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[[चित्र:Tilka Majhi.jpg|230px|thumb|झारखंड के दुमका में तिलका माँझी के मुरती]] '''तिलका माँझी''' भा '''जबरा पहड़िया''' एगो आदिवासी बिद्रोही रहलें जे 1784 के आसपास के समय में, [[मंगल पांडे]] से लगभग 100 बरिस पहिले, [[ब्रिटिश राज]] के खिलाफ बिद्रोह कइलें। ई तत्कालीन संथाल परगना के आसपास के इलाका में, आदिवासी लोग के एकट्ठा क के हथियारबंद मंडली बना के अंगरेजी हकूमत के खिलाफ बगावत कइलें आ अंगरेज लोग आ उनके संसाधन पर हमला कइलें। एह लड़ाई में ऊ अंगरेज कमिश्नर ऑगस्टस क्लीवलैंड के तीर से मार के गिरा देहले रहलें।<ref name="AnuśabdaGoyala2017">{{cite book|author1=Anuśabda|author2=Cāru Goyala|author3=Nanditā Datta (Editor)|title=Lok Aur Shastra : Janjatiya Sahitya|url=https://books.google.com/books?id=mtKpDgAAQBAJ&pg=PA25|year=2017|publisher=Vani Prakashan|isbn=978-93-5229-379-7|pages=25–}}</ref> एकरे बाद अंगरेजी हकूमत बरियार फोर्स ले के आदिवासी लोग पर हमला कइल जेह में तिलका माँझी के गिरफ्तार कइल गइल आ भागलपुर में इनके बरगद के एगो फेड़ा से लटका दिहल गइल।<ref name="Rajesh" /> भारत आजादी के बाद ओह जगह के आज तिलका माँझी चौक के नाँव से जानल जाला।<ref name="Rajesh">{{cite book|author=K. Guru Rajesh|title=Sarfarosh: A Naadi Exposition of the Lives of Indian Revolutionaries|url=https://books.google.com/books?id=c_dLCgAAQBAJ&pg=PT46|publisher=Notion Press|isbn=978-93-5206-173-0|pages=46–}}</ref> वर्तमान में इनका नाँव पर [[तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय|भागलपुर इन्वर्सिटी]] के नाँव रखल भी गइल बा। लेखिका महाश्वेता देवी, इनके जिनगी पर आधारित एगो उपन्यास ''शालगिरर डाके'' बंगाली भाषा में लिखले बाड़ी। {{clear}} ==संदर्भ== {{Reflist}} [[श्रेणी:बिहार के लोग]] [[श्रेणी:झारखंड के लोग]] {{bio-stub}}
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