भारत में इलेक्ट्रानिक वोटिंग
बैलट मशीन (बायें), कंट्रोल मशीन (दाहिने)
इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन ("ईवीएम") के इस्तमाल भारतीय चुनावन में साल 1999 में सुरू भइल आ हाल में 2017 में भइल पाँच ठो राज्यन में भी राज्य बिधान सभा के चुनाव में एकर इस्तमाल भइल हवे। वर्तमान समय में कागज के चुनाव परचा (बैलेट पेपर) के राष्ट्रीय आ राज्य स्तर के चुनावन में ई मशीन पूरा तौर पर खतम क दिहले बा। पहिले भी एकरा इस्तमाल में छेड़छाड़ द्वारा चुनाव परिणाम परभावित होखे के आरोप लगावल जा चुकल बाटे आ अभिन ले कौनों अइसन आरोप साबित न इखे भइल।[१][२] दिल्ली हाईकोर्ट आ सुप्रीम कोर्ट के रूलिंग आ कई राजनीतिक पार्टी सभ के डिमांड पर,भारतीय चुनाव योग द्वारा वोटर-वेरीफाईड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) शुरू कइल गइल वीवीपीएटी के ब्यवस्था साल 2014 के आम चुनावन में 543 संसदीय चुनाव क्षेत्र सभ में से 8 गो में पाइलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू कइल गइल रहे।[३]
हाल में भइल राज्य स्तर के चुनावन में दोबारा एह मशीन पर सवाल खड़ा कइल गइल आ मशीन के हैकिंग के आरोप लगावल गइल, एकरा चलते चुनाव आयोग 3 जून 2017 से चैलेन्ज के रूप में हैकथाॅन आयोजित करवावे के घोषणा कइले बाटे[४][५] आ एकरे जबाब में आम आदमी पार्टी भी।[६]