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===अंग्रेज शासन में === अंग्रेज इलाहाबाद पर अपनी अधिकार की बाद इहाँ एगो गैरीसन के अस्थापना कइले आ इलाहाबाद के प्रमुख सैनिक केन्द्र की रूप में महत्व दिहलें। अकबर की समय में इलाहाबाद [[सूबा]] में 12 गो [[सरकार]] आ 177 [[परगना]] क इलाका आवे जेवन ब्रिटिश काल में कम हो के 5 आ 23 बचल। सन 1825 में फतेहपुर ज़िला इलाहाबद से अलग कइल गइल आ सन 1842 ई॰ से 1862 ई॰ की बीच में कई बार मिर्जापुर आ इलाहाबाद की बीछ में जिला क सीमा में बदलाव भइल। सन 1829 ई॰ में इलाहाबाद में [[कमिश्नरी]] के अस्थापना भइल आ मिस्टर [[राबर्ट बार्लो]] इलाहाबाद के पहिला कमिश्नर नियुक्त भइलें, इलाहाबाद के पहिला [[कलेक्टर]] मिस्टर [[ए. अहमुट्टी]] रहलें जिनकी नाँव पर मोहल्ला [[मुट्ठीगंज]] बसल। 1834 ई॰ में इहँवा गवर्नर के आसन आइल आ 1858 ई में ई संयुक्त प्रान्त क राजधानी बन गईल। इहंवे [[लार्ड कैनिंग]] [[महारानी क घोषणापत्र]] पढ़ी के सुनावलें आ भारत के शासन [[ईस्ट इण्डिया कंपनी]] कि हाथ से महारानी की हाथ में चलि गइल। थोड़ा समय खातिर इलाहाबाद एह समय पूरा ब्रिटिश भारत क राजधानी रहल। एक तरह से देखल जाय त शहर क वर्तमान स्वरूप अंग्रेजन की समय में बनल। मुट्ठीगंज कीडगंज कोतवाली लूकरगंज, जार्जटाउन, एलनगंज, म्योराबाद जइसन मोहल्ला एही समय बसल। वर्तमान चौक मोहल्ला अंग्रेजन की समय से पाहिले तक एगो गड़ही की रूप में रहे जेवना की आसपास कुछ सागसब्जी आ अनाज के दूकान लगे। लार्ड कैनिंग की नाँव पर सिविल स्टेशन क विकास भइल आ ओ समय ए के कैनिंग टाउन कहल जाय जेवना के वर्तमान नाँव सिविल लाइन्स बा। वर्तमान महात्मा गाँधी मार्ग के ओ समय नाँव कैनिंग रोड रहे। सन 1866 ई. में इलाहाबाद में [[इलाहाबाद हाइकोर्ट|हाइकोर्ट]] के अस्थापना भइल आ ठीक बाद में एक साल खातिर आगरा भेज दिहल गइल लेकिन फिर 1868 ई. में वापस इलाहाबाद आ गइल आ तब से इहंवे बा। सन 1887 ई. में म्योर सेन्ट्रल कालेज के [[इलाहाबाद विश्विद्यालय]] की रूप में मान्यता दिहल गइल आ ई भारत क चौथा सभसे पुरान विश्विद्यालय बनल। [[File:Gandhi Patel 1940.jpg|thumb|left| [[महात्मा गाँधी]], जनवरी 1940 में [[आनंद भवन]] में कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में; बाएँ [[विजयलक्ष्मी पंडित]] आ दाहिने [[सरदार पटेल]]]] प्रथम स्वतंत्रता संघर्ष में इलाहाबाद के महत्वपूर्ण योगदान रहे। इहँवा ग़दर के नेतृत्व [[मौलवी लियाक़त अली]] कइलें। इहाँ 6 जून 1957 के बगावत शुरू भइल आ जल्दिये बागी सिपाही आ जनता रेलवे आ टेलीग्राफ पर कब्ज़ा क लिहलें। [[दारागंज]] में नाव की पुल पर बागी लोगन क कब्ज़ा हो गइल। मौलवी साहब, जेवन स्कूल के अध्यापक रहलें खुसरू बाग़ से आपन कमान सम्भाले शुरू कइलें। लगभग एक हफ्ता बाद 12 जून के कर्नल नील के पलटन बनारस से इहँवा पहुँचल आ दारागंज क पुल पर आपन कब्जा वापस लिहलस। एकरी बाद शहर में लड़ाई भइल आ तब मौलवी साहब अपनी लोगन की साथ शहर छोड़ के बाहर से लड़ाई करे लगलन। अंग्रेज सेना शहर पर वापस कब्ज़ा कइला की बाद लोगन पर बहुत अत्याचार कइलस। समदाबाद आ रसूलपुर नाँव क दू गो गाँव त पूरा क पूरा जरा दिहल गइलन। एही गाँवन की ज़मीन पर [[कंपनी बाग|अल्फ्रेड पार्क]] के निर्माण भइल जेवना के आजकाल [[कंपनी बाग|आज़ाद पार्क]] कहल जाला। भारत की [[भारत की आजादी के लड़ाई|स्वतंत्रता संग्राम]] में इलाहाबाद क योगदान हमेशा महत्वपूर्ण मानल जाला। इहाँ [[भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस|काँग्रेस]] क चौथा अधिवेशन लार्ड वेडरबर्न की अध्यक्षता में सन 1888 ई॰ में भइल। एकरी आलावा आठवाँ आ पचीसवाँ अधिवेशन क्रम से 1892 ई॰ आ 1910 ई॰ में भइल। सन 1920 ई॰ में आल-इण्डिया-खिलाफत कांफ्रेंस इलाहाबाद में आयोजित भइल। आज़ादी की लड़ाई में इलाहाबाद के नेता लोगन क लिस्ट भी बहुत लंबा बा। ए में से प्रमुख लोग रहे पं॰ अयोध्या नाथ, सुरेन्द्र नाथ सेन, पं॰ [[मदन मोहल मालवीय]], [[मोतीलाल नेहरू]], [[पुरुषोत्तम दास टंडन]], सी॰ वाई॰ चिंतामणि, हृदय नाथ कुंजरू, तेजबहादुर सप्रू, [[जवाहरलाल नेहरू]] इत्यादि। सुन्दरलाल आ मनाज़िर अली सोख्ता क्रांतिकारी दल क सदस्य रहे लोग। महान क्रन्तिकारी [[चंद्रशेखर आजाद]] इहँवे अल्फ्रेड पार्क में शहीद भइलें आ उनकी नाँव पर अब ए पार्क के [[कंपनी बाग|चंद्रशेखर आजाद पार्क]] कहल जाला।
सारांश:
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