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पड़रौना

भोजपुरीपिडिया से

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उदित नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज, पड़रौना

पड़रौना या पडरौना भारत देश की उत्तर प्रदेश राज्य की उत्तरी पूरबी सीमान्त इलाका में एगो शहर बा जेवन जिला कुशीनगर के मुख्यालय हवे। ए शहर के प्राचीन नाँव पावा बतावल जालाटेम्पलेट:Sfn जेवन मल्ल क्षत्री लोगन क राजधानी रहे। इहंवे से कुछ दूरी पर भगवान बुद्ध चुन्द नाँव की लोहार की घरे आपन आखिरी भोजन कइला की बाद बीमार पड़ल रहलें। प्राचीन पावा क अवशेष वर्तमान फाजिलनगर से थोड़ी दूर पर मानल जाला। एकरी नाँव की बारे में इहो मान्यता बा कि भगवान राम इहँवा कुछ समय बितावलें आ भगवान राम की पद से रौंदा अस्थान पदरौना आ फिन बाद में पडरौना हो गइल।

वर्तमान समय में ई शहर कुशीनगर जिला के मुख्यालय बा आ आसपास की इलाका की लोगन के बाज़ार से ले के शिक्षा आ रोजगार के मौका उपलब्ध करावत बा। इहाँ एगो चीनी मिल बा जेवन गन्ना उद्योग खातिर महत्वपूर्ण बा। उदित नारायण पोस्ट ग्रेजुएट कालेज ए इलाका में शिक्षा के महत्वपूर्ण केन्द्र बाटे।

इतिहास[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

पड़रौना या पडरौना क प्राचीन नाँव पावा बतावल जाला। प्राचीन काल में पावा (वर्तमान पड़रौना) मल्ल गणराज्य के राजधानी रहे आ इहँवा एगो संसद जइसन संथागार से ए इलाका क शासन चलावल जाय।

भगवान बुद्ध मल्ल लोगन के आमंत्रण पर इहँवा आ के उपदेश दिहलीं आ इहंवे चुन्द नाँव की लोहार की घरे आपन आखिरी भोजन ग्रहण कइलिन। एकरी बाद उहाँ के कुशीनारा या कुशवती की जंगल तक पहुँच के ककुत्था नदी पार क के तबियत खराब हो गइल। हालाँकि गौतम बुद्ध आनंद से कहलीं कि चुन्द से कहि दें कि ओकरी दिहल भोजन में कौनो खराबी ना रहल ह आ अब हमार परिनिर्वाण के समय आ गइल बा। एकरी बाद भगवान बुद्ध आपन अन्तिम उपदेश दिहलें आ परिनिर्वाण प्राप्त कइलें। जहाँ भगवान बुद्ध के परिनिर्वाण (देह त्याग) भइल ओ अस्थान के अब कुशीनगर की नाँव से जानल जाला आ इहँवा परिनिर्वाण मंदिररामभर स्तूप आज की समय में बौद्ध धर्म के तीर्थ आ पर्यटन केन्द्र की रूप में बा।

महाजनपद काल में ई इलाका कोसल की अंतर्गत आवे आ महाराजा प्रसेनजित की मरला की बाद ए क्षेत्र में छोट-छोट राज्य अस्थापित हो गइलें। मगध साम्राज्य की विस्तार की बाद ई क्षेत्र मगध की शासन में चलि गइल। मध्यकाल आ एकरी बाद के इतिहास बहुत न मालूम बा।

पड़रौना की नाँव के एगो अउरी उत्पत्ति बतावल जाला। कहल जाला कि भगवान राम ए क्षेत्र में कुछ समय रहलें आ उनकी पद से रौंदल इलाका के पद+रौंदा कहल गइल आ इहे बाद में पड़रौना हो गइल।

भूगोल[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

पड़रौना शहर क भूगोलीय अवस्थिति 26.9 उ. अक्षांश आ 83.98 पू. देशांतर पर बा। गोरखपुर से लगभग 75 कि.मी. पुरुब ओर आ देवरिया से ## कि.मी. उत्तर ओर स्थित बा।

भूआकृति विज्ञान की हिसाब से ई शहर मध्य गंगा मैदान की उत्तरी हिस्सा में बा आ एकरी कुछे उत्तर में तराई क इलाका शुरू हो जाला। जमीन जलोढ़ चट्टान से बनल बा आ ई जलोढ़ हिमालयी नदियन की द्वारा ले आवल अवसाद की निक्षेप से बनल बा। ज़मीन क सामान्य ढाल दक्खिन-पच्छिम से उत्तर-पूरुब ओर बा। पड़रौना से सटले उत्तर ओर वाणी नदी बहत रहे जेवना के धारा चीनी मिल बनवावे खातिर मोड़ दिहल गईल। वाणी नदी पच्छिम से पूरुब ओर बहे आ फिर उत्तर की ओर मुड़ के बेलवाँ जंगल कि लगे झरही नदी में मिल जाय। पड़रौना से थोड़ी दूर पहिले पच्छिम ओर ए में से एगो नाला खनवा के एकर पानी पहिलहीं झरही की ओर मोड़ दिहल गइल बा। लेकिन तबो अभिन ले एकर पुरान थाला मौजूद बा आ बरखा भइला पर पानी से भर जाला। चीनी मिल क ठंढा करे वाला फौवारा तालाब (cooling pond) आ दरबार क रामधाम पोखरा एही वाणी नदिए क हिस्सा हउवे।

जलवायु नम शीतोष्ण प्रकार के बा। जाड़ा, बसंत, गर्मी, बरसात क ऋतु पावल जालिन। मई के महीना में लूहि बहला पर प्रचंड गर्मी पड़ेले। तराई क इलाका नज़दीक रहला से इहाँ बरखा पहिले शुरू हो जाले आ ढेर होले। मानसून क आगमन लगभग 10 जून के। होला जाड़ा में कुहरा पड़ेला आ शीतलहरी की समय न्यूनतम तापमान 5 °C से नीचे भी चलि जाला। लूहिशीतलहरी की चरम तापमान की अलावा बरसात के उमस भरल गर्मी भी बहुत कष्टदायक होले। बाकी समय मौसम सुहावन रहेला।

माटी में नमी बहुत समय ले रहेले आ जमीन की नीचे पानी क लेवल (जल-स्तर) अबहिन बहुत नीचे नइखे गिरल। पड़रौना की दक्खिन ओर से बड़की नहर गुजरेले जेवना से जल स्तर सामान्य से ऊपर रहेला।

मुख्य फसल गन्नाधान बा। व्यापारिक कृषि की रूप में हरदी, पपीता, केला इत्यादी क खेती भी होला।

जनसंख्या[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

पड़रौना नगर पालिका क्षेत्र में कुल 25 ठे वार्ड बा आ कुल जनसंख्या 47,723 बाटे।[]

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फोटो गैलरी[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

संदर्भ[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

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स्रोत[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

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