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बनारसी साड़ी

भोजपुरीपिडिया से

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हथकरघा प साड़ी बीनत एगो बुनकर।

बनारसी साड़ी एगो बिसेस किसिम के साड़ी हऽ जे शहर बनारस आ आसपास के इलाका में हथकरघा पर बीनल जाले।[] रेशम (सिल्क) के ऊपर सोना-चानी के तार के कढ़ाई आ जरी, भा रंगीन रेशम के सूत के कढ़ाई के काम वाली ई साड़ी भारत के सभसे बेहतरीन साड़ी सभ में गिनल जाए वाली साड़ी हईं जे औरत लोग बहुत खास मोका पर पहिरे ला। बहुधा ई बियाह के समय दुलहिन के पोशाक होखे ला।

महीन रेशम के सूत से बनल आ ओहपर कढ़ाई के कारन ई साड़ी भारी होखे लीं। कढ़ाई आ जरी के काम जेतने बेसी होला साड़ी के वजन, बीने में लागे वाला समय आ दाम ओतने बेसी होला।

बनारस शहर के आसपास के इलाका जेह में खुद बनारस जिला के अलावा चंदौली, भदोही, मिर्जापुर, जौनपुरआजमगढ़ जिला के इलाका सामिल बाने ई साड़ी बीने के काम पुराना समय से होखत आ रहल बा। साल 2009 में एह साड़ी सभ के "बनारसी कढ़ाई आ साड़ी" के नाँव से जीआई टैग मिलल जे एक किसिम के बौद्धिक अधिकार हवे कि कौनों खास जगह से जुड़ल चीज के पहिचान आ ओकरे क्वालिटी आ परिसिद्धि ओह जगह के नाँव से पहिचानल जाय आ अउरी कहीं ओकर नकल क के ई चीज ओही नाँव से न बिकाय।[]

पछिला कुछ समय में बनारसी बुनकर लोग के बहुत संकट के सामना करे के पड़ल आ एह साड़ी सभ के उद्योग पर खतरा पैदा भऽ गइल रहल। एह में मुख्य कारन मशीन द्वारा अइसने मिलत-जुलत साड़ी के बिनाई क के गुजराती ब्यापारी लोग आ चीन के बनल साड़ी के ब्यापारी लोग बजार के अइसन साड़ी से भर दिहलें जे बनारसी के नाँव से बिकायँ।[]

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संदर्भ[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

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बाहरी कड़ी[संपादन करीं | स्रोत संपादित करीं]

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