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==जिनगी== ===समय=== कालिदास इतिहास के कवना काल में रहलें एह बारे में बिद्वान लोग आपस में एकमत नइखे। सभसे पहिले अगर ई देखल जाय कि सभसे पुरान समय आ सभसे नया समय, मने कि समय के अवधि के सीमा का बा। इनके लिखल नाटक ''मालविकाग्निमित्रम्'' से सभसे पुराना सीमा तय होखे में मदद मिले ला। एह नाटक में मुख्य किरदार शुंग बंस के राजा अग्निमित्र बाड़ें, बतावल जाला कि अग्निमित्र, [[मौर्य साम्राज्य|मौर्यबंस]] के बिनास क के शुंग बंस के अस्थापना करे वाला राजा पुष्यमित्र शुंग के बेटा रहलें आ पुष्यमित्र के शासनकाल 158 ई॰पू॰ में शुरू भइल रहल जबकि अग्निमित्र के काल 150 ई॰पू॰ मानल जाला। एह तरीका से कालिदास जब अगर एह राजा के बरनन अपना नायक के रूप में करे लें तब कालिदास इनसे पहिले के ना हो सके लें, मने कि कालिदास 150 ई॰पू॰ से पहिले ना भइल होखिहें। एकरा बाद, सभसे बाद के सीमा के बारे में खोज क के ई बतावल गइल बा कि कालीदास [[बाणभट्ट]] के पहिले भइल होखिहें काहें से कि बाणभट्ट इनके अपना काब्य ''हर्षचरितम्'' में बड़ा आदर से इयाद कइले बाने आ इनके सूक्ति के तारीफ कइले बाने।{{efn|निर्गतासु न वा कस्य कालिदासस्य सूक्तिषु।<br/>प्रीतिर्मधुरसान्द्रासु मंजरीष्विव जायते।। (हर्षचरित 1/16)<ref name="Pant2001">{{cite book|author=मोहनदेव पन्त |title=हर्षचरितम् (खंड 1) 1-4 उच्छ्वास |url=https://books.google.com/books?id=Hl6I7q_zGTgC&pg=PT46|year=2001|publisher=मोतीलाल बनारसीदास |isbn=978-81-208-2615-1|pages=46–}}</ref>}} बाण खुद सम्राट हर्ष के सभा में कवी रहलें आ हर्ष के काल 606 ई से शुरू मानल जाला, मने कि कालिदास एकरे पहिलहीं भइल होखिहें। दूसर परमान कर्नाटक राज्य के एहोल-शिलालेख से मिले ला जेकरा में जैन कबी रविकीर्ति अपना के कालिदास आ [[भारवि]] के समान यशस्वी कहले बाड़ें।{{efn|येनायोजि नवेऽश्मस्थिरमर्थविधौ विवेकिना जिनवेश्म।<br/>स विजयतां रविकीर्तिः कविताश्रितकालिदासभारविकीर्तिः।।<ref>{{cite book|title=Abhijñāśakuntalam, etc. (Kalidasa's Abhijnana Sakuntalam. Edited with an introduction, glossary, English and Bengali translations, various readings,&&&[sic] and the commentary Sarali by Pandit Nabin Chandra Vidyaratna ... New edition.).|url=https://books.google.com/books?id=sGNpAAAAcAAJ&pg=PR2|year=1822|pages=2–}}</ref>}} एहू से परमान के बल मिले ला काहें कि एहोल-शिलालेख 634 ई बतावल जाला।{{sfn|गौरीनाथ शास्त्री|1987|p=80}} एह समय के एगो अन्य परमान के आधार पर अउरी पाछे खसकावल जा सके ला, काहें कि मंदसौर अभिलेख पर कालिदास के लेखन शैली के परभाव निर्बिबाद रूप से स्वीकार कइल जाला आ ई अभिलेख 473 ई॰ के हवे।{{sfn|राम गोपाल|1984|p=8}} ===जनमअस्थान=== कालिदास मूल रूप से कहाँ के रहलें एकरे बारे में तीन गो प्रमुख मत बा, [[हिमालय]] के क्षेत्र के रहलें, [[उज्जैन]] के रहलें या [[कलिंग]] के रहलें। एह तीनों मत के कारण के रूप में कुमारसंभवम् में हिमालय के बेहतरीन बर्णन, मेघदूतम् में उज्जैन के खातिर उनके खास लगाव, आ रघुवंशम् काव्य में कलिंग के राजा के बारे में बहुत तारीफ़ भरल बिबरन के गिनावल जाला।
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