राग भैरव
टेम्पलेट:Infobox raga राग भैरव हिंदुस्तानी संगीत के एगो प्रमुख राग हवे। ई भैरव ठाट के राग हऽ आ एह ठाट के आश्रय राग हवे। एह में भैरव ठाट के सातो सुर सभ के इस्तेमाल होला आ एह तरीका से ई संपूर्ण-संपूर्ण जाति के राग हवे।
ई राग सबेरे-सबेरे, भोर में गावल बजावल जाला। राग में कोमल रिषभ (रे॒) आ कोमल धैवत (ध॒) के इस्तेमाल होला आ ई गम्हीर किसिम के राग हवे। एह राग के गावे-बजावे में सुर सभ के चलन में आंदोलन के इस्तेमाल होला जे एह राग के एगो खास पहिचान हवे।
संगीत सीखे सिखावे में ई एगो शुरुआती राग हवे।
बिबरन संपादन करीं
- आरोह
सा, रे॒, ग, म, प, ध॒, नि, सां
- अवरोह
सां, नी, ध॒, प, म, ग, रे॒, सा
- पकड़
ग म ध॒ ध॒ प, ग म रे॒ रे॒ सा
चलन:
सा ग म प ध ध प, म ग म रे सा
ध॒ एकर वादी सुर हवे आ रे॒ संवादी स्वर हऽ।