वसुधैव कुटुंबकम

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वसुधैव कुटुंबकम (टेम्पलेट:Lang-sa) संस्कृत में रचल महा उपनिषद के एगो श्लोक के आखिरी टुकड़ा हवे जेकर माने होला - "पूरा धरतिये एगो परिवार हऽ"। एह वाक्य के अक्सरहा इस्तेमाल देखे के मिले ला आ ई भारतीय संस्कृति के ब्यापक दृष्टिकोण के सबूत के रूप में कोट कइल जाला। बाद के ग्रंथ सभ में भी एह वाक्य भा एह अरथ के इस्तेमाल मिले ला।

स्रोत संपादन करीं

महा उपनिषद (महोपनिषद) में ई श्लोक आइल हवे।

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संदर्भ संपादन करीं

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