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पुणे में पर्यटन आकर्षण सभ के लिस्ट

भोजपुरीपिडिया से
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पुणे भारत की महाराष्ट्र राज्य क दूसरा सबसे बड़ा शहर ह और इ सह्याद्री पर्वत श्रृंखला से घिरल बा। सन 1674 और 1881 के बीच मराठा साम्राज्य की दौरान इ एकर एगो बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहे। एही वजह से, इ कईगो किला और बाड़ा में बनल मराठा वास्तुकला के प्रदर्शित करेला।[] लोहगढ़ और विसापुर किला सहित एइजा क कईगो किला ए शहर की मुख्य आकर्षण में से एगो ह। ए शहर में फैलल कईगो मंदिर और आश्रम की साथ एकर समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक इतिहास भी बा। स्थानीय रोमांच और इतिहास, नशेड़ियन की अलावा, इ शहर ओशो इंटरनेशनल मैडिटेशन रिजॉर्ट की कारण कईगो अंतरराष्ट्रीय पर्यटकन के भी आकर्षित करेला जवन की पुणे क दिल कहल जाए वाला जगह पर स्थित कोरेगांव पार्क में स्थित बा।[][]

पर्यटकन खातिर पुणे क विशेष दर्शनीय स्थल[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

संग्रहालय[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

  • दर्शन संग्रहालय
  • राजा दिनकर केलकर संग्रहालय[]
  • राष्ट्रीय युद्ध संग्रहालय
  • पुणे जनजातीय संग्रहालय
  • महात्मा फुले संग्रहालय[]

किला[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

  • सिंहगढ़ किला
  • शनिवारवाड़ा
  • शिवनेरी किला
  • राजगढ़ किला
  • लोहागढ़ किला
  • विसापुर किला
  • तिकोना किला
  • मोहनगढ़ किला

लोहगढ़ और विसापुर क किला[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

लोहगढ़ और विसापुर किला पुणे की पश्चिम में लगभग 65 किलोमीटर दूरी पर स्थित बा। ए किलन के मुख्य रूप से भोर घाट की तरफ से निकले वाला महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग के सुरक्षा प्रदान क के व्यापार के बढ़ावा देवे खातिर बनावल गइल रहे। किला ले आसानी से सड़क या रेलवे मार्ग द्वारा पहुंचल जा सकेला। पुणे से मलवली रेलवे स्टेशन ले रेलगाड़ी उपलब्ध बा, जवन की ए जुड़वां किलन खातिर निकटतम रेलवे स्टेशन ह। ओकरी बाद अदमी के सड़क की द्वारा लोहगढ़ वाडी की छोट गांव ले जाए के पड़ेला जवन कि किला की बगले में स्थित बा।[]

दुनुं किला क गठन अद्वितीय बा और दुन्नु एगो पर्वतीय चोटी द्वारा जुड़ल बान स जेके 'गायमुख' कहल जाला। किला की रास्ता में चारगो विशाल दरवाजा बान स उन्हन के गणेश, नारायण, हनुमान और महादरवाजा की नांव से जानल जाला। कुछ शिलालेख से पता चलेला कि नाना फडणवीस की शासन की दौरान गणेश दरवाजा बनावल गइल रहे। एगो 1500 मीटर क लंबा देवाल किला की चारों ओर से बा और आसानी से लंबी दूरी से दिखाई देला। देवाल क चौड़ाई 30 मीटर बा और लोहगढ़ किला की पूर्वी हिस्सा में, एगो बहुत बड़ छेद बा जवन की बहुत दूर से गुजरे वाली ट्रेन से भी आसानी से दिखाई दे जाला।

विसापुर किला लोहगढ़ किला की निकट स्थित बा और ए अनूठा किला ले पहुंचे खातिर एगो लंबा देवाल की आसपास चले के पड़ेला। विसापुर किला लोहगढ़ की किला की बाद 1713-1720 के दौरान बालाजी विश्वनाथ द्वारा बनावल गइल रहे, जवन की मराठा साम्राज्य क पहिला पेशवा रह न। विसापुर किला की चारों ओर एगो लम्बा देवाल क निर्माण कइल गइल बा जवन की दुर्ग की स्वरूप में बा। ए किला क निर्माण जवने पहाड़ी पर भइल बा उ अपनी भज की इतिहासी गुफाओं खातिर भी प्रसिद्ध बा जवन कि किला की निर्माण से पहिले से ही अस्तित्व में रहे। इतिहासकारन खातिर इ गुफा उन्हन की बौद्ध संबंधन की चलते महत्वपूर्ण बाड़ी स।

संदर्भ[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]