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== रचना == जायसी भक्तिकाल क पहिला कवी बाड़ैं जे कि अपना के कवी मानल जाए खातिर लिखले बाड़ैं। जायसी क रूप रंग भलै नीक ना रहै बाकी उनकर रचना उनके जस के जोग रहै। अवधी भाषा क महाकाव्य [[पदमावत]] के सुरुए में कहले बाड़ैं कि ''मुहमद कवि जो प्रेम का ना तन रकत न मांसु। जेइँ मुख देखा तेइँ हँसा सुना तो आए आँसु॥1|23॥''<ref>{{cite book|last1=जायसी|first1=मलिक मुहम्मद|title=पदमावत|publisher=लोकभारती प्रकाशन|isbn=9788180319109|page=23|edition=2010}}</ref> उनकरे 21 के रचना क उल्लेख मिलै ला जेहमें [[पदमावच]], अखरावट, आख़िरी कलाम, कहरनामा, चित्ररेखा वगैरह परमुख बा। हालांकि उनकरे परसिध भइले क आधार पदमावतै के मानल जाला।<ref>{{cite web|url=http://www.bbc.com/hindi/india-42080687|title=कहाँ से आई थीं पद्मावती?}}</ref> एहमें पदमिनी के परेम-कथा क रोचक वर्णन भयल ह।<ref>{{cite web|url=https://scroll.in/article/858619/history-lesson-padmavati-was-driven-to-immolation-by-a-rajput-prince-not-ala-ud-din-khalji|title=‘Padmavat’ reminds us that a major casualty of the gory Rajput conflicts were Rajput women}}</ref> एही महाकाव्य में रतनसेन क पहली पतनी नागमती के वियोग क अनूठा वर्णन हव।<ref>{{cite web|url=http://indiatoday.intoday.in/story/padmavati-karni-sena-malik-muhammad-jayasi-sanjay-bhansali/1/1095409.html|title=Absurdity of epic proportions: Are people aware of the content in Jayasi's Padmavat?}}</ref> इनकर भाषा [[अवधी]] हव आऊर इनकरे रचना-शैली पर आदिकाल के [[जैन]] कवियन क दोहा [[चौपाई]] पद्धति क प्रभाव पड़ल रहल। [[आचार्य रामचंद्र शुक्ल]] ने मध्यकालीन कवियों की गिनती में जायसी को एक प्रमुख कवि के रूप में स्थान दिया है। शिवकुमार मिश्र के अनुसार ''शुक्ल जी की दृष्टि जब जायसी की कवि प्रतिभा की ओर गई और उन्होंने जायसी ग्रंथावली का संपादन करते हुए उन्हें प्रथम श्रेणी के कवि के रूप में पहचाना, उसके पहले जायसी को इस रूप में नहीं देखा और सराहा गया था।''<ref>शिवकुमार मिश्र, भक्तिआन्दोलन और भक्ति काव्य, पृ.86</ref> इसके अनुसार यह स्वाभाविक ही लगता है कि जायसी की काव्य प्रतिभा इन्हें मध्यकाल के दिग्गज कवि [[गोस्वामी तुलसीदास]] के स्तर कि लगती है। इसी कारण से उन्हें तुलसी के समक्ष जायसी से बड़ा कवि नहीं दिखा। शुक्ल जी के अनुसार ''जायसी का क्षेत्र तुलसी की अपेक्षा परिमित है, पर प्रेमवेदना अत्यंत गूढ़ है।''<ref>भूमिका, त्रिवेणी, [[आचार्य रामचंद्र शुक्ल]], सं.कृष्णानद, पृ.9</ref><ref>{{cite web |url=http://vle.du.ac.in/mod/book/print.php?id=10043&chapterid=16560 |title= सूफी कवि : मलिक मुहम्मद जायसी : एक परिचय |accessmonthday= |accessdate= 2 अगस्त 2017|last= |first= |authorlink= |coauthors= |date= |year= |month= |format= पीएचपी |work= वर्चुअल लर्निंग प्रोग्राम|publisher= [[दिल्ली विश्वविद्यालय]]|pages= |language= |archiveurl= |archivedate= |quote= }}</ref>
सारांश:
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