बसंत पंचिमी
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बसंत पंचिमी (टेम्पलेट:Lang-sa) एक ठो हिंदू तिहुआर हवे। बसंत ऋतु के अगवानी करे खातिर ई तिहुआर हिंदू कैलेंडर के हिसाब से माघ के महीना में पंचिमी तिथी के मनावल जाला।[१] अंगरेजी कैलेंडर के हिसाब से ई जनवरी या फरवरी के महीना में पड़े ला।
भारत, नेपाल आ अन्य जगह रहे वाला हिंदू लोग द्वारा ई तिहुआर क्षेत्र अनुसार अलग-अलग रूप में मनावल जाला।[२] ज्यादातर जगह एह दिन ज्ञान आ संगीत के देवी सरस्वती के पूजा कइल जाले।[३] परंपरागत रूप से कामदेव के पूजा भी एह दिन मनावल जाले[४][५][६] आ कामसूत्र में बर्णित "सुवसंतक" भा "वसंतावतार" नाँव के तिहुआर के एही वसंत पंचिमी के रूप में चिन्हित कइल जाला।[७] वसंत पंचिमी के एक तरीका से ई हिंदू लोग के वैलेंटाइन डे के रूप में देखल जाला।[८] भोजपुरी क्षेत्र में एही दिन सम्मत गाड़ल जाला जेकरा के लगभग चालिस दिन के बाद, होली के एक दिन पहिले के रात खा, जरावल जाला आ एकरा के सम्मत फूँकल कहल जाला। सम्मत गड़ा जाये के दिन से फगुआ के सुरुआत मानल जाला आ भोजपुरी क्षेत्र में फगुआ गवाये सुरू हो जाला।[९][१०]
एकरे अलावा सूफ़ी मत में भी एह तिहुआर के बर्णन मिले ला। जायसी के ग्रंथ पद्मावत में जिकिर बा कि एही बसंत पंचमी के दिने रत्नसेन पहिली बेर शिव मंदिर में आइल पद्मावती के देखलें आ बेहोस हो गइलें।[११] प्रेम के सूफ़ी मत में चलनसार बिसय होखे आ एह दिन के प्रेम के तिहुआर होखे के कारन एकर महत्त्व सूफ़ी रचना सभ में मिले ला। कई गो दरगाह सभ पर एह दिन बिसेस आयोजन भी कइल जाला।[१२][१३]