Jump to content
Main menu
Main menu
move to sidebar
लुकवाईं
नेविगेशन
मुख्य पन्ना
हाल के बदलाव
अट्रेंडम पन्ना
मीडियाविकि के बारे में मदद
भोजपुरीपिडिया
खोज
खोजीं
Appearance
खाता बनाईं
खाता में प्रवेश
निजी औजार
खाता बनाईं
खाता में प्रवेश
Pages for logged out editors
learn more
योगदान
बातचीत
छठ
(खंड) के संपादन कइल जात बा
पन्ना
बातचीत
भोजपुरी
पढ़ीं
संपादन करीं
स्रोत संपादित करीं
इतिहास देखीं
औजार
औजार
move to sidebar
लुकवाईं
Actions
पढ़ीं
संपादन करीं
स्रोत संपादित करीं
इतिहास देखीं
जनरल
इहाँ का जुड़ल बा
संबंधित बदलाव
खास पन्ना
पन्ना से जुड़ल जानकारी
Appearance
move to sidebar
लुकवाईं
चेतावनी:
रउआँ आपन खाता में प्रवेश नइखीं कइले। अगर रउआँ कौनों बदलाव करब त राउर आईपी पता सभके लउकी। अगर रउआ
खाता में प्रवेश करब
या
नया खाता बनाइब
तब, अउरी सुबिधा सब की संघे राउर संपादन के श्रेय भी राउर प्रयोगकर्तानाँव के मिली!
स्पैम-बिरोधी रोक (Anti-spam check) एके
मत
भरीं!
==मनावे के तरीका== [[चित्र:Devotee with Offering - Chhath Puja Ceremony - Ramkrishnapur Ghat - Howrah 2013-11-09 4124.JPG|210px|thumb|सूपा में परसाद लिहले पानी में खड़ा एगो ब्रती]] मुख्य रूप से ई सुरुज के पूजा हवे, हालाँकि, एह में जेवना देवी के पूजा कइल जाला उनका के ''छठि मइया'' कहल जाला। एक साथ, सुरुज के अरघा दिहल आ छठी मइया के पूजा के तइयारी [[दिपावली]] के बादे से सुरू हो जाले। दिवाली कातिक के अमौसा के मनावल जाले, एकरे अगिला दिने गोधना कुटाला आ ओहू के अगिला दिने भाई दुइज मनावल जाले। एकरे बाद छठ के तइयारी हो जाला। दू दिन बाद चउथ के तिथि से कार्यक्रम के सुरुआत होला आ अंतिम अरघा सत्तिमी के दिहल जाला। एह चारो दिन के बिबरन नीचे दिहल जात बा: ===''नहाय खाय''=== कातिक सुदी चउथ के छठ पूजा के तइयारी के रूप में ''नहाय खाय'' से सुरुआत होले। एकरा के ''अरवा-अरवइन'' भी कहल जाला। घर के नीक से साफ-सफाई कइल जाला आ एह दिन अइसन सगरी मेहरारू लो जिनके बरत भुक्खे के होला, जे लोग ब्रती कहालीं, कौनों पबित्र जलस्थान, नदी-पोखरा इत्यादि में नहान करे लीं। नहान के बाद साफ-सुथरा तरीका से भोजन तइयार कइल जाला। एह दिन मेहरारू लोग एक्के बेरा भोजन करे ला। एह भोजन में लउकी के खास महत्त्व बतावल जाला।<ref>{{cite web|author=आभा सेन url=https://www.patrika.com/news/jabalpur/start-worship-of-the-chhath-maiya-5624/ |title=छठ पूजा : लौकी की सब्जी ग्रहण कर शुरू किया व्रत|publisher=Patrika.com |date=2015-11-16 |accessdate=2017-10-15}}</ref> अरवा चाउर के भात आ लउकी के तरकारी खा के ब्रत के सुरुआत कइल जाला।<ref name="bhaskar1">{{cite web|author=ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट |url=https://www.bhaskar.com/news/JHA-JAMS-chhath-celebration-in-jamshedpur-4786960-PHO.html |title=छठ सेलिव्रेशन इन जमशेदपुर |publisher=Bhaskar.com |date=2014-10-27 |accessdate=2017-10-15}}</ref> ===''खरना''=== ''अरवा-अरवइन'' के अगिला दिने, मने कि पंचिमी के, एक दिन दिन भर के बरत भुक्खल जाला। ई एक तरह से मुख्य बरत से पहिले के तइयारी होला आ एही से एकरा के खरना कहल जाला। ''खर कइल'' के अरथ होला तपावल भा शुद्ध कइल। एह दिन भर के बरत के बाद साँझ के बेरा रोटी के साथे खीर भा बखीर बनावल जाले जेकरा के खरना के परसाद कहल जाला। इहे परसाद खा के मुख्य बरत सुरू होला। ===''पहिला अरघ''=== [[चित्र:Preparation - Chhath Puja Ceremony - Baja Kadamtala Ghat - Kolkata 2013-11-09 4242.JPG|160px|thumb|left|पानी में ऊखि गाड़ के पूजा के तइयारी]] [[चित्र:Chhath in Ranipokhari 03.jpg|210px|thumb|right|छठ पूजा के पहिला अरघ के समय जगमग घाट]] [[चित्र:Offerings - Chhath Puja Ceremony - Baja Kadamtala Ghat - Kolkata 2013-11-09 4315.JPG|210px|thumb|सुपेली में रखल परसाद जेह में [[ठेकुआ]] के बिसेस महत्व होला]] ''खरना'' के बाद के रात, आ छठईं तिथी के पूरा दिन आ रात बरत के रात होले। एही छठ तिथी के साँझ बेर नदी, पोखरा के किनारे घाट पर जाइल जाला। घाट पर जा के पूजा के पहिले घरे परसाद बनावल जाला। छठ के परसाद में [[ठेकुआ]] बनावल जाला जे गोहूँ के आटा में मीठा डारि के अ घीव के मोएन दे के दूध में सानल जाला आ सुद्ध घीव में छानल जाला। उत्तरी बिहार में एकरा के खासतौर पर माटी के साफ चूल्हा पर बनावल जाला आ साफ लकड़ी के इस्तेमाल कइल जाला।<ref>{{cite web|url=http://www.festivalsofindia.in/chhatpuja/Chhathpuja-rituals-Hindi.aspx |title=छठपूजा के रसà¥?म रिवाज, छठपूजा नियम, छठपूजा परंपरा |publisher=Festivalsofindia.in |date=2017-08-09 |accessdate=2017-10-15}}</ref> बाकी परसाद में कम से कम तीन किसिम के [[फल]] रहे ला। फल सभ में सिंघाड़ा, गंजी, केला, अनन्नास, गागल नींबू, नरियर, आ मुरई इत्यादि सामिल रहे ला।<ref name="bhaskar1"/><ref>{{cite web|url=https://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/gurgaon/chhath-puja-special-importance-of-vegetables-in/articleshow/25336452.cms |title=Chhath Puja special importance of vegetables in|छठ पूजन में सब्जियों का विशेष महत्व - Navbharat Times |language=en |publisher=Navbharattimes.indiatimes.com |date= |accessdate=2017-10-15}}</ref> घाट पर पहिले से घर के सवाँग लोग सफाई क के माटी के बेदी बनवले रहे ला लोग। घर से दउरा में सगरी परसाद सामग्री सजा के ले जाइल जाला जहाँ दिया-अगरबत्ती बार के परसाद के सूप में सजा के पूजा कइल जाला आ छठ मइया के गीत गावल जाला। एकरे बाद सुरुज के डूबे से पहिले मेहरारू लोग लगभग कर्हियाइ भर से ऊपर पानी में खड़ा हो के सुरुज भगवान के पूजा करे ला। कुछ जगह, जहाँ छठ मइया के साड़ी चढ़ावे के बिधान भी होला, पानी में पाँच गो ऊखि गाड़ल जालीं जिनहन के पतई आपसे में बान्हल रहे ला आ ओही में साड़ी के सजा के ओकरा पाछे से सुरुज के पूजा कइल जाला। पूजा के बाद सुरुज भगवान के अरघा दिहल जाला। अर्घ में पानी में कई तरह के सुगंधित सामग्री मिला के तामा भा पीतर के लोटा में ले के दुनों हाथ से टिकासन से ऊपर उठा के सुरुज के सोझा धार के रूप में गिरावल जाला जेवना से ओह धार से हो के सुरुज के रोशनी चढ़ावे वाला के देह पर परे। पहिला अर्घा के बाद घाट से सगरी चीज बटोर के घरे आ जाला। कुछ लोग जे संतान खाती मनौती मनले रहे ला एह रात के अँगना में एक तरह के पूजा करे ला जेकरा कोसी भा कोसिया भरल कहल जाला। ''कोसिया'' माटी के एगो खास तरह के बर्तन होला जे कोहा के आकार के होला आ एकरा बरि पर दिया बनल रहे लें। एही में चढ़ावा के सामग्री भर के आ दिया सभ के बार के गीति गावल जाला। ===''दुसरा अरघ''=== छठ तिथी के अगिला दिने, सत्तिमी के भोरे में लोग घाट पर दोबारा चहुँप जाला आ ओही घाट आ बेदी पर फिर से सारा पूजा के सामग्री सजावल जाले। पानी में खड़ा हो के ब्रती लोग सुरुज उगे के इंतजारी करे ला आ उगत सुरुज के भोर के ''दुसरा अरघा'' दियाला। एकरे बाद घरे लवट के परसाद खा के बरत टूटे ला आ पारन कइल जाला।
सारांश:
ई नोट कर लीं कि भोजपुरीपिडिया पर सगरी योगदान के दुसरा योगदानकर्ता लोगन द्वारा संपादित कइल जा सकेला, बदलल या हटावल जा सकेला। अगर आप ई नइखीं चाहत की राउर लिखल चीज के केहू भी बे-मोहछोह के संपादित क दे, तब ए के इहाँ मत डालीं।
रउआँ इहो वादा करत बानी की आप ई खुद लिखले बानी या फिर पब्लिक पहुँच में मौजूद या अइसने कौनों फ्री स्रोत से नकल कइले बानी (ढेर जानकारी खातिर
भोजपुरीपिडिया:कापीराइट सब
देखीं)।
बिना परमीशन के कॉपीराइट वाली चीज इहाँ कब्बो मत डालीं!
कैंसिल
संपादन में मदद
(नया विंडो में खोलीं)