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===मंत्री सभ=== रजावली कथा कहेला जे चन्द्रगुप्त के प्रधानमंत्री [[चाणक्य]] हुनकरा बिंदुसार के गद्दी प बइठावे के सलाह दिहलन।<ref name="BLRice_1889">{{cite book |url=https://books.google.com/books?id=EMUUAAAAYAAJ&pg=PA9 |title=Epigraphia Carnatica, Volume II: Inscriptions and Sravana Belgola |author=[[B. Lewis Rice]] |publisher=Mysore Government Central Press |location=[[Bangalore]] |year=1889 |page=9 }}</ref> परिशिष्ठपर्वन कहेला जे चाणक्य बिंदुसारो के प्रधानमंत्री रहलन। एहमे एगो खिसा बा जेकरा मे लिखल बा जे चाणक्य एगो सुबंधू नांव के बेकत के मंत्री बनावे के सलाह दिहलन। बाकिर सुबंधू से जरत रहन आ हुनकरा ले बड़ मंत्री बनल चाहत रहन एहिसे ऊ बिंदुसार से कहलन जे चाणक्य हुनकर माई के पेट चिर देले रहन। एह बिंदुसार दोसर लोग के एह बात के पतियावत देखलन तऽ ऊ चाणक्य से नफरत करे लगलन। चाणक्य जवन की पहिलहीं बुढ़ा गइल रहन सभ छोड़ि के संथारा ले लिहलन। बादी मे जहिया बिंदुसार के आपन जनम के सांच पता लागल तऽ ऊ चाणक्य भीरी फेनु से मंत्री बने के निहोरा कइलन। जब चाणक्य एह बात के ना सकरलन तऽ बिंदुसार सुबंधू के चाणक्य मनावे ला कहलन। चाणक्य के मनावे के जगहा प सुबंधू हुनकरा जरा के मुआ देताड़न। बादि मे चाणक्य सरपला के चलते सुबंधू ओ के सभ छोड़ के भिक्खु बने पड़ि जाता।<ref name="Rosalind_1993"/><ref name="HJ_1891">{{cite book |url=https://books.google.com/books?id=iSFCAQAAMAAJ&pg=PA62 |title=Sthavir̂aval̂i charita, or, Pariśishtaparvan |author=Hemachandra |translator=Hermann Jacobi |publisher=Asiatic Society |location=Calcutta |year=1891 |pages=67–68 }}</ref> असोकवदन कहेला जे बिंदुसार पान सए गो मंत्री रहऽसन जेमे से खल्लतक आ रधागुप्त असोक के बिंदुसार के मूअला प सम्राट बने मे सहायता कइले रहऽसन।<ref name="EB_legends"/>
सारांश:
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भोजपुरीपिडिया:कापीराइट सब
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