रंथ मानल जाला। कहानी ई बतावल जाला कि कवी के नाम कुछ अउरी रहल बाकी भारवि (शब्दार्थ: सूर्य के आभा) नाँव के कवी से अपना के श्रेष्ठ बनावे खाती आपन नाँव माघ रख लिहलें (माघ में सुरुज के परभाव कम हो जाला)। एकरे परमान में उद्धरण दिहल जाला — "तावद्भाभारवेर्भाति यावद् माघस्य नोऽदयः"। माघ के कबिता एतना कठिन हवे की कहनाम बा की माघ महिन्ना आ माघ के कबिता से केकरा जाड़ न हो जाई! — "माघेनैव च माघेन कम्पः कस्य न जायते"।<ref>{{cite book |last1=वाटवे |first1=केशव नारायण |title=संस्कृत काव्य के पाँच प्राण |date=2008 |publisher=किताबघर प्रकाशन |location=नई दिल्ली |isbn=978-81-89859-49-7 |page=258 |url=https://books.google.co.in/books?id=ukbCMjb5olUC&newbks=1&newbks_redir=0&lpg=PA258&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98%E0%A5%87%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%83%20%E0%A4%95%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%20%E0%A4%A8%20%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A4%E0%A5%87&hl=hi&pg=PA258#v=onepage&q=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98%E0%A5%87%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%83%20%E0%A4%95%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%20%E0%A4%A8%20%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A4%E0%A5%87&f=false}}</ref> मालिक मुहम्मद जायसी अपना बारहमासा में माघ महिन्ना में पाला पड़े आ काम भावना के बढ़े के जिकिर कइले बाड़ें।<ref>{{cite web |last1=Tyagi |first1=Amita |title=NCERT Prashn-Uttar Hindi - Aechhik for Class XII |url=https://books.google.co.in/books?id=_YRIEAAAQBAJ&newbks=1&newbks_redir=0&lpg=PA106&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98%20%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A4%BE&hl=hi&pg=PA106#v=onepage&q=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98%20%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A4%BE&f=false |publisher=Arihant Publications India limited |language=hi |date=1 जनवरी 2014}}</ref> === पुराण में === पुराण में कथा के मोताबिक माघ महीना के एकादशी के दिने अँवरा (आँवला) के जनम भइल रहे।<ref>{{cite book |last1=Bedi |first1=Ramesh |title=Gunkari Phal |date=1 सितंबर 2002 |publisher=Rajkamal Prakashan |isbn=978-81-267-0598-6 |url=https://books.google.co.in/books?id=ktwmq3hekOIC&newbks=1&newbks_redir=0&lpg=PA108&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98%20%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B8&hl=hi&pg=PA108#v=onepage&q=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98%20%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B8&f=false |language=hi}}</ref> === लोक में === घाघ आ भड्डरी के कई गो कहावत माघ के बारे में परसिद्ध बाड़ीं।<ref>{{cite book |last1=Dwivedi |first1=Devnarayan |title=Ghagh Aur Bhaddari Ki Kahawatein |date=2006 |publisher=Diamond Pocket Books (P) Ltd. |isbn=978-81-288-1368-9 |url=https://books.google.co.in/books?id=k9uds-8fxkEC&newbks=1&newbks_redir=0&lpg=PA61&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98%20%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B8&hl=hi&pg=PA61#v=onepage&q=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98%20%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B8&f=false |language=hi}}</ref>
सारांश:
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रउआँ इहो वादा करत बानी की आप ई खुद लिखले बानी या फिर पब्लिक पहुँच में मौजूद या अइसने कौनों फ्री स्रोत से नकल कइले बानी (ढेर जानकारी खातिर
भोजपुरीपिडिया:कापीराइट सब
देखीं)।
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