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==इतिहास== ===नाँव=== गोरखपुर जिला के नाँव एही नाँव के शहर के अधार पर पड़ल हवे जे एह जिला के मुख्यालय हवे। खुद [[गोरखपुर]] शहर के नाँव एगो संत [[गोरखनाथ|बाबा गोरखनाथ]] के नाँव पर धराइल हऽ जे नाथ संप्रदाय के सभसे प्रमुख संत रहलें। गोरखपुर शहर में बाबा गोरखनाथ के मंदिर आ मठ बाटे आ ई एह शहर आ जिला के खास पहिचान भी हवे। गोरखनाथ के संस्कृत नाँव ''गोरक्षनाथ'' रहे जेकर देसी भाषा में रूप बदल के गोरखनाथ भ गइल। कथा के मोताबिक ई नाथ संप्रदाय के पहिला संस्थापक मछेंदरनाथ (संस्कृत: मत्स्येन्द्रनाथ) के चेला रहलें। एह इलाका में अउरियो कई गो अइसन मठ आ समाधी अस्थापित बाड़ें जे एह नाथ संप्रदाय से जुड़ल हवें। ===प्रशासनिक इतिहास=== आधुनिक काल में, सन 1801 में [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी]] द्वारा एह इलाका के अधिकार अवध के नबाब से हासिल कइल गइल आ गोरखपुर जिला के अस्थापना भइल। एह नाया बनल जिला के पहिला कलेक्टर मिस्टर रूल्टेज बनलें।<ref>{{cite web|url=http://gorakhpur.nic.in/history.htm |title=History |publisher=Gorakhpur.nic.in |date= |accessdate=2018-05-06}}</ref> साल 1829 में गोरखपुर शहर के नाया बनल कमिश्नरी, अब इनहन के मंडल कहल जाला, के मुख्यालय बनावल गइल आ एकर नाँव गोरखपुर कमिश्नरी रखाइल। ओह समय एह कमिश्नरी में तत्कालीन गोरखपुर जिला (वर्तमान में ई इलाका कई जिला में बिभाजित भ गइल बा: बस्ती, महाराजगंज, देवरिया आ कुशीनगर जिला पहिले सभ एकही में रहलें), तत्कालीन आजमगढ़ जिला (वर्तमान में आजमगढ़ आ मऊ) आ गाजीपुर जिला (वर्तमान में गाजीपुर आ बलियाँ) सामिल रहलें। साल 1865 में गोरखपुर जिला के पहिला बिभाजन भइल आ बस्ती नाया जिला बनल। बाकी बचल गोरखपुर जिला से 1946 में देवरिया (वर्तमान [[देवरिया जिला]] आ [[कुशीनगर जिला]]) आ 1989 में [[महाराजगंज जिला]] बनलें।
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