संगीत

ImportMaster (बातचीत | योगदान) (robot: Import pages using विशेष:आयात) के द्वारा २२:०९, २४ अप्रैल २०२२ के बदलाव
(अंतर) ← पुरान बदलाव | हाल के संसोधन (अंतर) | नया बदलाव → (अंतर)

संगीत एक तरह का कला हवे जेवन सुने में नीक लागे वाली आवाज की उतार-चढ़ाव आ विराम की माध्यम से सुनेवाला की मन में आनंद पैदा करे ला। मनुष्य अपनी कंठ से संगीतमय आवाज निकाल सकेला, तरह तरह की बाजा के बजा के संगीत पैदा क सकेला आ एही सुर ताल की लहरी पर आपन अंग हिलाडुला के नाच भी सकेला। एही से गावल, बजावल, आ नाचल तीनों चीजु के संगीत कहल जाला।

एकर दू गो बिभाजन कइल जाला शास्त्रीय संगीतसुगम संगीतलोक संगीत, जेवन आम गँवई जनता क संगीत हवे ओके कुछ लोग सुगम संगीत क हिस्सा मानेला आ कुच्छ लोग अलगे एगो परकार की रूप में मानेला।

अलग-अलग जगह की लोकगीत आ लोकसंगीत में ओ जगह की संस्कृति क बिसेसता झलकेला।

इतिहास संपादन करीं

भारत में संगीत क उत्पत्ति साक्षात् भगवान शंकर जी से भइल मानल जाला।

भोजपुरी लोकगीत संपादन करीं

टेम्पलेट:मुख्य

टेम्पलेट:कला-आधार