प्लास्टिक प्रदूषण, पर्यावरण में प्लास्टिक के प्रवेश आ एकरा से जियाजंतु, इनहन के प्राकृतिक आवास आ मनुष्य पर पड़े वाला खराब परभाव हवे।[][] जवन पलास्टिक प्रदूषक के रूप में काम करे लें उनहना के साइज के आधार पर तीन कटेगरी में बाँटल जाला: माइक्रो-, मेसो-, आ मैक्रो- कचड़ा; मने कि बहुत छोट साइज के, माझिल साइज के आ बड़हन साइज के कचड़ा।[] प्लास्टिक सस्ता होखे ला आ बहुत दिन ले चले ला, एकर इस्तेमाल बहुत बिबिध प्रकार से कइल जा सके ला; इहे कारन बा कि आदमी द्वारा पलास्टिक के इस्तेमाल बहुत भारी मात्रा में पूरा दुनिया में हो रहल बा।[] दूसर बात ई कि, जादेतर प्लास्टिक सभ के रचना अइसन होला कि ऊ प्राकृतिक तरीका से टूट के आसान तत्व में बदल जाए के बिबिध प्रक्रिया सभ के प्रति रोधक (रेजिस्टेंट) होखे लें। परिणाम ई कि इनहन के प्राकृतिक बिघटन बहुत धीरे होला।[] ई दुनों कारण मिल के प्लास्टिक के पर्यावरण खातिर प्रदूषक चीज बानवे में योगदान करे लें आ ई एगो घातक प्रदूषक बन गइल बा।

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भारत में एक ठो बीच (समुंदरी किनारा) पर पलास्टिक के कचरा।
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घाना में प्लास्टिक कचरा।

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संदर्भ संपादन करीं

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टेम्पलेट:प्रदूषण