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==धारना सभ आउर इतिहास लेखन== अशोक के जीवन के जानकारी फेनु से प्राप्त करे में सभ से जादे बुद्ध स्त्रोत के इस्तेमाल कईल गईल बा। पारंपरिक लेखन के आधार पऽ शुरुआती विद्वान अशोक के एगो बौद्ध सम्राट मनले बाड़न, जेकरा धर्म बदले के पड़ल रहे,आ जे बुद्ध धर्म के परचार कईले रहे। रोमिला थापर अशोक के बारे में लिखले बाड़ी की " हमनी के अशोक के दू तरह से देखे के चाहीं, पाहिला एगो राजनेता जवन एक समय में आपन साम्राज्य स्थापित कइलन, आ दूसरा एगो अइसन आदमी जे समाज के बदले खातिर आपन आचार विचार के समाज में फैलीईलें। अशोक अपना घड़ी के हर धर्म के इज्जत करत रहन। हालाकि शिलालेख से ई बात साफ पता लागेला की अशोक बुद्ध धर्म के मानत रहन। एगो शिलालेख में अशोक जानवर सभ के बली देवे वाला वैदिक अनुष्ठान के प्रतिबंधित कईले बाड़न, एकरा से ई बात साबित होखेला की ऊ वैदिक परंपरा के ना मानत रहन। ऊ बुद्ध धर्म के पवित्र जगहन पऽ आपन स्तंभ खड़ा करवईलें बाकिर बाकी सभ धर्म के पवित्र जगह पऽ स्तंभ ना बनववलन। अशोक कर्तव्यन के देखावे ला "धम्म" शब्द के इस्तेमाल कइलन,जवन एगो बौद्ध शब्द हऽ। साथे सारे ऊ बुद्ध धर्म के तीन गो उपदेशनो के परचार कइलन। अशोक के सभ शिलालेखन में अशोक के एगो निमन आ दयालु राजा देखावल गईल बा। कलिंग के शिलालेखन में अशोक अपना के आपन प्रजा के पिता कहले बाड़न आउर आपन प्रजा के आपन संतान बोलले बाड़ें।<ref>http://www.cs.colostate.edu/~malaiya/ashoka.html</ref> शिलालेखन में अशोक बुद्ध धरम के शिक्षण के लिखववले बाड़न आ अहींसा के अपनावे के कहले बाड़न, साथे साथे ऊ आपन राज के बारे मे बतवले बाड़ें । [[सारनाथ]] के अशोक स्तंभ अशोक के समय के सभ से प्रसिद्ध चीज हऽ। बलुआ पत्थर के बनल स्तंभ अशोक के सारनाथ यात्रा के बारे में बतावेला। स्तंभ के ऊपर चारो दिशा में चार गो शेर के मुह बनल बा जे अशोक के बड़हन आ बरियार राज्य के दर्शावेला। शिलालेखन से मिलल जादे तर जानकारी के इतिहासकार सही मानेलन, लेकिन ई बतावल मुश्किल बा की कुछ चीज साँचो भईल रहे की ना। अशोक के शिलालेख सभ के खोज से पहिले अशोक के बारे में ढ़ेर कहानी प्रचलित रहे जवन की ऐतिहासिक स्त्रोत पऽ आधारित ना रहे। ओह में से कुछ कहानी अशोकवदन में से बा:- १) ओह में से एगो कहानी जय नाम के एगो लईका के हऽ, एक दिन जब जय सड़क के किनारे खेलत रहे, जहा बुद्ध आ गइलन।छोटहन जय बुद्ध केभीख के कटोरा में एक मुट्ठी माटी रख के आगे चल के बहुत बड़ राजा आ बुद्ध धर्म के अनुयाई बन के वरदान मंगलस।आगे लिखल बा की बुद्ध पूरा ब्रह्माण्ड के अंजोर कऽ दिहलन आ फिर ऊ अंजोरा के आपन बाया हाथ में लेके बोललन की ई लाईका आपन अगीला जनम में बहुत बड़ राजा बनी। बुद्ध ईहो भविष्यवाणी कईलें की हेकर राजधानी पाटलिपुत्र होई। २ )अगिला कहनी में अशोक के एगो खराब आदमी देखावल गईल बा, जे बुद्ध धरम अपनवला के बाद निक आदीमी बनऽता। लिखल बा कि अशोक के शारीरिक कुरूपता के चलते [[बिन्दुसा|बिन्दुसार]] ओकरा के पसंद ना करत रहन। अशोक राजा बनल चाहत रहन एही चलते उ वारिस के जरत कोयला से भरल गड्ढा में डाल दिहलन। उ आपन खराब स्वभाव आउर खिस के चलते "भयंकर अशोक" नाम से प्रसिद्ध भईलन। कहल जाला की उ आपन सैनीकन के वफादारी के परिक्षा खातीर ले गईल रहन, आ सफल ना होला पऽ ५०० आदमी के मार दिहलन कहल जाला कि जब कुछ औरत लोग उनकर अपमान कईलस तऽ उ आपन हरम के जरा के मार दिहलन। मानल जाला कि उ लोगन के उदास देखिके आनंद उठावत रहन आउर एकरा खातिर उ एगो बड़हन आउर भयावह उत्पीड़न कक्ष बनईलन जेने उ आउर लोग के यातना देवत रहन। कहानी आगे ई बतावे ले ह कि कईसे एगो पवित्र बौद्ध भिक्षु से मिलला के बाद अशोक धार्मिक बन जा ताड़न। ३) एगो आउर कहानी मे कहल गईल बा की आपन खजाना के बौद्ध संघ उपहार देवल चालु कर देलन। मंत्री सभ के डर लागत रहे की एकरा से साम्राज्य के पतन हो जाई, ईहे चलते अशोक के मना करल गईल।फिर अशोक आपन निजी धन के उपहार मे देवे लगलन। अंत मे कुछ ना बाचल आ हुनकर शांति से निधन भईल। एह बिंदु पऽ इ ध्यान रखल ज़रूरी बा कि अशोकवदन एगो बौद्ध पाठ हऽ, जे बौद्ध धर्म मे नाया लोग जोड़े ला लिखल रहे आउर एही चलते इ सभ किंवदंतियन के इस्तेमाल कईल गईल रहे। एह तरह के ग्रंथन मे कहल गईल बा कि अशोक मूलतः आदर्श बौद्ध शासक रहन, जे प्रशंसा आउर अनुकरण दुनो के हकदार रहन। '''अशोक आउर बुद्ध के अवशेष''' बौद्ध कथा , विशेष रूप से [[महापरिनिर्वाण]], के अनुसार बुद्ध के अवशेष हुनकर मरला के बाद आठ देशों में साझा कईल गईल। अशोक अवशेष वापस लेवे के काम कईलन आउर ८४००० स्तूपन में बांट देलन। ई कहानी सांची आउर भरहुत में स्पष्ट रूप से देखाईल गईल बा।
सारांश:
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