Jump to content

खंध

भोजपुरीपिडिया से
ImportMaster (बातचीत | योगदान) के द्वारा ०३:४५, १४ अप्रैल २०२२ के बदलाव
(अंतर) ← पुरान बदलाव | हाल के संसोधन (अंतर) | नया बदलाव → (अंतर)

टेम्पलेट:Buddhist term टेम्पलेट:Buddhism बौद्ध दर्शन में पाँच गो स्कंध या खंध (संस्कृत:स्कन्ध) मानल गइल बाड़ें जिनसे अनुभव करे वाली सत्ता या ब्यवहार में जवना के जीवात्मा कहि दिहल जाला, के रचना मानल गइल बाटे। ई पाँच गो स्कंध - रूप, वेदना, संज्ञा, संस्कार आ विज्ञान हवें। इनहने के क्षणिक संघात (एकट्ठा भइले) के पुद्गल या आत्मा कहल जाला।टेम्पलेट:Sfnटेम्पलेट:Refnटेम्पलेट:Refn

पाँच स्कंध, हीनयान के प्रमुख सिद्धांत क्षणभंगवाद के दू गो रूप "संतानवाद" आ "संघातवाद" में से संघातवाद के अंतर्गत आवेलें। संघात के मतलब होला एकट्ठा भइल (aggregate)। क्षणभंगवाद ई कहे ला कि चेतना से युक्त ना त आत्मा बा न भौतिक पदार्थ। ना त कौनों आत्मा या पुद्गल नाम के चेतन द्रव्य बाटे न कौनों भौतिक पदार्थ। सत् खाली क्षणिक धर्म हवे, क्षणिक विज्ञान आ क्षणिक परमाणु के प्रवाह हो रहेला। संघातवादके अनुसार ई आपस में मिल के एकट्ठा हो के पाँच परकार के खंध बनावे लें आ ई पांचो खंध एकट्ठा होके महसूस करे वाला सत्ता (आत्मा या पुद्गल) हवे।टेम्पलेट:Sfn

टेम्पलेट:Clear

टिप्पणी[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

टेम्पलेट:Reflist

संदर्भ[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

टेम्पलेट:Reflist

स्रोत[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

टेम्पलेट:Refbegin

टेम्पलेट:Refend

टेम्पलेट:बौद्ध धर्म बिसय

टेम्पलेट:बौद्ध-आधार